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Home » रांची में EUS तकनीक की नई शुरुआत, मशहूर डॉ. जयंत घोष बने बदलाव की पहचान
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रांची में EUS तकनीक की नई शुरुआत, मशहूर डॉ. जयंत घोष बने बदलाव की पहचान

April 12, 2026No Comments5 Mins Read
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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में पेट की गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। ऑर्किड हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) तकनीक की शुरुआत कर दी गई है। यह तकनीक पेट, आंत, अग्न्याशय और पाचन तंत्र से जुड़ी जटिल बीमारियों की पहचान में बेहद कारगर मानी जाती है।

इस तकनीक की शुरुआत को लेकर आयोजित पहली बड़ी बैठक और लाइव वर्कशॉप में सबसे अहम भूमिका निभाई गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. जयंत घोष ने, जिनके नेतृत्व में यह पूरा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। चिकित्सकीय जगत में यह आयोजन झारखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

डॉ. जयंत घोष की पहल से रांची को मिली आधुनिक सुविधा

रांची में अब तक पेट की कई जटिल बीमारियों की जांच के लिए मरीजों को दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर या बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन डॉ. जयंत घोष की पहल और प्रयास से अब यह सुविधा झारखंड में ही उपलब्ध हो गई है। डॉ. घोष ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि EUS तकनीक से पेट और पाचन तंत्र की बीमारियों की पहचान पहले से ज्यादा सटीक और आसान हो जाएगी। इससे मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा और गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

क्या है EUS तकनीक और क्यों है खास?

डॉ. जयंत घोष के अनुसार एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड तकनीक एक ऐसी आधुनिक जांच पद्धति है जिसमें एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड दोनों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक खासतौर पर उन बीमारियों में मददगार है, जिनकी पहचान सामान्य जांच से स्पष्ट नहीं हो पाती। EUS के जरिए डॉक्टर पेट के अंदरूनी हिस्सों को बेहद नजदीक से देख सकते हैं, जिससे बीमारी की सही स्थिति का पता चलता है। डॉ. घोष ने कहा कि इस तकनीक से पेट के कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में संभव है। शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ में आ जाए तो इलाज सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

बायोप्सी अब होगी आसान, मरीजों को कम तकलीफ

डॉ. जयंत घोष ने बताया कि EUS तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बायोप्सी लेना बेहद आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में मरीज को अधिक दर्द या परेशानी नहीं होती और अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना भी बहुत कम रहती है। अगर किसी कारण से रक्तस्राव होता भी है तो डॉक्टर उसे तुरंत नियंत्रित कर लेते हैं। डॉ. घोष के मुताबिक यह तकनीक न सिर्फ जांच में मदद करती है बल्कि कई मामलों में इलाज की दिशा भी तय करती है।

पहली बार रांची में आयोजित हुआ ‘G-SKOPE’ वर्कशॉप

ऑर्किड हेरिटेज इंस्टीट्यूट में आयोजित यह कार्यक्रम ‘G-SKOPE Workshop’ के नाम से आयोजित किया गया, जो रांची और पूरे झारखंड के लिए पहली बार हुआ। कार्यक्रम में लाइव डेमो के जरिए डॉक्टरों को EUS की बारीकियां समझाई गईं। इसमें ओडिशा के प्रसिद्ध पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. जिम्मी नारायण और बोकारो के डॉ. राकेश कुमार ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। इस दौरान डॉ. अखिलेश कुमार यादव ने लाइव सर्जरी और तकनीकी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. जयंत घोष ने कहा कि यह वर्कशॉप डॉक्टरों के लिए सीखने का एक बेहतरीन अवसर साबित हुआ।

15 मरीजों को मिला नि:शुल्क जांच और उपचार का लाभ

इस ऐतिहासिक आयोजन की एक बड़ी खासियत यह रही कि कार्यक्रम के दौरान करीब 15 मरीजों की नि:शुल्क जांच और उपचार किया गया। डॉ. जयंत घोष ने बताया कि यह पहल इसलिए की गई ताकि मरीजों को आधुनिक तकनीक का लाभ सीधे तौर पर मिल सके और उन्हें इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।

निदेशक सिद्धांत जैन ने बताई अस्पताल की तैयारी

ऑर्किड मेडिकल सेंटर के निदेशक सिद्धांत जैन ने बताया कि अस्पताल में पेट से जुड़ी अधिकतर बीमारियों का इलाज उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि लिवर की कुछ जटिल समस्याओं को छोड़कर पेट से जुड़ी लगभग सभी बीमारियों का उपचार यहां संभव है। अस्पताल का लक्ष्य है कि झारखंड के मरीजों को बड़े शहरों जैसी चिकित्सा सुविधा यहीं मिले।

खानपान को लेकर डॉक्टरों की सख्त सलाह

कार्यक्रम में डॉ. जिम्मी नारायण ने लोगों को पेट की बीमारी से बचाव के लिए खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तली-भुनी चीजें और अनियमित खानपान पेट की समस्याओं का मुख्य कारण है। अगर लोग अपने भोजन में फल, मोटा अनाज और उबला हुआ खाना शामिल करें तो पेट की बीमारी काफी हद तक कम हो सकती है।

सीएमई में हुआ गहन मंथन

कार्यक्रम के बाद शाम को सीएमई (Continuing Medical Education) का आयोजन भी किया गया, जिसमें EUS तकनीक पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि झारखंड में इस तकनीक की शुरुआत मेडिकल क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे आने वाले समय में हजारों मरीजों को फायदा होगा।

डॉ. जयंत घोष ने जताया आभार

डॉ. जयंत घोष ने कहा कि 11 अप्रैल 2026 को आयोजित यह पहला EUS सम्मेलन और कार्यशाला रांची के लिए यादगार बन गया। उन्होंने इस आयोजन में सहयोग देने वाले डॉक्टरों, ऑर्किड हेरिटेज टीम, अस्पताल प्रबंधन, नर्सिंग स्टाफ, बायोमेडिकल टीम, मार्केटिंग टीम और सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। डॉ. घोष ने कहा कि यह कार्यक्रम टीमवर्क का उदाहरण रहा और भविष्य में भी ऐसी वैज्ञानिक और आधुनिक चिकित्सा गतिविधियों को लगातार रांची में आयोजित किया जाएगा।

इसे भी पढ़ें : जब एक्सपर्ट खुद बने स्टूडेंट, डॉ जयंत ने जापान के दिग्गज से सीखा नया हुनर

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