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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : 25 जून 2026 की उस मनहूस शाम को एनएच-23 स्थित लारी बुध बाजार के पास जिसने भी चीख-पुकार सुनी, उसका कलेजा कांप गया। रजरप्पा थाना क्षेत्र में हुए उस भीषण सड़क हादसे ने पल भर में कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। किसी ने अपना बेटा खोया, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। अपनों को खोने के गम में डूबे इन परिवारों के आंसू अभी सूखे भी नहीं हैं, और उनके सामने अब आगे की जिंदगी का धुंधला रास्ता है। ऐसे मुश्किल वक्त में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) ने इंसानियत का हाथ बढ़ाते हुए इन पीड़ित परिवारों के घरों का दरवाजा खटखटाया है। अक्सर माना जाता है कि कानूनी प्रक्रियाएं पेचीदा होती हैं और कोर्ट-कचहरी के चक्कर गरीबों के बस की बात नहीं। लेकिन इस धारणा को बदलते हुए डालसा की टीम शनिवार को खुद पीड़ितों के आंसुओं को पोंछने और उन्हें उनके हक की लड़ाई का भरोसा देने उनके आंगन तक पहुंच गई।
घर पहुंचे डालसा के अफसर, बंधाया ढांढस
यह पूरी संवेदनशील पहल प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मोहम्मद तौफीकुल हसन के निर्देश और सचिव अनिल कुमार के मार्गदर्शन में की गई। शनिवार को जब DLSA की टीम हादसे के शिकार हुए लोगों के घर पहुंची, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन था। टीम के सदस्यों ने परिजनों के पास बैठकर उनका दुख साझा किया और उन्हें सांत्वना दी। डालसा की टीम ने परिजनों से साफ शब्दों में कहा कि दुख की इस घड़ी में वे खुद को अकेला न समझें। इंसाफ की इस पूरी लड़ाई में कानून और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हर मोड़ पर उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

आसान भाषा में समझाई मुआवजे की बारीकियां
हादसे के बाद अक्सर गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को यह समझ नहीं आता कि वे मुआवजे के लिए कहां जाएं और किससे मदद मांगें। दलालों और बिचौलियों के चक्कर में फंसकर वे और परेशान होते हैं। इसी उलझन को दूर करने के लिए एलएडीसी असिस्टेंट मोहन महतो ने बहुत ही सरल और बोलचाल की भाषा में परिजनों को पूरी बात समझाई। उन्होंने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के सामने मुआवजे का दावा कैसे पेश किया जाता है। इसके लिए कौन-कौन से जरूरी कागजात (जैसे एफआईआर की कॉपी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि) की जरूरत होगी और आवेदन का सही तरीका क्या है। उन्होंने यह भी साफ किया कि पीड़ित परिवारों को अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है, डालसा की तरफ से उन्हें मुफ्त में सरकारी वकील दिए जाएंगे जो कोर्ट में उनका केस लड़ेंगे।
पैसों की तंगी नहीं बनेगी न्याय में रुकावट
इस मुलाकात के दौरान प्राधिकरण ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय और जरूरतमंद लोगों को सही समय पर मुफ्त कानूनी मदद देना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। डालसा की टीम ने परिवारों को भरोसा दिया कि पैसों की तंगी या जानकारी के अभाव में किसी का भी रास्ता नहीं रुकेगा। सरकार की जितनी भी कल्याणकारी योजनाएं हैं, उनका लाभ भी इन परिवारों तक पहुंचाया जाएगा ताकि वे सम्मान के साथ अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर ला सकें। कोर्ट की इस चौखट से उन्हें पूरा और सही न्याय दिलाया जाएगा।
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