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Khunti : खूंटी के बगड़ू गांव की आदिवासी महिला बुधन पूर्ति की मौत का मामला अब सीएम हेमंत सोरेन तक पहुंच गया है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस मामले में सीधे सीएम हेमंत को पत्र लिखकर अस्पताल की कार्यप्रणाली और इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि खूंटी के बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर में इलाज के दौरान बुधन पूर्ति को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। इसके बाद उनकी मौत हो गई। इस मामले को गंभीर बताते हुए अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर गलत ब्लड चढ़ाने की बात जांच में सही साबित होती है तो यह सामान्य गलती नहीं, बल्कि मरीज की जान से जुड़ी बेहद गंभीर लापरवाही है। ऐसे मामले में जिम्मेदार लोगों को किसी भी हालत में बचाया नहीं जाना चाहिए।
इलाज कराने पहुंची महिला की मौत, परिवार ने उठाए गंभीर सवाल
बगड़ू गांव की बुधन पूर्ति इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थीं। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत सुधरेगी। लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया कि महिला को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया गया। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी जान चली गई। अब सवाल यह है कि आखिर मरीज का ब्लड ग्रुप किस तरह जांचा गया? रक्त चढ़ाने से पहले क्रॉस मैचिंग हुई थी या नहीं? ब्लड बैंक से रक्त किस प्रक्रिया के तहत जारी हुआ और मरीज को रक्त चढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी थी? अर्जुन मुंडा ने इन्हीं सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने लाने की मांग की है।
मुंडा बोले- मरीज अस्पताल पर भरोसा करता है, भरोसा टूटना गंभीर बात
अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि अस्पताल पहुंचने वाला मरीज अपनी जिंदगी डॉक्टर और अस्पताल की व्यवस्था के भरोसे छोड़ता है। गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए तो अस्पताल ही सबसे बड़ी उम्मीद होता है। ऐसे में अगर रक्त चढ़ाने जैसी बुनियादी और बेहद संवेदनशील प्रक्रिया में ही गलती हो जाए तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि किसी मरीज की मौत के बाद केवल खानापूर्ति वाली जांच नहीं होनी चाहिए। पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर लापरवाही हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
गलत ब्लड चढ़ाने की बात सही निकली तो मामला बेहद गंभीर
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि बुधन पूर्ति को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाया गया था, तो यह बहुत गंभीर मामला होगा। जांच में यह साफ होना चाहिए कि मरीज का ब्लड ग्रुप किसने जांचा, रक्त चढ़ाने से पहले जरूरी जांच हुई या नहीं, अस्पताल के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है और इलाज में शामिल डॉक्टरों तथा कर्मचारियों की भूमिका क्या थी। मुंडा ने मांग की है कि जांच किसी ऐसे अधिकारी या टीम से कराई जाए, जिस पर परिवार और आम लोगों का भरोसा हो। जांच जल्द पूरी हो और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो।
चाईबासा की घटना से भी नहीं लिया सबक?
अर्जुन मुंडा ने अपने पत्र में अक्टूबर 2025 में पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में सामने आई घटना का भी जिक्र किया है। उस मामले में पांच थैलेसीमिया पीड़ित आदिवासी बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना सामने आई थी।
उन्होंने कहा कि रक्त चढ़ाने में हुई ऐसी गंभीर गलतियां मरीज की जान पर भारी पड़ती हैं। इसके बावजूद अगर व्यवस्था में सुधार नहीं होता है तो यह चिंता की बात है।
मुंडा ने कहा कि हर बार घटना के बाद जांच का भरोसा देने से काम नहीं चलेगा। अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें ब्लड ग्रुप की जांच, क्रॉस मैचिंग और रक्त चढ़ाने की पूरी प्रक्रिया में गलती की कोई गुंजाइश न रहे।
आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उठाए सवाल
अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड के आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। कई इलाकों में लोगों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक आना पड़ता है।
ऐसे में जब मरीज स्थानीय अस्पताल पहुंचता है तो वहां उसे सुरक्षित इलाज मिलना चाहिए। लेकिन अगर अस्पताल में ही लापरवाही के आरोप लगें तो ग्रामीण और आदिवासी परिवारों का भरोसा टूटता है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि आदिवासी बहुल इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, जांच सुविधाओं और आपातकालीन इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
निजी अस्पतालों की भी जवाबदेही तय हो
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकारी हो या निजी, किसी भी अस्पताल को मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ की छूट नहीं दी जा सकती।
उन्होंने मांग की है कि अस्पतालों में रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया की नियमित जांच हो। ब्लड ग्रुप और क्रॉस मैचिंग की रिपोर्ट सुरक्षित रखी जाए। मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले और बाद की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।
CM से मांग – जांच हो, दोषी बचें नहीं और परिवार को न्याय मिले
अर्जुन मुंडा ने सीएम हेमंत सोरेन से मांग की है कि बुधन पूर्ति की मौत के मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच निष्पक्ष हो और तय समय में पूरी हो। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय और उचित सहायता मिलनी चाहिए।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि यह सिर्फ एक महिला की मौत का मामला नहीं है। यह सवाल है कि झारखंड के गरीब और आदिवासी परिवार अस्पताल पहुंचने के बाद खुद को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए इस मामले में कार्रवाई केवल दोषी तय करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना जरूरी है।
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