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News Samvad : भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का कारोबारी दिन बेहद खराब रहा। दिनभर बिकवाली का दबाव इतना भारी रहा कि बाजार आखिरकार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 3 फीसदी से ज्यादा की टूट दर्ज की गई। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2496.89 अंक टूटकर 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 775.65 अंक की गिरावट के साथ 23,002.15 पर आ गया। बाजार की इस गिरावट का असर सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निवेशकों की दौलत में भी बड़ी सेंध लगी।
एक ही दिन में निवेशकों को बड़ा झटका
गुरुवार की भारी बिकवाली के कारण बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 11.5 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार बंद होने तक बीएसई कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 427 लाख करोड़ रुपये रह गया।
यानी साफ है कि बाजार की यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी बड़ा असर डालने वाली रही। जिन लोगों ने हाल के दिनों में बाजार में पैसा लगाया था, उनके लिए यह दिन काफी नुकसान वाला साबित हुआ।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
इस बड़ी गिरावट के पीछे सिर्फ घरेलू वजहें नहीं थीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हालात ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया। सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। वहां जारी संघर्ष अब ऊर्जा ढांचे तक पहुंच गया है, जिससे पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।
ईरान के बड़े गैस उत्पादन क्षेत्र पर हमले और कतर में दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादन सुविधा को निशाना बनाए जाने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया। बाजार को डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर तेल-गैस की कीमतों, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ऊर्जा संकट का डर, बाजार में घबराहट
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, अगर ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर महसूस किया जाएगा।
ऊर्जा की सप्लाई में रुकावट का मतलब है कि कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। और जब ऊर्जा महंगी होती है, तो ट्रांसपोर्ट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक हर सेक्टर पर दबाव आता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार में बिकवाली बढ़ गई है।
फेडरल रिजर्व ने दरें नहीं बदलीं, लेकिन संकेत ने डराया
बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली एक और बड़ी वजह अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का रुख रहा। फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन फेड चेयर जेरोम पॉवेल के बयान ने निवेशकों को ज्यादा राहत नहीं दी।
पॉवेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बार “अनिश्चितता” का जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिए कि टैरिफ और ऊर्जा संकट की वजह से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। बाजार ने इसे एक हॉकिश स्टैंड के तौर पर लिया, यानी फेड फिलहाल पूरी तरह नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं दिख रहा।
इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा, क्योंकि जब अमेरिका से सख्त संकेत आते हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ जाता है।
सोना-चांदी भी फिसले
दिलचस्प बात यह रही कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमत 14,230 रुपये गिरकर 2.33 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोना 5,330 रुपये टूटकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार कीमतों में गिरावट ने बाजार को और उलझन में डाल दिया।
हर तरफ लाल निशान, निवेशकों में बेचैनी
गुरुवार को बाजार में ऐसा माहौल रहा जहां लगभग हर सेक्टर पर दबाव नजर आया। बड़े शेयरों में बिकवाली का असर ज्यादा दिखा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट आई। बाजार की चाल से साफ लग रहा था कि निवेशक फिलहाल किसी भी बड़े जोखिम से बचना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
अब निवेशकों की नजर कुछ अहम बातों पर रहेगी —
पश्चिम एशिया के हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं,
ऊर्जा सप्लाई पर कितना असर पड़ता है,
और अमेरिकी फेड आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है।
अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में कमजोरी कुछ और समय तक बनी रह सकती है। वहीं, अगर हालात संभलते हैं तो बाजार में राहत की वापसी भी देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
गुरुवार का दिन शेयर बाजार के लिए बेहद खराब साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट ने यह साफ कर दिया कि वैश्विक तनाव, ऊर्जा संकट की आशंका और फेड की सख्त टिप्पणी ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है। एक ही दिन में 11.5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी का साफ होना इस गिरावट की गंभीरता को दिखाता है।
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