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Pakur (Jaydev Kumar) : झारखंड के पाकुड़ जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 अभियान को सफल बनाने के लिए कमर कस ली गई है। इसी सिलसिले में शनिवार को पाकुड़ के रवींद्र भवन टाउन हॉल में वालंटियरों के लिए जिला स्तरीय ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक में जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारी, सहायक चुनाव अधिकारी, बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और बड़ी संख्या में वालंटियर शामिल हुए। इस दौरान अधिकारियों ने वालंटियरों को उनके काम के तौर-तरीके सिखाए और बताया कि कैसे वे इस अभियान को बेहतर तरीके से पूरा कर सकते हैं।
मतदाता सूची को एकदम साफ और सही बनाना है लक्ष्य: डीसी मेघा भारद्वाज
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौजूद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीसी मेघा भारद्वाज ने वालंटियरों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का यह अभियान बेहद खास और जरूरी है। इसका सीधा मकसद वोटर लिस्ट को पूरी तरह से साफ, सही और भरोसेमंद बनाना है। उन्होंने बताया कि बीएलओ के साथ वालंटियरों को इसलिए जोड़ा गया है ताकि डिजिटल काम, तकनीकी प्रक्रियाओं और घर-घर जाकर होने वाले वेरिफिकेशन को तेजी से और बिना किसी गलती के पूरा किया जा सके। डीसी ने वालंटियरों को हिदायत दी कि वे बीएलओ के साथ मिलकर पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से अपना काम करें।
जानिए क्या है SSR और SIR में अंतर?
ट्रेनिंग के दौरान उपायुक्त ने वालंटियरों को एक बहुत ही जरूरी बात समझाई। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर होने वाले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) और इस बार हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में क्या फर्क है।
- विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) : इसमें आमतौर पर नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं, मृत या दूसरी जगह चले गए लोगों के नाम हटाए जाते हैं और जरूरी सुधार किए जाते हैं।
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) : इसके तहत वोटर लिस्ट में शामिल हर एक व्यक्ति का घर-घर जाकर व्यक्तिगत रूप से वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
इस अभियान का बड़ा मकसद यह पक्का करना है कि लिस्ट में शामिल हर इंसान भारत का नागरिक हो और वह वोट देने की सभी शर्तों को पूरा करता हो।
2003 की वोटर लिस्ट बनेगी वेरिफिकेशन का आधार
डीसी मेघा भारद्वाज ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बार के वेरिफिकेशन में साल 2003 में तैयार की गई वोटर लिस्ट की मदद ली जा रही है। वर्तमान वोटरों का मिलान उनके माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नामों से करके उनके संबंधों को जांचा जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से प्रामाणिक और सही रहे। राहत की बात यह है कि जिले के बीएलओ ने ज्यादातर वोटरों की शुरुआती मैपिंग का काम पहले ही पूरा कर लिया है, जिससे अब काम में और तेजी आएगी।
नोट कर लें जरूरी तारीखें, इस तरह चलेगा पूरा अभियान
उपायुक्त ने बताया कि यह पूरा काम चुनाव आयोग के तय शेड्यूल के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसकी महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार हैं:
- 30 जून से 29 जुलाई 2026 : बीएलओ और वालंटियर घर-घर जाकर हर वोटर का वेरिफिकेशन करेंगे।
- 05 अगस्त 2026 : शुरुआती वोटर लिस्ट (प्रारूप मतदाता सूची) का प्रकाशन किया जाएगा।
- 05 अगस्त से 04 सितंबर 2026 : इस दौरान लोग लिस्ट को देखकर अपने दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
- 03 अक्टूबर 2026 : जनता से मिले दावों और आपत्तियों का पूरी तरह निपटारा कर दिया जाएगा।
- 07 अक्टूबर 2026 : सभी सुधारों के बाद फाइनल वोटर लिस्ट (अंतिम मतदाता सूची) जारी कर दी जाएगी।
ट्रेनिंग के आखिरी हिस्से में वालंटियरों को डिजिटल एंट्री करने, फॉर्म भरने और चुनाव आयोग के नियमों का पालन करने की बारीकियां सिखाई गईं। अधिकारियों ने सभी से अपील की कि वे इस लोकतंत्र के इस बड़े काम में अपना पूरा योगदान दें।
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