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Ranchi : रांची के एटीएम केंद्रों के बाहर पिछले कुछ समय से एक ऐसा जाल बिछाया जा रहा था, जिसमें फंसने के बाद लोगों को पता भी नहीं चलता था कि उनके खाते से पैसे कब और कैसे गायब हो गए। कोई बुजुर्ग पेंशन निकालने आता था, कोई मजदूर अपनी मेहनत की कमाई लेने, तो कोई छात्र एटीएम से कुछ पैसे निकालने। लेकिन कई बार एटीएम से बाहर निकलते ही लोगों को एहसास होता कि उनके साथ कुछ गड़बड़ हो गई है। दरअसल, एटीएम के बाहर ही दो शातिर अपराधी ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे जिन्हें मशीन चलाने में थोड़ी परेशानी होती। मदद के नाम पर वे चुपचाप कार्ड बदल देते और बाद में उसी कार्ड से खाते से पैसे उड़ा लेते। अब ऐसे ही एक गिरोह के दो सदस्यों को रांची पुलिस ने पकड़ लिया है।
गुप्त सूचना से खुला पूरा खेल
रांची के रुरल एसपी प्रवीण पुष्कर ने मीडिया को बताया कि एसएसपी राकेश रंजन को गुप्त सूचना मिली थी कि दो संदिग्ध युवक फर्जी नंबर प्लेट लगी पल्सर बाइक से शहर में घूम रहे हैं। ATM कार्ड बदलकर लोगों के खाते से पैसे निकाल निकाल लेना इन लड़कों की फितरत है। सूचना मिलते ही सिटी एसपी के नेतृत्व और सदर डीएसपी संजीव बेसरा की देखरेख में एक टीम बनाई गई। पुलिस को शक था कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह शहर में सक्रिय है।
बीआईटी मेसरा इलाके में पुलिस की घेराबंदी
पुलिस टीम ने बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी। बीआईटी रेलवे ओवरब्रिज के पास पुलिस पहले से ही तैनात थी। सदर थानेदार इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार खुद गाड़ियों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान ब्लू रंग की पल्सर बाइक (JH01CF-4430) पर सवार दो युवक वहां से गुजरते दिखे। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था और उनकी गतिविधियां संदिग्ध लग रही थीं। जैसे ही पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, दोनों बाइक घुमाकर भागने लगे। इसके बाद पुलिस ने उनका पीछा शुरू किया। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद जुमार पुल के पास दोनों को पकड़ लिया गया।
तलाशी में मिला ठगी का सामान
जब पुलिस ने दोनों की तलाशी ली तो उनके पास से अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड और दो मोबाइल फोन मिले। इसके अलावा जिस बाइक से वे घूम रहे थे, उस पर लगी नंबर प्लेट भी फर्जी निकली। बाइक पर नंबर JH01CF-4430 लगा हुआ था, जबकि उसका असली नंबर JH01CE-4430 है।
नवादा से आते थे ठगी करने
पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना नाम विक्रम कुमार शर्मा उर्फ बिट्टू और धनंजय कुमार सिंह बताया। दोनों बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि वे ATM केंद्रों पर लोगों को निशाना बनाते थे। खासकर बुजुर्ग या ऐसे लोग जो मशीन चलाने में झिझकते थे, उन्हें मदद का झांसा देकर उनका कार्ड बदल लेते थे। जब पीड़ित को लगता कि मशीन में कोई समस्या है, तब तक उनका कार्ड बदल चुका होता था। बाद में ये शातिर उचक्के उसी कार्ड से अलग-अलग एटीएम से पैसे निकाल लेते थे।
कई जिलों में कर चुके कांड
रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर के अनुसार, यह गिरोह पहले भी रांची के अलावा धनबाद, जमशेदपुर और गिरिडीह जैसे जिलों में इसी तरह की ठगी कर चुका है। पुलिस को शक है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। मोबाइल फोन और अन्य सुरागों के आधार पर अब नेटवर्क की जांच की जा रही है।
ATM कार्ड से खेला कर खाते से उड़ा देता माल, कैसे… राज खोल गये रांची के रुरल SP प्रवीण पुष्कर… देखें वीडियो pic.twitter.com/PJv4KqFhQ7
— News Samvad (@newssamvaad) March 15, 2026
सराहनीय रही इनकी भूमिका
इन शातिरों को दबोचने में सदर डीएसपी संजीव कुमार बेसरा, सदर थानेदार इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार और मेसरा ओपी प्रभारी अजय कुमार दास की अहम भूमिका रही।
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