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Home » RBI गवर्नर की बड़ी चेतावनी- भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल
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RBI गवर्नर की बड़ी चेतावनी- भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

May 13, 2026No Comments4 Mins Read
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RBI
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News Samvad : RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ज्यूरिख में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार बढ़े हुए कच्चे तेल की कीमतों का बोझ खुद उठा रही है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।दरअसल, पिछले करीब ढाई महीने से पश्चिम एशिया में लगातार भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है।

अभी तक सरकार ने कैसे संभाली स्थिति?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार ने टैक्स और ड्यूटी में कुछ राहत देकर कंपनियों पर दबाव कम करने की कोशिश की है। कुछ नियंत्रित ईंधन कीमतों में मामूली बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आम लोगों पर सीधा असर सीमित रखा गया।आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सरकार ने अब तक उपभोक्ताओं को राहत देने का काम किया है, लेकिन अगर संकट लंबा चलता है तो तेल की बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा जनता तक पहुंचना तय माना जा रहा है।

भारत के लिए पश्चिम एशिया इतना अहम क्यों?

पश्चिम एशिया केवल तेल का स्रोत नहीं है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा सहारा भी है। भारत के कुल आयात और निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

गवर्नर के मुताबिक:

  • भारत के कुल व्यापार का करीब छठा हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़ा है
  • कुल रेमिटेंस का लगभग 40 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आता है
  • उर्वरक आयात का 40 प्रतिशत हिस्सा वहीं से आता है
  • गैस सप्लाई का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा भी इसी क्षेत्र पर निर्भर है

यानी अगर वहां तनाव बढ़ता है, तो उसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। गैस, खेती, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने का खतरा

भारत में महंगाई का सबसे बड़ा असर खाने-पीने की चीजों पर दिखता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। ऐसे में अगर ईंधन महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा और उसका असर सब्जियों, अनाज, दूध और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी दिख सकता है।आरबीआई का मानना है कि केवल ब्याज दरों के जरिए ऐसी स्थिति से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता। अगर सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है और महंगाई बाकी सेक्टरों में भी फैलने लगती है, तो सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

एक तरफ सरकार जनता पर महंगाई का बोझ कम रखना चाहती है, दूसरी तरफ उसे अपने खर्च और राजकोषीय घाटे पर भी नियंत्रण रखना है। महामारी के दौरान राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया था, लेकिन अब सरकार इसे काफी हद तक कम करने में सफल रही है।ऐसे में लंबे समय तक तेल की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ खुद उठाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, तो इसका असर सीधे जेब पर पड़ेगा। रोजमर्रा के सफर से लेकर माल ढुलाई तक सब कुछ महंगा हो सकता है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों और दूसरी जरूरत की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पश्चिम एशिया का संकट जल्द नहीं थमता, तो भारत में महंगाई फिर से चिंता का बड़ा कारण बन सकती है। ऐसे में आरबीआई और सरकार दोनों को बेहद संतुलित तरीके से फैसले लेने होंगे, ताकि अर्थव्यवस्था भी संभली रहे और आम लोगों पर बोझ भी ज्यादा न बढ़े।

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