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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : किसी फैक्ट्री में काम करते समय सुरक्षा सिर्फ हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा नियमों तक सीमित नहीं होती। कई बार ऐसी स्थिति भी आ जाती है, जब किसी घायल या बीमार व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले कुछ मिनट सबसे ज्यादा अहम होते हैं। ऐसे समय में अगर आसपास मौजूद लोग सही प्राथमिक उपचार देना जानते हों, तो बड़ी दुर्घटना का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच के साथ बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL), रामगढ़ अपने कर्मचारियों को सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का हुनर भी सिखा रहा है। संस्थान के एनवायरनमेंटल हेल्थ एंड सेफ्टी (ईएचएस) विभाग की ओर से फर्स्ट एडर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में कर्मचारियों को उन जरूरी कौशलों की जानकारी दी जा रही है, जो किसी भी आपात स्थिति में बेहद काम आ सकते हैं।
फैक्ट्री के कर्मचारी बनेंगे ‘पहले मददगार’
अक्सर किसी हादसे के बाद डॉक्टर या एंबुलेंस के पहुंचने में कुछ समय लग जाता है। ऐसे में मौके पर मौजूद व्यक्ति ही सबसे पहले मददगार साबित होता है। यही वजह है कि बीएफसीएल ने अपने कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। 10 जून 2026 से शुरू हुआ यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम करीब एक महीने तक चलेगा। इसमें अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारी घबराने के बजाय सही कदम उठा सकें।

सिर्फ किताबों की बातें नहीं, हाथों से सीख रहे तकनीक
प्रशिक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी जा रही, बल्कि कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार अभ्यास भी कराया जा रहा है। विशेषज्ञ प्रशिक्षक उन्हें बता रहे हैं कि किसी व्यक्ति के घायल होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए, खून बहने की स्थिति में कैसे नियंत्रण किया जाए, जलने पर कौन से शुरुआती उपाय जरूरी हैं और कब मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है। इसके साथ ही बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह वही तकनीक है, जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति की सांस या हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति में किया जाता है।
अस्पताल जैसा अनुभव भी मिलेगा
प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों को ऑक्यूपेशनल हेल्थ सेंटर (ओएचसी) में भी ले जाया जाएगा। यहां वे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। प्रतिभागियों को यह भी बताया जाएगा कि आपात स्थिति में मरीज की स्थिति का आकलन कैसे किया जाता है, प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया कैसे अपनाई जाती है और डॉक्टर के आने तक किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे केवल दर्शक बनकर खड़े रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
सुरक्षा को संस्कृति बनाने की कोशिश
औद्योगिक संस्थानों में सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता बढ़ रही है। अब केवल मशीनों और उपकरणों की सुरक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि कर्मचारियों को भी आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा रहा है। BFCL प्रबंधन का मानना है कि जब कर्मचारी सुरक्षा के प्रति जागरूक होते हैं, तो दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है और किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को सीमित किया जा सकता है।
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