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Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल यानी रिम्स में बुधवार का दिन नॉर्मल नहीं था। वही गलियारे, वही भीड़, वही मरीज… लेकिन माहौल बदला हुआ था। सफेद कोट पहने डॉक्टर आज सिर्फ इलाज नहीं कर रहे थे, वे अंदर ही अंदर एक दर्द भी ढो रहे थे। उनकी भुजाओं पर बंधी काली पट्टी बहुत कुछ कह रही थी। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टर, इंटर्न और मेडिकल छात्र एक साथ खड़े थे। कोई नारेबाजी नहीं, कोई हंगामा नहीं… लेकिन आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था।
ड्यूटी भी, विरोध भी
ओपीडी में मरीज आते रहे, इलाज चलता रहा। डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। लेकिन हर मरीज के बीच, हर पर्ची लिखते वक्त, हर स्टेथोस्कोप के साथ एक सवाल भी चल रहा था… आखिर कब तक? एक जूनियर डॉक्टर ने धीमी आवाज में कहा, “हम लोग जान बचाने के लिए यहां हैं, लेकिन अगर हम ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सिस्टम किसके लिए है?”
एक लड़की, जो बस पार्टी में गई थी
इस पूरे विरोध के पीछे एक दर्दनाक कहानी है। करीब 25 साल की एक मेडिकल छात्रा… जो उस रात बस अपनी सहेली के बुलावे पर बर्थडे पार्टी में गई थी। केक, पिज्जा, हंसी-मजाक… सब कुछ आम था। लेकिन कुछ ही देर बाद सब कुछ बदल गया। केक और पिज्जा खाने के बाद उसे महसूस हुआ कि शरीर उसका साथ छोड़ रहा है। सिर भारी, आंखों के सामने धुंध… जैसे कोई अदृश्य ताकत उसे कमजोर कर रही हो। वह किसी तरह खुद को संभालते हुए एक कमरे में चली गई। उसे लगा थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।
लेकिन उस बंद कमरे के भीतर जो हुआ, उसने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। पीड़िता के मुताबिक, वह उस वक्त न बोल पा रही थी, न ठीक से चल पा रही थी। और इसी हालत का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की।
दर्द जो शरीर से आगे चला गया
घटना के बाद वह हॉस्टल तो पहुंच गई, लेकिन दर्द उसके साथ ही रहा। यह दर्द सिर्फ शरीर में नहीं था, यह भीतर तक उतर चुका था। दिन बीतते गए, हालत बिगड़ती गई। 11 अप्रैल को जब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर सच्चाई सामने आई। उसकी सहेली ने उसे हिम्मत दी। कहा कि अगर आज चुप रहोगी, तो कल किसी और के साथ भी यही होगा। और यहीं से उसने आवाज उठाने का फैसला किया।
पुलिस की कार्रवाई, लेकिन सवाल बाकी
पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाई। तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए। दो को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से पकड़ा गया, जो भागने की कोशिश में थे। एक महिला आरोपी को रांची से ही गिरफ्तार किया गया। फिर भी एक आरोपी अब तक फरार है। और यही बात डॉक्टरों के गुस्से को और बढ़ा रही है।
रिम्स में उठी आवाज, जो दूर तक जाएगी
रिम्स में खड़े ये डॉक्टर सिर्फ एक केस के लिए नहीं लड़ रहे। वे उस डर के खिलाफ खड़े हैं, जो धीरे-धीरे हर मेडिकल छात्र, हर महिला डॉक्टर के मन में घर कर रहा है।
उनकी मांग साफ है…
- त्वरित सुनवाई हो
- दोषियों को कड़ी सजा मिले
- स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो
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