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Lohardaga : सफर कितना भी छोटा हो, लेकिन ट्रेन से उतरते वक्त अगर सामान छूट जाए तो कुछ पल में ही पूरा दिन खराब हो जाता है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, दिमाग में हजार सवाल घूमने लगते हैं कि अब क्या होगा, सामान मिलेगा भी या नहीं। ठीक ऐसा ही अनुभव लोहरदगा के दो यात्रियों के साथ हुआ, लेकिन राहत की बात यह रही कि रेल सुरक्षा बल (RPF) की तत्परता ने उनकी चिंता को कुछ ही घंटों में खुशी में बदल दिया। कमांडेंट पवन कुमार के निर्देशन में RPF पोस्ट लोहरदगा ने 20 अप्रैल 2026 को “ऑपरेशन अमानत” अभियान के तहत दो अलग-अलग मामलों में यात्रियों का ट्रेन में छूटा बैग सुरक्षित बरामद कर उन्हें वापस सौंप दिया। बरामद संपत्ति का कुल अनुमानित मूल्य करीब 14 हजार रुपये बताया गया है।
जब बैग छूटा, तो माथे पर आ गई चिंता की लकीरें
पहला मामला कलाश्री उरांव, निवासी लोहरदगा का है। वह रांची से लोहरदगा लौट रही थीं। ट्रेन संख्या 68027 से उतरते समय जल्दबाजी में उनका बैग ट्रेन में ही छूट गया। बैग में घरेलू सामान रखा हुआ था, जो उनके लिए जरूरी था। ट्रेन चलने लगी और प्लेटफॉर्म पर खड़ी कलाश्री के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। सामान खोने का मतलब सिर्फ कुछ चीजें नहीं, बल्कि घर की जरूरतों का बिगड़ जाना था। वह परेशान होकर इधर-उधर देखने लगीं और फिर सीधे आरपीएफ के पास पहुंचीं।
दूसरा यात्री भी परेशान, बैग में नकद और कपड़े थे
इसी दिन दूसरा मामला सुक्रू उरांव का सामने आया। वह भी रांची से यात्रा कर रहे थे और उतरते समय उनका बैग ट्रेन में रह गया। इस बैग में नकद राशि और कपड़े रखे हुए थे। यात्री के लिए यह केवल सामान नहीं था, बल्कि उसके घर के खर्च और जरूरतों से जुड़ी रकम थी। बैग छूटते ही उसके चेहरे पर बेचैनी दिखने लगी। स्टेशन पर कुछ देर तक वह समझ ही नहीं पा रहा था कि किससे मदद मांगे। लेकिन जैसे ही उसे आरपीएफ की जानकारी मिली, उसने तुरंत शिकायत दर्ज कराई।
आरपीएफ ने दिखाया भरोसा, कहा चिंता मत कीजिए
दोनों यात्रियों की शिकायत मिलते ही RPF पोस्ट लोहरदगा में ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी। यात्रियों को यह भरोसा दिया गया कि प्रयास किया जाएगा और हर संभव मदद की जाएगी। यह वही पल था, जब परेशान यात्रियों को पहली बार उम्मीद की किरण दिखी।
तोरी स्टेशन को दी गई सूचना, ट्रेन पहुंचते ही बैग सुरक्षित बरामद
आरपीएफ कर्मियों ने तुरंत तोरी स्टेशन पर मौजूद कैंपिंग स्टाफ को जानकारी दी। ट्रेन के वहां पहुंचते ही स्टाफ ने सतर्कता से दोनों बैगों को ढूंढकर सुरक्षित कब्जे में ले लिया। इसके बाद दोनों बैगों को ट्रेन संख्या 68028 के माध्यम से लोहरदगा स्टेशन भेज दिया गया। यात्रियों को भी लगातार सूचना दी जाती रही, जिससे उनकी घबराहट कुछ कम हुई।
लोहरदगा स्टेशन पर लौटी उम्मीद, फिर वापस मिली संपत्ति
जब बैग लोहरदगा स्टेशन पहुंचा तो आरपीएफ ने दोनों यात्रियों को बुलाया। पहचान और जरूरी सत्यापन के बाद सामान विधिवत उनके सुपुर्द कर दिया गया। बैग वापस मिलते ही दोनों यात्रियों के चेहरे पर राहत साफ दिखी। कलाश्री उरांव ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी उनका सामान मिल जाएगा। वहीं सुक्रू उरांव ने नकद और कपड़े सुरक्षित मिलने पर आरपीएफ का धन्यवाद किया। कुछ देर पहले जो लोग चिंता में डूबे थे, वही लोग अब राहत और खुशी के साथ स्टेशन से लौट रहे थे।
कर्मियों की तत्परता ने बचाया दिन
इस पूरे अभियान में आरपीएफ पोस्ट लोहरदगा के एएसआई एमके सिंह, हेड कॉन्स्टेबल रंजीत दास और कॉन्स्टेबल धर्मेंद्र कुमार ने अहम भूमिका निभाई। इनकी सूझबूझ और तेजी से दोनों यात्रियों को उनका सामान वापस मिल सका।
“ऑपरेशन अमानत” बना यात्रियों का सहारा
आरपीएफ का “ऑपरेशन अमानत” अभियान यात्रियों के लिए अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक बनता जा रहा है। रोजाना हजारों लोग ट्रेन से सफर करते हैं, कई बार जल्दबाजी या भीड़ की वजह से सामान छूट जाता है। ऐसे में आरपीएफ की सतर्कता यात्रियों को बड़ी राहत देती है।
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