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Hazaribagh : शाम के करीब सात बजे हैं। हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड का होरम गांव, जो कभी सूरज डूबते ही खामोशी की चादर ओढ़ लेता था, वहां अब नजारा बदला हुआ है। गांव के चौराहे पर कुछ बुजुर्ग अलाव के पास बैठे देश-दुनिया की बातें कर रहे हैं, तो वहीं पास के मंदिर परिसर में बच्चे बेफिक्र होकर खेल रहे हैं। कुछ महिलाएं भी बेझिझक घरों से निकलकर जरूरत का सामान लेने दुकान की तरफ जा रही हैं। यह वो बदलाव है, जो पिछले कुछ दिनों में इन गांवों के लोगों की जिंदगी में आया है।
इस बदलाव की वजह है… अदाणी फाउंडेशन की ‘सोलर हाई मास्ट लाइट’। गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए फाउंडेशन ने इस इलाके के चार गांवों-होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल के प्रमुख सार्वजनिक जगहों पर ये आधुनिक सोलर लाइटें लगाई हैं।
“पहले तो डर के मारे घर से नहीं निकलते थे…”
गांव के ही एक बुजुर्ग बताते हैं, “पहले जैसे ही शाम ढलती थी, सड़कों और चौराहों पर अंधेरा छा जाता था। कोई जरूरी काम भी हो, तो लोग घर से निकलने में कतराते थे। खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए अंधेरे में आना-जाना काफी असुरक्षित था। लेकिन अब जब से ये ऊंची लाइटें लगी हैं, पूरा चौक-चौराहा दूधिया रोशनी से नहा जाता है।”
इन सोलर लाइटों के चालू होने से न सिर्फ सड़कें और रास्ते रोशन हुए हैं, बल्कि ग्रामीणों के भीतर सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है। अब रात के समय भी लोग अपने छोटे-मोटे सामाजिक काम, बैठकें या मेलजोल बिना किसी डर के कर पा रहे हैं।
बिजली का बिल नहीं, फिर भी पूरी रात रोशनी
इस पूरी पहल की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर है। यानी इसके लिए न तो बिजली के लंबे-चौड़े बिल की चिंता है और न ही पावर कट का झंझट। दिनभर धूप से चार्ज होने वाली ये लाइटें रातभर बिना रुके गांवों को रोशन रखती हैं। यह व्यवस्था पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना गांवों के विकास का एक बेहतरीन जरिया बन रही है। इससे एक तरफ जहां पारंपरिक बिजली की बचत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ स्वच्छ और ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सिर्फ रोशनी ही नहीं, हर मोर्चे पर सुधार की कोशिश
गांवों को अंधेरे से मुक्त करने की यह मुहिम तो बस एक बानगी है। अदाणी फाउंडेशन गोंदुलपारा माइनिंग प्रोजेक्ट के जरिए बड़कागांव प्रखंड के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए चौतरफा काम कर रहा है। फाउंडेशन की टीम स्थानीय लोगों की जरूरतों को समझते हुए शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, बच्चों के लिए पोषण, युवाओं के लिए कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, पीने के साफ पानी और खेलकूद जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में जुटी है। मकसद साफ है… गांवों को सिर्फ बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि विकास की इस दौड़ में कोई भी पीछे न छूटे।
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