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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ में पंजाब रेजिमेंटल सेंटर छावनी के लिए बेहद खास रहा। परेड ग्राउंड पर जब 1121 अग्निवीर एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े तो वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था। किसी की आंखों में खुशी थी तो किसी की आंखें अपने बेटे को सैनिक की वर्दी में देखकर नम हो गई थीं। यह सिर्फ एक पासिंग आउट परेड नहीं थी, बल्कि उन 1121 युवाओं के संघर्ष, मेहनत और सपनों की मंजिल थी, जिन्होंने 24 सप्ताह पहले एक नए सफर की शुरुआत की थी। इन युवाओं ने छह महीने पहले अलग-अलग राज्यों, शहरों और गांवों से यहां कदम रखा था। तब वे सामान्य युवा थे, लेकिन शनिवार को वे अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति से भरपूर प्रशिक्षित सैनिक के रूप में सामने खड़े थे।

जब परेड ग्राउंड पर दिखा अनुशासन का दम
सुबह से ही पंजाब रेजिमेंटल सेंटर का माहौल उत्साह से भरा हुआ था। परेड ग्राउंड पर सैन्य बैंड की धुन गूंज रही थी और जवान अंतिम तैयारियों में जुटे थे। जैसे ही समारोह शुरू हुआ, अग्निवीरों की टुकड़ियां पूरी शान के साथ मैदान में उतरीं। एक जैसी वर्दी, एक जैसी चाल और चेहरे पर आत्मविश्वास। हर कदम यह बता रहा था कि इन युवाओं ने बीते 24 हफ्तों में कितनी मेहनत की है। उनकी सटीक कदमताल और अनुशासन ने उपस्थित अधिकारियों और परिवारजनों को प्रभावित किया। पंजाब रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर सजेश बाबू पीजी ने परेड की सलामी ली और अग्निवीरों के प्रदर्शन की समीक्षा की।

आसान नहीं था सैनिक बनने का सफर
परेड में शामिल हर अग्निवीर के पीछे संघर्ष और मेहनत की एक लंबी कहानी है। सैन्य प्रशिक्षण सिर्फ शारीरिक ताकत का नाम नहीं है। यहां शरीर के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है। इन 24 हफ्तों के दौरान अग्निवीरों को कठिन दौड़, बाधा दौड़, हथियार संचालन, फायरिंग, सामरिक युद्ध अभ्यास और आधुनिक तकनीक से जुड़े प्रशिक्षण दिए गए। ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग भी इसका अहम हिस्सा रही। कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आईं जब शरीर जवाब देने लगता था, लेकिन लक्ष्य और जुनून उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा। यही कारण है कि आज वे पूरी तरह प्रशिक्षित सैनिक के रूप में तैयार हैं।
परिवारों की आंखों में दिखा गर्व
परेड का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब अभिभावकों ने अपने बेटों को सैनिक की वर्दी में मैदान पर मार्च करते देखा। कई माता-पिता मोबाइल कैमरे में इस पल को कैद कर रहे थे तो कई गर्व से अपने बच्चों को निहारते नजर आए। एक पिता ने कहा कि जिस बेटे को कभी स्कूल भेजने के लिए सुबह उठाना पड़ता था, आज वही देश की रक्षा के लिए तैयार खड़ा है। इससे बड़ी खुशी उनके लिए और क्या हो सकती है। मांओं के चेहरों पर गर्व के साथ-साथ भावुकता भी दिखाई दी। उनके लिए यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि वर्षों के सपनों के सच होने का दिन था।
मेहनत का मिला सम्मान
समारोह के दौरान उन अग्निवीरों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिन्होंने प्रशिक्षण के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। ड्रिल, फायरिंग, शारीरिक सहनशक्ति और समग्र प्रदर्शन में बेहतर रहने वाले प्रशिक्षुओं को पुरस्कार दिए गए। यह सम्मान सिर्फ उनकी उपलब्धि नहीं था, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा भी था जो भविष्य में सेना में शामिल होने का सपना देखते हैं।
अभिभावकों को मिला ‘गौरव पदक’
भारतीय सेना हमेशा सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के योगदान को भी महत्व देती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समारोह में अग्निवीरों के अभिभावकों को “गौरव पदक” प्रदान किया गया। यह सम्मान उन माता-पिता के त्याग, धैर्य और प्रेरणा को समर्पित था, जिनकी बदौलत उनके बच्चे आज देश सेवा के लिए तैयार खड़े हैं।
देश सेवा का लिया संकल्प
समारोह के अंतिम चरण में सभी अग्निवीरों ने भारतीय संविधान और राष्ट्र के प्रति निष्ठा की शपथ ली। उन्होंने देश की रक्षा, सेना की गौरवशाली परंपराओं और सैन्य मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प दोहराया। शपथ के दौरान पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया। मैदान में मौजूद हर व्यक्ति इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बन रहा था।
अब शुरू होगी नई जिम्मेदारी
पासिंग आउट परेड के साथ प्रशिक्षण का अध्याय जरूर पूरा हो गया, लेकिन असली जिम्मेदारी अब शुरू होने वाली है। ये सभी अग्निवीर जल्द ही पंजाब रेजिमेंट की विभिन्न बटालियनों में तैनात होंगे और देश की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगे।
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