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Ranchi : तारीख 14 जुलाई, वक्त रात के करीब 12 बजे। जब पूरा रांची शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब शहर की सड़कों पर कुछ गाड़ियों का काफिला अचानक रुकता है। गाड़ियों से उतरते हैं रांची के SSP राकेश रंजन। उनके साथ थे सिटी एसपी पारस राणा। कोई तामझाम नहीं, कोई एडवांस सूचना नहीं। मकसद साफ था… यह देखना कि जब शहर सोता है, तो उसकी सुरक्षा में तैनात खाकी कितनी जागती और मुस्तैद रहती है।
SSP के इस अचानक एक्शन से रात की ड्यूटी में सुस्ती बरतने वाले पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। कप्तान ने एक-एक कर कई थानों, रात्रिकालीन गश्ती दलों और शहर के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा ठिकानों का जायजा लिया।

हिंदपीढ़ी थानेदार को किया शोकॉज
SSP का काफिला जब हिंदपीढ़ी थाने पहुंचा, तो वहां की तस्वीर देखकर कप्तान साहब का पारा चढ़ गया। थाने के भीतर अनुशासन की धज्जियां उड़ती दिखीं। ऑन ड्यूटी तैनात पुलिस अधिकारी बिना वर्दी के आराम फरमा रहे थे। चौंकने की बारी तो तब आई जब एसएसपी ने हिंदपीढ़ी थानेदार से पूछ लिया, “आपके साथ ड्यूटी पर तैनात इस अफसर का नाम क्या है?”
थानेदार बगलें झांकने लगे। उन्हें अपने ही मातहत अधिकारी का नाम तक नहीं मालूम था। पुलिसिंग में इस स्तर की लापरवाही देखकर एसएसपी ने मौके पर ही कड़ा रुख अपनाया और हिंदपीढ़ी थानेदार को शो-कॉज थमा दिया। संदेश साफ था… जनता की सुरक्षा के साथ ऐसा ढीला-ढाला रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पीसीआर वैन और सुरक्षा ठिकानों का टेस्ट
थाने से निकलने के बाद एसएसपी और सिटी एसपी ने शहर के अलग-अलग चौराहों और सुनसान इलाकों का रुख किया। रात में घूम रही पीसीआर वैन को अचानक रोककर चेक किया गया। कप्तान खुद यह देखना चाहते थे कि आपातकालीन स्थिति में ये वैन कितनी जल्दी रिस्पॉन्ड करती हैं। इसके अलावा शहर के सरकारी और संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर तैनात गार्ड्स की मुस्तैदी को भी परखा गया, ताकि सुरक्षा में कोई भी लूपहोल न बचे।

कहीं खिंचाई, तो कहीं थपथपाई पीठ
ऐसा नहीं है कि इस औचक निरीक्षण में सिर्फ कमियां ही ढूंढी गईं। रात के सन्नाटे में, जहां-जहां पुलिस के जवान और अधिकारी पूरी वर्दी में अलर्ट मिले और मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करते दिखे, वहां एसएसपी ने गाड़ी रुकवाकर उनकी तारीफ की। कप्तान के मुंह से शाबाशी के दो शब्द सुनकर रात भर जागने वाले जवानों का हौसला दोगुना हो गया।
कड़ा संदेश… रात के हुड़दंगियों पर रखें पैनी नजर
इस पूरे ऑपरेशन के बाद एसएसपी ने जिले के सभी थानों और पुलिसकर्मियों को बिल्कुल साफ शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने कहा कि पुलिस का मतलब है जनता की ढाल। आम लोगों की मदद के लिए पुलिस को हमेशा तत्पर रहना होगा। इसके साथ ही उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिया कि रात के अंधेरे में शहर का माहौल बिगाड़ने वाले, सड़कों पर स्टंट करने वाले या हुड़दंग मचाने वाले उपद्रवियों से कोई हमदर्दी न बरती जाए। ऐसे तत्वों से पुलिस सख्ती से निपटे और उन्हें किसी भी कीमत पर न बख्शे।

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