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News Samvad : एअर इंडिया ने जून से अगस्त तक अपनी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने का फैसला किया है। एयरलाइन ने साफ किया है कि यह कदम हवाई क्षेत्र से जुड़ी पाबंदियों और जेट ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से उठाया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि फिलहाल उसका फोकस नेटवर्क को स्थिर रखना और संचालन को बेहतर तरीके से संभालना है।इस फैसले का असर कई बड़े अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर पड़ेगा। कुछ मार्गों पर उड़ानें कम होंगी, जबकि कुछ सेवाएं तीन महीने के लिए पूरी तरह बंद रहेंगी। ऐसे में विदेश यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को अपनी बुकिंग और शेड्यूल पर दोबारा नजर डालनी पड़ सकती है।
किन-किन रूट्स पर लगेगा असर
एअर इंडिया ने जिन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की है, उनमें कई व्यस्त और लोकप्रिय रूट शामिल हैं। दिल्ली से शिकागो और मुंबई से न्यूयॉर्क की उड़ानें कुछ समय के लिए बंद रहेंगी। इसके अलावा दिल्ली-शंघाई और चेन्नई-सिंगापुर मार्ग भी प्रभावित होंगे।सिर्फ यही नहीं, एयरलाइन ने मुंबई-ढाका और दिल्ली-माले रूट पर भी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है। इन रूट्स पर सफर करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों या दूसरी एयरलाइनों का सहारा लेना पड़ सकता है।कंपनी ने यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है और कहा है कि प्रभावित यात्रियों को जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आखिर क्यों लेना पड़ा यह फैसला
एअर इंडिया के मुताबिक इस फैसले के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह है हवाई क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंध। कई अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में उड़ानों के लिए रास्ते सीमित होने से विमान संचालन मुश्किल और महंगा हो गया है। इससे उड़ानों का समय बढ़ रहा है और परिचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।दूसरी बड़ी वजह जेट ईंधन की ऊंची कीमतें हैं। पिछले कुछ समय में एविएशन फ्यूल महंगा हुआ है, जिसका सीधा असर एयरलाइनों की लागत पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ईंधन का खर्च सबसे बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में एयरलाइन फिलहाल उन रूट्स पर कटौती कर रही है जहां संचालन आर्थिक रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
हर महीने 1200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रहेंगी
हालांकि कटौती के बावजूद एअर इंडिया ने कहा है कि उसकी अंतरराष्ट्रीय सेवाएं पूरी तरह प्रभावित नहीं होंगी। एयरलाइन हर महीने 1200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती रहेगी।कंपनी के अनुसार उत्तरी अमेरिका के लिए हर सप्ताह 33 उड़ानें जारी रहेंगी। यूरोप के लिए 47 साप्ताहिक उड़ानें और यूनाइटेड किंगडम के लिए 57 उड़ानें संचालित की जाएंगी। ऑस्ट्रेलिया के लिए हर सप्ताह आठ उड़ानें जारी रहेंगी।इसके अलावा सुदूर पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और सार्क देशों के लिए प्रति सप्ताह 158 उड़ानें संचालित होती रहेंगी। मॉरीशस के लिए भी हर सप्ताह सात उड़ानों का संचालन जारी रहेगा।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा जिन्होंने इन रूट्स पर पहले से टिकट बुक कर रखी है या आने वाले महीनों में यात्रा की योजना बनाई थी। कई यात्रियों को अब नई उड़ानें तलाशनी पड़ सकती हैं। कुछ मामलों में यात्रा का खर्च भी बढ़ सकता है क्योंकि वैकल्पिक उड़ानों के किराए ज्यादा हो सकते हैं।ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि गर्मियों और छुट्टियों के सीजन में उड़ानों की संख्या घटने से सीटों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
आगे क्या करेगी एयरलाइन
एअर इंडिया का कहना है कि जून से अगस्त तक यह बदलाव अस्थायी तौर पर लागू रहेगा। इस दौरान कंपनी अपने नेटवर्क और संचालन की समीक्षा करेगी। एयरलाइन का दावा है कि इस कदम से लंबे समय में सेवाएं ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद बनेंगी।कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि बाजार की स्थिति और परिचालन हालात बेहतर होने पर बंद किए गए रूट्स पर दोबारा उड़ानें शुरू की जा सकती हैं।

