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Home » ‘काम नहीं तो नया टेंडर नहीं’, ठेकेदारों की मनमानी पर मंत्री दीपिका का शिकंजा
Headlines

‘काम नहीं तो नया टेंडर नहीं’, ठेकेदारों की मनमानी पर मंत्री दीपिका का शिकंजा

May 20, 2026No Comments6 Mins Read
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Ranchi : झारखंड में वर्षों से अधूरी पड़ी सड़कें, बारिश में टूटते पुल, निर्माण एजेंसियों की मनमानी और काम लटकाकर रेट रिवीजन का खेल। इन शिकायतों के बीच अब राज्य सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। बुधवार को रांची में हुई ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज विभाग की लंबी समीक्षा बैठक में सरकार का तेवर बेहद सख्त दिखा। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि जो एजेंसियां समय पर सड़क निर्माण पूरा नहीं करेंगी, उन्हें अब नए काम मिलना मुश्किल होगा। राज्य स्तर पर ऐसे संवेदकों और एजेंसियों की सूची तैयार कर डिबार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रांची स्थित झारखंड सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट के सभागार में हुई इस मैराथन बैठक में सड़क, पुल, अबुआ आवास, पलाश मार्ट, मनरेगा और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं की विस्तार से समीक्षा हुई। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सड़क निर्माण में हो रही देरी और लापरवाही को लेकर रही।

कई जिलों में सालों से अधूरी पड़ी हैं सड़कें

बैठक में जब जिलावार सड़क और पुल निर्माण योजनाओं की समीक्षा शुरू हुई तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में सड़क निर्माण की योजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। कई एजेंसियां पुराने काम पूरे नहीं कर पाईं, लेकिन उन्हें दूसरी योजनाएं भी मिलती रहीं। इससे स्थिति ऐसी हो गई कि एक ही एजेंसी के पास कई अधूरे प्रोजेक्ट जमा हो गए। गांवों में लोग सड़क बनने का इंतजार करते रहे, लेकिन काम फाइलों और मशीनों के बीच अटका रहा। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से कहा कि अब ऐसे संवेदकों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सिर्फ कागजों पर नोटिस भेजने से काम नहीं चलेगा। जो एजेंसी काम नहीं कर रही है, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

रेट रिवीजन के खेल पर सरकार की नजर

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि कई मामलों में संवेदक जानबूझकर काम धीमा करते हैं ताकि बाद में निर्माण लागत बढ़ने का हवाला देकर रेट रिवीजन का फायदा लिया जा सके। सरकार अब इस पूरे पैटर्न की जांच कराने जा रही है। हाल के महीनों में जिन योजनाओं में रेट रिवीजन हुआ है, उन्हें विभाग खंगालेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यह देखा जाए कि कहीं योजनाओं को जानबूझकर लंबित तो नहीं रखा गया। ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया कि डेढ़ साल तक अधूरे पड़े कामों की सूची मुख्यालय भेजी जाए। उन्होंने कहा कि रेट रिवीजन को लेकर जल्द SOP तैयार की जाएगी ताकि देरी कर लाभ लेने वालों पर रोक लग सके।

“सड़क निर्माण में समझौता नहीं होगा”

बैठक के दौरान मंत्री का रुख साफ था। उन्होंने कहा कि सड़क और पुल निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और विधायकों की ओर से आने वाली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ पत्राचार कर मामले को खत्म नहीं किया जाए, बल्कि जरूरत पड़े तो मौके पर जाकर जांच की जाए। उन्होंने कहा कि कई जगह लोग नई सड़क की मांग कर रहे हैं तो कहीं निर्माण में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे मामलों में तय समय के अंदर कार्रवाई जरूरी है।

बारिश से पहले जर्जर पुलों की चिंता

बैठक में एक अहम मुद्दा बारिश के पहले खराब पुलों की स्थिति को लेकर भी उठा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के क्षतिग्रस्त पुलों की सूची तुरंत तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की हालत खराब है, उनका निरीक्षण कर जल्द मरम्मत शुरू की जाए ताकि बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे की नौबत न आए। ग्रामीण इलाकों में पुल और सड़क ही लोगों की जिंदगी की लाइफलाइन हैं, इसलिए इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

पलाश मार्ट से गांव की महिलाओं को नई पहचान देने की तैयारी

बैठक में सिर्फ सड़क और पुल की चर्चा नहीं हुई। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने को लेकर भी सरकार गंभीर नजर आई। राज्य के छह जिलों में नए पलाश मार्ट खोलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिला प्रशासन की मदद से जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पलाश ब्रांड के उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। अब जरूरत है कि महिलाओं को सिर्फ छोटे रोजगार तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें उद्यमिता से जोड़ा जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी रणनीति बनाई जाए जिससे गांव की महिलाएं खुद कारोबार खड़ा कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

अबुआ आवास पर भी सरकार का जोर

बैठक में अबुआ आवास योजना की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लाभुकों को अंतिम किस्त जल्द जारी की जाए ताकि उनका घर बनाने का सपना अधूरा न रह जाए। सरकार ने इस योजना के लिए इस बजट में 4100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में अब बहुत कम ऐसे घर बचे हैं जहां स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़ी कोई महिला सदस्य नहीं है।

3 लाख से ज्यादा SHG समूह, लेकिन JSLPS से मंत्री नाराज

अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य में SHG समूहों की संख्या करीब 3 लाख 19 हजार तक पहुंच चुकी है। इसे ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह JSLPS के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आईं। उन्होंने अधिकारियों को कार्य संस्कृति में सुधार लाने और योजनाओं को जमीन तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने साफ कहा कि योजनाओं का असर सिर्फ रिपोर्ट में नहीं, गांवों में दिखना चाहिए।

मनरेगा पर बढ़ेगा 1700 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

बैठक के दौरान मनरेगा योजनाओं की समीक्षा में यह जानकारी भी सामने आई कि वी बी ग्राम जी योजना लागू होने से झारखंड पर करीब 1700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अब विभाग इस अतिरिक्त खर्च और योजनाओं के प्रभाव को लेकर भी रणनीति बनाने में जुट गया है।

सरकार का साफ संदेश

पूरी समीक्षा बैठक से एक बात साफ दिखी कि सरकार अब अधूरे काम, धीमी गति और निर्माण में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रही है। सड़क निर्माण से लेकर ग्रामीण योजनाओं तक, विभाग अब सिर्फ कागजी प्रगति नहीं बल्कि जमीन पर नतीजे चाहता है।

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