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Hazaribagh : बड़कागांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को माहौल कुछ अलग था। आम दिनों की तरह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि उम्मीद भी बांटी जा रही थी। यह नेक काम किया जा रहा था अदाणी फाउंडेशन के जरिये। लाइन में खड़े लोग सिर्फ मरीज नहीं थे, वे ऐसे चेहरे थे जो लंबे समय से बीमारी, कमजोरी और चिंता से जूझ रहे थे। किसी की आंखों में थकान थी, तो किसी के चेहरे पर हल्की मुस्कान… शायद इस भरोसे के साथ कि आज कुछ अच्छा मिलने वाला है।
“अब ताकत मिलेगी तो जल्दी ठीक हो जाऊंगा”
करीब 45 साल के रामू महतो (बदला हुआ नाम) धीरे-धीरे चलते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया, “दवा तो ले रहे हैं, लेकिन कमजोरी बहुत हो जाती है। काम भी नहीं कर पाते। अब ये किट मिली है, तो लग रहा है थोड़ा सहारा मिलेगा।” ऐसे ही कई मरीज थे, जिनके लिए यह पोषण किट सिर्फ राशन नहीं, बल्कि बीमारी से लड़ने की ताकत थी।
बीमारी से ज्यादा मुश्किल है कमजोरी और अकेलापन
टीबी सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि जिंदगी की रफ्तार को भी धीमा कर देती है। मरीज अक्सर काम छोड़ देते हैं, आमदनी घट जाती है और खाने-पीने पर असर पड़ता है। यही वजह है कि डॉक्टर भी मानते हैं कि दवा के साथ सही पोषण बेहद जरूरी है। मेडिकल ऑफिसर डॉ. मिथु हल्दर ने भी मरीजों से बात करते हुए यही बात समझाई। उन्होंने सरल शब्दों में कहा, “अगर शरीर को सही पोषण मिलेगा, तभी दवा सही तरीके से असर करेगी। बीच में इलाज छोड़ना सबसे बड़ी गलती होती है।”
एक किट… लेकिन कई मायने
जब मरीजों को पोषण किट मिली, तो कई चेहरों पर राहत साफ दिखी। किसी ने तुरंत खोलकर देखा, तो किसी ने संभालकर रख लिया, जैसे कोई कीमती चीज हो। सीएसआर टीम के एक सदस्य ने बताया कि हर किट इस सोच के साथ तैयार की गई है कि मरीजों को जरूरी पोषण मिल सके और वे जल्दी रिकवर करें। साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि क्या खाना है, कैसे खाना है और किन बातों का ध्यान रखना है।

“कोई हमारा भी ख्याल रख रहा है”
एक महिला मरीज ने हौले से कहा, “बीमारी में सबसे ज्यादा डर यही लगता है कि कोई साथ नहीं है। आज लगा कि कोई हमारा भी ख्याल रख रहा है। भला हो अदानी फाउंडेशन का।” यही भावना इस पूरे कार्यक्रम की असली ताकत थी… सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि अपनापन देना।
पांचवां चरण खत्म, लेकिन कोशिश जारी
यह कैंप टीबी पोषण सहायता कार्यक्रम के पांचवें चरण का आखिरी पड़ाव था। लेकिन इसके साथ ही एक संदेश भी साफ था… यह पहल रुकने वाली नहीं है। अदाणी फाउंडेशन की टीम लगातार ऐसे कार्यक्रम चला रही है, ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंचती रहे।
बदलाव की छोटी-छोटी शुरुआत
बड़कागांव में स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास जैसे कई काम भी अदाणी फाउंडेशन के द्वारा चलाये जा रहे हैं। इन प्रयासों का असर धीरे-धीरे दिख रहा है। लोग जागरूक हो रहे हैं, इलाज के प्रति गंभीर हो रहे हैं और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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