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UP : उत्तर प्रदेश के खुर्जा इलाके में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया। नेहरूपुर गांव के पास रेलवे लाइन के किनारे एक पेड़ से महिला का शव लटक रहा था। पेड़ के नीचे जमीन पर एक युवक और चार साल की मासूम बच्ची की लाश पड़ी थी। रेलवे ट्रैक की जांच कर रहे कीमैन सोनपाल ने जैसे ही यह दृश्य देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई और इलाके में सनसनी फैल गई। शुरुआत में पुलिस को मामला सामूहिक आत्महत्या का लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, रिश्तों की ऐसी उलझी हुई कहानी सामने आई जिसने पूरे मामले को खौफनाक बना दिया।
बंगाल से आए थे सपनों के साथ
मृतकों की पहचान पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के रहने वाले परिवार के रूप में हुई। परिवार का मुखिया अपेश्वर सरकार अपनी पत्नी देवी सरकार, छोटे भाई सरल सरकार और चार साल की बेटी सावंती के साथ खुर्जा में मजदूरी करने आया था। यहां दोनों भाई पॉटरी फैक्ट्रियों में मजदूरी करते थे। छोटे से किराए के कमरे में यह परिवार अपनी जिंदगी के छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इसी परिवार के अंदर रिश्तों का ऐसा तूफान पल रहा है, जो एक दिन सब कुछ तबाह कर देगा।
देवर-भाभी के रिश्ते ने लिया खतरनाक मोड़
पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी।
बताया गया कि देवी सरकार और उसके देवर सरल सरकार के बीच काफी समय से नजदीकियां बढ़ गई थीं। यह रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गया। पति अपेश्वर को भी इस रिश्ते पर शक होने लगा था। बताया जाता है कि होली के दिन अपेश्वर ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद घर में जमकर झगड़ा हुआ। हालांकि मामला कुछ दिन शांत हो गया, लेकिन परिवार के अंदर तनाव लगातार बढ़ता गया।
शादी की जिद और बढ़ता तनाव
पुलिस सूत्रों के मुताबिक देवी सरकार अपने देवर सरल से शादी करने की जिद पर अड़ी हुई थी। लेकिन यह रिश्ता समाज और परिवार दोनों के लिए स्वीकार करना लगभग नामुमकिन था। यही वजह थी कि घर में अक्सर झगड़े होते रहते थे। 11 मार्च को भी इसी बात को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। कहा जा रहा है कि इसी विवाद के बाद देवी घर छोड़कर चली गई थी।
मोबाइल ने खोले कई राज
जांच में सामने आया कि अपेश्वर और उसकी पत्नी एक ही मोबाइल फोन इस्तेमाल करते थे। 11 मार्च के झगड़े के बाद देवी वह मोबाइल अपने साथ ले गई थी। पत्नी से संपर्क टूटने के बाद अपेश्वर ने 12 मार्च को नया मोबाइल और सिम कार्ड खरीदा। उसने पत्नी को कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शाम होते-होते फोन बंद हो गया। कुछ लोगों ने अपेश्वर को बताया कि देवी उसके भाई के पास चली गई है। अपेश्वर ने सोचा कि अगले दिन वह जाकर बात करेगा। लेकिन उससे पहले ही एक ऐसी खबर आई जिसने उसकी जिंदगी बदल दी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सुलझाई गुत्थी
जब पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया तो पूरा मामला साफ हो गया। रिपोर्ट में सामने आया कि चार साल की बच्ची सावंती की गला घोंटकर हत्या की गई थी। देवर सरल सरकार को भी गला दबाकर मौत के घाट उतारा गया था। वहीं, देवी सरकार ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी थी। फोरेंसिक साक्ष्यों और परिस्थितियों को जोड़कर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि यह दोहरी हत्या के बाद आत्महत्या का मामला है।
पहले बेटी, फिर प्रेमी देवर की हत्या
जांच के मुताबिक घटना की रात देवी सरकार ने पहले अपनी सोती हुई बेटी सावंती का गला घोंटा। इसके बाद अपने प्रेमी देवर सरल की हत्या कर दी। दोनों की हत्या करने के बाद वह रेलवे लाइन के पास एक पेड़ पर फंदा लगाकर झूल गई। पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर किसी चौथे व्यक्ति के मौजूद होने के कोई सबूत नहीं मिले।
जब एक साथ पहुंचे तीन शव, टूट गया पति
शुक्रवार रात जब पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव एम्बुलेंस से खुर्जा कोतवाली पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। जैसे ही अपेश्वर ने अपनी पत्नी, भाई और बेटी के शव देखे, वह जोर-जोर से रोने लगा। वह सिर पटक-पटक कर बस एक ही बात कह रहा था… “मेरा सब खत्म हो गया… अब किसके लिए जिऊंगा…” उसकी चार साल की बेटी का शव देखकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
कांपते हाथों से दी पत्नी और भाई को मुखाग्नि
अपेश्वर ने पहले अपनी मासूम बेटी को मुंडाखेड़ा मार्ग स्थित कब्रिस्तान में दफनाया। इसके बाद वह जंक्शन मार्ग के श्मशान घाट पहुंचा। वहां उसने पत्नी देवी और भाई सरल का बंगाली रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। जिस भाई और पत्नी ने उसकी दुनिया उजाड़ दी थी, उन्हीं को मुखाग्नि देते वक्त उसके हाथ कांप रहे थे। इस दुख की घड़ी में उसके साथ कोई रिश्तेदार नहीं था। सिर्फ कुछ मजदूर साथी और पुलिसकर्मी ही उसे संभालते नजर आए।
पुलिस जांच पर भी उठे सवाल
घटनास्थल खुर्जा देहात थाना क्षेत्र में आता है, लेकिन सूचना मिलने पर नगर कोतवाली पुलिस भी वहां पहुंच गई थी। दोनों थानों के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर शुरुआती समय में थोड़ी उलझन रही, जिसके कारण कुछ अहम साक्ष्य जुटाने में देर हुई। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जांच नगर कोतवाली पुलिस को सौंप दी गई।
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