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Hazaribagh : जब मंच से एक-एक कर नाम पुकारे जा रहे थे, तो भीड़ में बैठे कई चेहरों की धड़कनें तेज हो जाती थीं। कुछ हाथों में पसीना था, कुछ आंखों में सपने। जैसे ही ऑफर लेटर हाथ में आया, कई युवाओं की आंखें चमक उठीं। यह सिर्फ एक कागज नहीं था, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और एक नए जीवन की शुरुआत थी। यह मौका था अदाणी फाउंडेशन के तहत चल रहे अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, बड़कागांव में आयोजित ऑफर लेटर वितरण समारोह का, जहां 45 युवाओं को नौकरी का अवसर मिला।
गांव से निकलकर सपनों तक का सफर
इन युवाओं में कई ऐसे हैं जिनके परिवार की आय सीमित है। कुछ के पिता किसान हैं, तो कुछ दिहाड़ी मजदूर। पढ़ाई के बाद अक्सर रास्ता साफ नहीं होता था। ऐसे में स्किल डेवलपमेंट सेंटर ने उन्हें सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं दी, बल्कि यह भरोसा भी दिया कि मेहनत करने पर नौकरी मिल सकती है। एक चयनित युवक ने कहा, “पहले लगता था गांव में रहकर कुछ नहीं हो पाएगा। अब लगता है कि हम भी कुछ कर सकते हैं।”
210 युवाओं की मेहनत, 45 को सीधा रोजगार
इस बैच में 210 युवाओं ने प्रशिक्षण पूरा किया। डाटा एंट्री ऑपरेटर और असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन जैसे कोर्स में युवाओं ने हिस्सा लिया। इनमें से 21 इलेक्ट्रीशियन और 24 कंप्यूटर कोर्स के प्रशिक्षुओं को नौकरी मिली। यह आंकड़ा भले छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे सैकड़ों परिवारों की उम्मीदें जुड़ी हैं।
नामी कंपनियों तक पहुंच, बदली सोच
चयनित युवाओं को टाटा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, सदर अस्पताल, आरोग्यम हॉस्पिटल, कॉजेंट टेक्नोलॉजीज, बजाज कैपिटल और रिशडम इंडिया जैसे संस्थानों में मौका मिला। ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए इन कंपनियों तक पहुंच बनाना पहले आसान नहीं था। अब यही युवा वहां काम करेंगे, यह सोच ही इलाके के दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
परिवारों के लिए भी खास पल
समारोह में सिर्फ युवा ही नहीं, उनके माता-पिता भी मौजूद थे। कई अभिभावकों के चेहरे पर गर्व साफ दिख रहा था। एक मां ने भावुक होकर कहा, “हमने सोचा नहीं था कि हमारा बेटा कभी नौकरी करेगा। आज लग रहा है मेहनत रंग लाई।”
सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, आत्मविश्वास भी मिला
केंद्र में ट्रेनिंग सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रही। यहां युवाओं को इंटरव्यू देना, समय पर काम करना और टीम में काम करने जैसी बातें भी सिखाई गईं। यही वजह है कि कंपनियों ने इन युवाओं को भरोसे के साथ चुना।
गांव में ही बदलाव की शुरुआत
बड़कागांव जैसे इलाके में जब एक युवा नौकरी पाता है, तो उसका असर पूरे गांव पर पड़ता है। छोटे बच्चे उसे देखकर प्रेरित होते हैं और परिवारों में शिक्षा को लेकर सोच बदलती है। अब यहां के कई युवा स्किल ट्रेनिंग की तरफ रुख कर रहे हैं।
आगे की राह और उम्मीदें
केंद्र प्रबंधन का कहना है कि यह शुरुआत है। आने वाले समय में और ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा। साथ ही अदाणी फाउंडेशन की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में भी काम जारी रहेगा, ताकि बदलाव सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे इलाके तक पहुंचे।
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