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Patna : पटना हाईकोर्ट के बड़े फैसले ने सिवान जिले के कई शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह मामला साल 2006 और 2008 की शिक्षक बहाली से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब पुरानी मेरिट लिस्ट के आधार पर नौकरी का दावा नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 2006 और 2008 में पंचायत और प्रखंड स्तर पर शिक्षक नियुक्ति हुई थी। उस समय कई अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में होने के बावजूद नौकरी से वंचित रह गए थे। बाद में जब 2012 के बाद कुछ पद खाली हुए, तो इन लोगों ने जिला अपीलीय प्राधिकरण में अपील की और वहां से उन्हें नौकरी मिल गई।
लेकिन राज्य सरकार ने इन नियुक्तियों को गलत बताते हुए चुनौती दी। इसके बाद कई मामलों में अपीलीय प्राधिकरण ने ही नियुक्तियां रद्द कर दीं और वेतन वसूली तक का आदेश दे दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने सभी अपीलों को खारिज करते हुए सरकार के फैसले को सही ठहराया।
कोर्ट ने साफ कहा
- 2006 से 2008 की भर्ती प्रक्रिया 2010 में ही खत्म हो चुकी थी
- पुरानी मेरिट लिस्ट को हमेशा के लिए नहीं चलाया जा सकता
- कई साल बाद अपील करना भी सही नहीं है
- बाद में खाली हुए पदों को पुरानी सूची से भरना नियम के खिलाफ है
कितने शिक्षकों पर असर
इस फैसले का असर सिवान जिले के 80 से ज्यादा शिक्षकों पर पड़ सकता है। ये सभी शिक्षक अपीलीय प्राधिकरण के जरिए बहाल हुए थे और कई सालों से पढ़ा भी रहे थे। अब उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी
फैसले के बाद प्रभावित शिक्षकों में काफी चिंता है।
कई शिक्षक लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे थे और अब अचानक नौकरी जाने का डर सता रहा है। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
सरकार और विभाग का रुख
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश सर्वोपरि है।
वे बोले कि आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल इस फैसले के बाद सिवान ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों में भी अपीलीय प्राधिकरण से नियुक्त शिक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे सरकार क्या कदम उठाती है और क्या प्रभावित शिक्षक उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।



