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Home » झारखंड में आज से बालू पर ब्रेक, 4 महीने नहीं होगा खनन
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झारखंड में आज से बालू पर ब्रेक, 4 महीने नहीं होगा खनन

June 10, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : अगर आप घर बना रहे हैं या आने वाले दिनों में निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। झारखंड में आज यानि 10 जून से नदियों से बालू निकालने पर पूरी तरह रोक लग गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के तहत अब 15 अक्टूबर तक राज्य के किसी भी नदी घाट से बालू का उत्खनन नहीं होगा। इसके साथ ही राज्य के सभी 444 बालू घाटों पर खनन गतिविधियां बंद हो गई हैं। हर साल मानसून के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए यह प्रतिबंध लगाया जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। पर्याप्त संख्या में घाट चालू नहीं हो पाने और सीमित स्टॉक के कारण बाजार में अभी से बालू की कमी और कीमत बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई है।

बाजार में पहले ही बढ़ने लगे हैं दाम

बालू खनन बंद होने से पहले ही राजधानी रांची समेत कई शहरों में इसका असर दिखाई देने लगा था। कई सप्लायर पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत मांग रहे हैं। दूसरी ओर कारोबारियों और ठेकेदारों ने भी बड़े पैमाने पर बालू का स्टॉक जमा कर लिया है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे बारिश बढ़ेगी और स्टॉक कम होगा, वैसे-वैसे कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

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सरकार की तैयारी अधूरी रह गई

राज्य सरकार की योजना मानसून शुरू होने से पहले 35 बालू घाटों को चालू करने की थी ताकि प्रतिबंध के दौरान बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहे। लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं में देरी के कारण यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार केवल 14 घाटों से ही नियमित रूप से बालू उठाव शुरू हो पाया। इनमें रांची, रामगढ़, हजारीबाग, दुमका, गोड्डा और पूर्वी सिंहभूम के कुछ घाट शामिल थे। राज्य में कुल 444 बालू घाट हैं। इनमें 299 घाटों की बंदोबस्ती तो हो चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में घाट पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में शुरू ही नहीं हो पाए।

रांची में सबसे ज्यादा दबाव

राजधानी रांची में हर दिन हजारों घनफीट बालू की खपत होती है। शहर में तेजी से बन रहे मकान, अपार्टमेंट, सड़कें और सरकारी परियोजनाएं पूरी तरह बालू की आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में जब नई निकासी बंद हो गई है, तब बाजार में उपलब्ध स्टॉक ही एकमात्र सहारा रहेगा। यदि मांग ज्यादा रही तो कीमतों में तेज उछाल से इनकार नहीं किया जा सकता।

घर बनाने वालों की बढ़ सकती है परेशानी

निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बालू की उपलब्धता कम होने पर सबसे ज्यादा परेशानी निजी मकान बनाने वालों को होगी। पहले से चल रही कई परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है। वहीं छोटे ठेकेदारों और मकान मालिकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। कई बिल्डरों का कहना है कि यदि पर्याप्त वैध स्टॉक उपलब्ध नहीं रहा तो बरसात के दौरान कुछ परियोजनाओं की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।

घाटों और स्टॉक यार्डों में पहले से जमा किया गया बालू

प्रतिबंध लागू होने से पहले घाट संचालकों और ठेकेदारों ने बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया है। नदी घाटों के आसपास और अधिकृत स्टॉक यार्डों में चार महीने की संभावित मांग को देखते हुए स्टॉक तैयार किया गया है। हालांकि हर साल की तरह इस बार भी कालाबाजारी की आशंका बनी हुई है। पिछले वर्षों में प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध परिवहन और ऊंचे दाम पर बिक्री के कई मामले सामने आए थे।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने खनन विभाग को अवैध उत्खनन और कालाबाजारी पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने साफ कहा है कि प्रतिबंध अवधि में यदि कोई नदी घाट से बालू निकालता, उसका परिवहन करता या अवैध भंडारण करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार निगरानी और जांच अभियान पहले से ज्यादा सख्त रहेगा ताकि अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके।

चार महीने तक स्टॉक के भरोसे चलेगा बाजार

अब पूरे राज्य में बालू की आपूर्ति पहले से जमा स्टॉक पर निर्भर रहेगी। यदि स्टॉक पर्याप्त रहा तो स्थिति सामान्य रह सकती है, लेकिन मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने पर कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में अगले चार महीने निर्माण क्षेत्र, ठेकेदारों और आम लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

इसे भी पढ़ें : शादी का झांसा देकर 3 साल तक महिला से संबंध बनाता रहा ASI, अब नौकरी से बर्खास्त

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