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Ghaziabad : गाजियाबाद में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 31 साल पुराने सनसनीखेज अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए आरोपी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को “एक्स मुस्लिम” बताकर यूट्यूब पर सक्रिय था और लोनी में महिलाओं के कपड़ों की दुकान चलाकर सामान्य जिंदगी जी रहा था। पुलिस के मुताबिक, यही सलीम वर्ष 1995 में 13 वर्षीय छात्र संदीप बंसल के अपहरण और हत्या का मुख्य आरोपी था। कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था।
स्कूल गया बच्चा, फिर कभी वापस नहीं लौटा
पुलिस के अनुसार, 20 जनवरी 1995 को संदीप बंसल सुबह करीब 11:30 बजे घर से स्कूल के लिए निकला था। उसकी स्कूल की दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक थी। शाम 7:30 बजे तक जब वह घर नहीं लौटा, तो परिवार घबरा गया। अगले दिन 21 जनवरी को उसके पिता के पास फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि बच्चा उनके कब्जे में है। कुछ घंटे बाद फिर फोन आया और 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई। आरोपी ने रकम लोनी फ्लाईओवर के पास बस स्टैंड पर बागपत जाने वाली बस में रखने को कहा और पुलिस को खबर देने पर बच्चे को मारने की धमकी दी।
मार्शल आर्ट्स ट्रेनर पर गया शक
जांच के दौरान पुलिस का शक रामजस स्कूल, दरियागंज में मार्शल आर्ट्स सिखाने वाले सलीम खान पर गया। एक गवाह ने बताया था कि उसने बच्चे को “मास्टरजी” के साथ जाते देखा था। इसके बाद पुलिस ने सलीम को पकड़ा। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर मुस्तफाबाद के गंदे नाले के पास से संदीप का शव बरामद हुआ। शव की पहचान उसके पिता ने की।
साथी अनिल ने की थी फिरौती कॉल
जांच में सलीम के साथ अनिल नाम के आरोपी का नाम भी सामने आया। उसने 4 फरवरी 1995 को कोर्ट में सरेंडर किया। पुलिस ने उसके पास से बच्चे की घड़ी, टिफिन और स्कूल बैग बरामद किया। जांच में पता चला कि फिरौती कॉल अनिल ने की थी और पूरे अपराध की योजना दोनों ने मिलकर बनाई थी।
कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, फिर जमानत पर फरार
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। बाद में वर्ष 2000 में सलीम को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। जमानत पर बाहर आने के बाद वह वापस नहीं लौटा और फरार हो गया।
खुद को मृत घोषित कर बदल ली पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए सलीम ने खुद को मृत घोषित कर दिया और अपनी पहचान बदलकर “सलीम वास्तिक” नाम से रहने लगा। वह पहले हरियाणा के करनाल और अंबाला में छिपा रहा। बाद में 2010 में गाजियाबाद के लोनी में आकर बस गया। यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और सोशल मीडिया पर खुद को “एक्स मुस्लिम” बताकर वीडियो डालने लगा।
फिल्म बनाने के लिए मिला था 15 लाख का एडवांस
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि हाल ही में एक बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए 15 लाख रुपये का एडवांस चेक भी दिया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का जन्म 1972 में शामली में हुआ था। उसने शाओलिन कुंग फू सीखी थी और बाद में दिल्ली के रामजस स्कूल में ट्रेनर बन गया था। वहीं उसकी मुलाकात सह आरोपी अनिल से हुई थी।
इसी साल उस पर हुआ था जानलेवा हमला
दिलचस्प बात यह है कि इसी साल 27 फरवरी को लोनी में सलीम पर जानलेवा हमला भी हुआ था। इस मामले में थाना लोनी में एफआईआर संख्या 50/2026 धारा 109 बीएनएस के तहत केस दर्ज हुआ था। हमलावर जीशान और गुलफाम को बाद में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। हमले के बाद सलीम को जीटीबी अस्पताल और फिर साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद 25 मार्च को उसे छुट्टी मिली।
क्राइम ब्रांच की टीम ने दबोचा
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम को हेड कांस्टेबल मिंटू यादव से सूचना मिली थी कि पुराना आरोपी लोनी में छिपा हुआ है। इसके बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में टीम बनाई गई। इसमें एएसआई सचिन सिंह, एएसआई नीरज कुमार, एएसआई रामदास, एएसआई नरेंद्र, हेड कांस्टेबल मिंटू यादव और महिला कांस्टेबल श्रेया सिंह शामिल थीं। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
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