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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि जहां उद्योग लगते हैं, वहां प्रदूषण बढ़ता है और हरियाली कम होती जाती है। लेकिन रामगढ़ में BFCL यानी बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड इस सोच को बदलने की कोशिश कर रहा है। कंपनी सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर भी लगातार काम कर रही है। फैक्ट्री परिसर में पौधारोपण से लेकर प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण तक कई ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिनका असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के लोगों को भी इसका फायदा मिल रहा है। BFCL का मानना है कि विकास तभी सार्थक है, जब उसके साथ प्रकृति का संतुलन भी बना रहे।

हर महीने लग रहे 100 पौधे, हरियाली बढ़ाने की बड़ी योजना
BFCL ने वर्ष 2026 को हरियाली बढ़ाने के लिए खास तौर पर चिन्हित किया है। कंपनी ने पूरे साल में 1,200 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत हर महीने 100 पौधे लगाए जा रहे हैं। जनवरी से मई 2026 तक कंपनी परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 1,000 से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। इन पौधों में स्थानीय और देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि वे आसानी से विकसित हो सकें और पर्यावरण के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हों। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि पौधे लगाना ही काफी नहीं है, उनकी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। इसलिए पौधों की निगरानी और रखरखाव की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

सिर्फ मशीनों से नहीं, लोगों की सोच बदलने पर भी जोर
पर्यावरण संरक्षण की बात केवल मशीनों और तकनीक तक सीमित नहीं है। बीएफसीएल का मानना है कि जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेगी, तब तक बड़े बदलाव संभव नहीं हैं। इसी वजह से कंपनी समय-समय पर अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है। इन कार्यक्रमों में उन्हें बताया जाता है कि छोटी-छोटी आदतें भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। कर्मचारियों को जल बचाने, ऊर्जा की खपत कम करने, कचरे का सही प्रबंधन करने और अपने आसपास सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। कंपनी चाहती है कि उसके कर्मचारी केवल कार्यस्थल पर ही नहीं, बल्कि अपने घर और समाज में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएं।
धूल और प्रदूषण रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा
औद्योगिक क्षेत्रों में धूल और वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती होती है। इसे देखते हुए बीएफसीएल ने कई आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। फैक्ट्री परिसर में पांच एंटी-स्मॉग गन, 14 डस्ट कैचर और पर्याप्त संख्या में वॉटर स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। इनकी मदद से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित किया जाता है और आसपास का वातावरण बेहतर बनाए रखने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्मचारियों को इन प्रणालियों के संचालन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि उनका बेहतर उपयोग हो सके।

हवा की गुणवत्ता पर हर पल नजर
आज के समय में लोग यह जानना चाहते हैं कि वे जिस हवा में सांस ले रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है। इसी सोच के साथ बीएफसीएल ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर रीयल टाइम कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) स्थापित किए हैं। BFCL तालाब, डीसी कार्यालय और अन्य प्रमुख स्थानों पर लगे ये सिस्टम लगातार वायु गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। इससे आम लोगों को भी हवा की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती रहती है और पारदर्शिता बनी रहती है।
पानी बचाने के लिए बनाया बड़ा जलाशय
जल संरक्षण को लेकर भी कंपनी गंभीर नजर आती है। बारिश का पानी व्यर्थ न जाए, इसके लिए 54,600 घन मीटर क्षमता वाला बड़ा जलाशय विकसित किया गया है। यह जलाशय वर्षा जल संचयन के साथ-साथ भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद कर रहा है। जल संरक्षण की यह पहल भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार हो रहा हरित क्षेत्र
कंपनी केवल परिसर के भीतर ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाने का प्रयास कर रही है। करीब 3.50 हेक्टेयर क्षेत्र में देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एक विकसित हरित पट्टी के रूप में नजर आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हरित क्षेत्र न केवल प्रदूषण कम करते हैं, बल्कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी बेहतर वातावरण तैयार करते हैं।
विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं
BFCL के अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि उद्योग जिम्मेदारी के साथ काम करें तो विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। रामगढ़ में बीएफसीएल की पहल इसी सोच को मजबूत करती है। पौधारोपण, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कंपनी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उद्योग केवल उत्पादन के केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के भागीदार भी बन सकते हैं।
हरित भविष्य की ओर बढ़ता कदम
आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे समय में BFCL जैसी पहलें उम्मीद जगाती हैं। कंपनी के प्रयास यह दिखाते हैं कि यदि इच्छाशक्ति हो तो औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी संभव है। यही सोच आने वाले समय में सतत विकास की सबसे बड़ी पहचान बनेगी।
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