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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : शाम का वक्त था। सुभाष चौक के पास दुर्गा मंदिर परिसर में हल्की चहल-पहल के बीच भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। दूर गोला से लेकर रामगढ़ तक रास्ते में जहां-तहां समर्थकों की भीड़ नजर आ रही थी। लोग अपने तरीके से इंतजार कर रहे थे, किसी के हाथ में झंडा था तो कोई बस एक झलक देखने के लिए खड़ा था। इसी माहौल में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का आगमन हुआ। भीड़ के बीच से उठती आवाजों और नारों के बीच उनका स्वागत हुआ। लेकिन इस पूरे माहौल में सिर्फ राजनीति या संगठन की बात नहीं थी, बल्कि लोगों के चेहरे पर अपनी पहचान को लेकर एक अलग तरह की जिज्ञासा भी दिख रही थी।
भीड़ से निकलती उम्मीद और पहचान की तलाश
सभा स्थल पर बैठे कई लोग अलग-अलग जिलों से आए थे। किसी की आंखों में उत्साह था तो किसी के चेहरे पर गंभीरता। एक बुजुर्ग समर्थक ने धीरे से कहा कि आजकल समाज में सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोग एक-दूसरे को बांटकर देखने लगे हैं। युवा वर्ग में भी इस चर्चा का असर दिखा। कुछ लोग मोबाइल पर वीडियो बना रहे थे, कुछ ध्यान से सुन रहे थे। माहौल में नारे भी थे और बीच-बीच में तालियों की आवाज भी।
मंच से उठी बात और भीड़ की प्रतिक्रिया
अपने संबोधन में तोगड़िया ने जातीय पहचान और सामाजिक एकता को लेकर बात रखी। उन्होंने कहा कि लोग अगर खुद को पहले एक पहचान के रूप में देखें तो समाज की तस्वीर अलग दिखेगी। उनकी बात सुनते हुए भीड़ में कई लोग सिर हिलाते नजर आए। कुछ लोग सहमति में थे, तो कुछ बस सुन रहे थे। मंच और मैदान के बीच एक ऐसा संवाद बन रहा था जिसमें हर कोई अपनी समझ के हिसाब से बात को महसूस कर रहा था।
हेल्पलाइन का जिक्र और लोगों की उम्मीद
सभा के दौरान उन्होंने एक हेल्पलाइन नंबर 02066803300 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस नंबर के जरिए लोगों को मदद मिलती है। भीड़ में खड़े कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ एक जानकारी नहीं थी, बल्कि एक उम्मीद जैसी लगी। किसी ने इसे नोट किया, तो किसी ने अपने साथी को याद दिलाया।
स्वागत से ज्यादा एक सामाजिक तस्वीर
कार्यक्रम में मारवाड़ी, ब्राह्मण, क्षत्रिय सहित कई समुदायों के लोग मौजूद थे। मंच के आसपास खड़े लोगों के बीच बातचीत भी चलती रही, लेकिन एक बात साफ दिख रही थी कि यहां मौजूद हर व्यक्ति सिर्फ एक राजनीतिक सभा का हिस्सा नहीं था, बल्कि अपने आसपास बदलते समाज को भी महसूस कर रहा था। मुख्य रूप से प्रकाश मिश्रा, प्रशांत सिंह, दीपक मिश्रा, दीपक सिसोदिया समेत कई लोग मौजूद रहे। लेकिन इस पूरी भीड़ के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली चीज लोगों के चेहरे थे, जिनमें सवाल भी थे और उम्मीद भी।
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