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Home » “हमने कंपनी को अपनी जवानी दी, अब बुढ़ापे में बेघर नहीं होंगे”… छलका दर्द
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“हमने कंपनी को अपनी जवानी दी, अब बुढ़ापे में बेघर नहीं होंगे”… छलका दर्द

July 14, 2026No Comments4 Mins Read
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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ में सौंदा डी की गलियों में मंगलवार को सिर्फ नारे नहीं गूंज रहे थे, बल्कि उन परिवारों का दर्द भी साफ सुनाई दे रहा था, जिनकी कई पीढ़ियां कोयला खदानों के साथ जुड़ी रही हैं। पीओ कार्यालय के सामने जुटे लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, चेहरों पर गुस्सा था और आवाज में अपने घर को बचाने की बेचैनी साफ झलक रही थी।

सौंदा डी पंचायत बचाओ संघर्ष समिति और संयुक्त श्रमिक मोर्चा, बरका सयाल कमेटी के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में लोगों ने एक ही बात दोहराई कि पुनर्वास से पहले मकान खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।

ग्रामीणों का कहना था कि यह सिर्फ मकानों का मामला नहीं है, बल्कि उन यादों, संघर्षों और जीवनभर की कमाई का सवाल है, जिसे उन्होंने इसी बस्ती में बसाया है।

“यहीं पैदा हुए, यहीं बड़े हुए, अब कहां जाएं?”

धरने में शामिल बुजुर्गों की आंखों में बीते कई दशकों की यादें तैर रही थीं। उनका कहना था कि आज से करीब 60 से 70 साल पहले उनके पूर्वजों को सीसीएल ने कोयला खदानों में काम करने के लिए यहां बसाया था। उस समय जंगल और वीरान इलाकों में उन्होंने मेहनत कर बस्ती बसाई। फिर खदानों में दिन-रात काम किया और कंपनी को आगे बढ़ाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया।

कई वक्ताओं ने कहा कि उनके परिवार के लोग खदान दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं। किसी ने बीमारी झेली, किसी ने नौकरी करते-करते पूरी जिंदगी निकाल दी। अब जब नई पीढ़ी भी यहीं रह रही है तो अचानक मकान खाली करने का नोटिस देना लोगों को स्वीकार नहीं है।

एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “हमने कंपनी को अपनी जवानी दी है। अब बुढ़ापे में हमें बेघर किया जा रहा है। आखिर हम जाएं तो कहां जाएं?”

लोग बोले- पहले रहने की जगह दें, फिर बात करें

धरने में मौजूद लोगों ने कहा कि उन्हें विकास या कोयला उत्पादन से कोई आपत्ति नहीं है। अगर कंपनी को खनन करना है तो जरूर करे, लेकिन उससे पहले उन परिवारों के रहने की व्यवस्था की जाए, जो वर्षों से यहां बसे हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना था कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हजारों लोगों को हटाने की कोशिश मानवीय नहीं कही जा सकती। उनका साफ कहना था कि पहले पुनर्वास नीति के तहत जमीन और आवास दिया जाए, उसके बाद ही मकान खाली करने की बात की जाए।

“आवासीय कॉलोनी बचाइए, दूसरी जगह खनन कीजिए”

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने सीसीएल प्रबंधन के सामने एक सुझाव भी रखा। उन्होंने कहा कि आवासीय कॉलोनी को बचाते हुए आसपास की खाली जमीन पर कोयला खनन किया जा सकता है। यदि ऐसा किया जाता है तो ग्रामीण भी कंपनी का सहयोग करेंगे।

लोगों का कहना था कि विकास और लोगों की जिंदगी, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। जरूरत सिर्फ संवेदनशील सोच और बेहतर योजना की है।

आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

धरने में वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ग्रामीणों पर दबाव बनाया गया या जबरन मकान खाली कराने की कोशिश हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे सौंदा डी की है। इसलिए हर परिवार इस संघर्ष में साथ खड़ा रहेगा।

पीओ कार्यालय के सामने घंटों चला प्रदर्शन

धरने की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष उपेंद्र शर्मा ने की, जबकि मंच संचालन सचिव संजय यादव ने किया। सभा को बिंध्याचल बेदिया, अशोक शर्मा, देवेंद्र सिंह, बासुदेव साव, सुभाष यादव, संजय मिश्रा, संजय वर्मा, अशोक गुप्ता, मंजीत रंजन, रामनरेश सिंह, अर्जुन सिंह, जेपीएन सिन्हा, जगरनाथ पासवान और आजाद भुईया समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। इस दौरान पंचायत समिति सदस्य कुमकुम देवी, पंसस प्रतिनिधि डब्लू पांडेय, उप मुखिया संजय भारती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : 20+ कांडों का मोस्ट वांटेड शमशेर धराया, ‘KGF’ लिखा पिस्टल जब्त

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