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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सदर अस्पताल रामगढ़ के डॉक्टरों पर हाल ही में लगे चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप आखिरकार प्रशासनिक जांच में सही नहीं पाए गए। SDO की जांच रिपोर्ट और अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल के बाद यह साफ हो गया कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों ने समय पर इलाज शुरू किया था और अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई कोताही नहीं बरती। जांच के बाद प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अस्पताल में इलाज में देरी या डॉक्टर की अनुपस्थिति जैसी बातें तथ्यों से मेल नहीं खाती हैं। साथ ही लोगों और मीडिया से अपील की गई है कि किसी भी संवेदनशील मामले में सिर्फ आधिकारिक जांच रिपोर्ट और प्रमाणित तथ्यों पर ही भरोसा करें।
ड्यूटी रोस्टर और CCTV फुटेज की हुई बारीकी से जांच
घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई। इस दौरान उस दिन का ड्यूटी रोस्टर, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों की मौजूदगी का मिलान किया गया। जांच में पता चला कि चिकित्सक कमलेश्वर 24 जून 2026 को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात थे। घटना के समय भी वे अस्पताल परिसर में मौजूद थे और अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
अस्पताल पहुंचते ही शुरू हो गया इलाज
सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना का क्रम भी सामने आया है। रिकॉर्डिंग के मुताबिक शाम 7:23 बजे घायल मरीजों को ऑटो रिक्शा से सदर अस्पताल लाया गया। इसके बाद महज दो मिनट के अंदर यानी 7:25 बजे ड्यूटी पर मौजूद जीएनएम ने घायल रिया कुमारी की प्रारंभिक जांच की और उसकी पल्स चेक की। एक मिनट बाद, शाम 7:26 बजे चिकित्सक कमलेश्वर मौके पर पहुंचे और मरीज की चिकित्सकीय जांच शुरू कर दी। इसी दौरान अन्य घायलों को भी बिना किसी देरी के स्ट्रेचर के जरिए इमरजेंसी वार्ड में पहुंचाया गया और उनका प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट में नहीं मिला लापरवाही का कोई प्रमाण
अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों ने समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इलाज शुरू करने में किसी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉक्टर पर लगाए गए आरोप तथ्यों से पुष्ट नहीं होते हैं।
प्रशासन ने लोगों से की जिम्मेदारी निभाने की अपील
जिला प्रशासन ने कहा है कि चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े मामलों में बिना पुष्टि के किसी भी तरह की जानकारी साझा करना भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए आम लोगों और मीडिया से आग्रह किया गया है कि वे केवल अधिकृत जांच रिपोर्ट और सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालें। प्रशासन ने यह भी कहा कि अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से बचना सभी की जिम्मेदारी है, ताकि किसी भी कर्मचारी या संस्था की छवि पर बिना वजह असर न पड़े।
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