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Patna : केंद्र सरकार के नए वक्फ कानून को लेकर बिहार में लंबे समय तक राजनीति और विरोध देखने को मिला। हालांकि अब इस कानून के तहत राज्य की 12 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण UMEED पोर्टल पर कर दिया गया है। सरकार इसे पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष अब भी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।
30 जून तक पूरा हुआ पंजीकरण
वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर दर्ज कराने की अंतिम तिथि पहले 5 जून तय की गई थी। शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर इसे बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया। तय समय के भीतर बिहार की सभी वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन पंजीकरण पूरा कर लिया गया।अधिकारियों के अनुसार, बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के तहत 281 इस्टेट की करीब 6700 संपत्तियां और शिया वक्फ बोर्ड की 307 इस्टेट से जुड़ी 5955 संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज की गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि राज्य की शत-प्रतिशत वक्फ संपत्तियां अब डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल हो चुकी हैं।
‘संपत्तियों का सही रिकॉर्ड रहेगा’
शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सैयद अफजल अब्बास ने कहा कि संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अच्छी पहल है। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि वक्फ बोर्ड के पास कुल कितनी संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड तैयार करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी दूसरी संपत्ति को गलती से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज न कर दिया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि UMEED पोर्टल को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन नए वक्फ कानून के कुछ प्रावधानों पर उनकी आपत्ति पहले भी थी और अब भी बनी हुई है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
आरजेडी प्रवक्ता आरजू खान ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण होना अच्छी बात है, लेकिन इसके बाद भी यह देखना होगा कि सरकार का रवैया क्या रहता है। उनका आरोप है कि बीजेपी की नजर लंबे समय से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर रही है।वहीं जेडीयू प्रवक्ता निहोरा यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पोर्टल पर पंजीकरण से वक्फ संपत्तियां सुरक्षित रहेंगी और उनका बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पहले रिकॉर्ड में कई तरह की गड़बड़ियां थीं, जिन्हें अब डिजिटल व्यवस्था के जरिए ठीक किया जा सकेगा।
राजनीति जारी, रिकॉर्ड हुआ डिजिटल
वक्फ कानून को लेकर राजनीतिक मतभेद अभी भी बने हुए हैं। सत्ता पक्ष इसे पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। लेकिन इतना तय है कि बिहार की 12 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियां अब UMEED पोर्टल पर दर्ज हो चुकी हैं, जिससे उनका रिकॉर्ड पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और डिजिटल हो गया है।
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