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Home » बंजर जमीन पर लहलहाएगी फसल, कैदी संभालेंगे डेयरी…  CM हेमंत का रोडमैप तैयार
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बंजर जमीन पर लहलहाएगी फसल, कैदी संभालेंगे डेयरी…  CM हेमंत का रोडमैप तैयार

July 17, 2026No Comments6 Mins Read
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सीएम
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Ranchi : झारखंड के गांवों की सूरत और किसानों की तकदीर बदलने के लिए सीएम हेमंत सोरेन ने एक बड़ा कदम उठाया है। झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के कामकाज की करीब से समीक्षा करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को दो-टूक कहा कि कागजी योजनाओं से इतर जमीन पर काम दिखना चाहिए। सरकार का लक्ष्य साफ है कि योजनाओं का असली फायदा हर हाल में गांव के आखिरी किसान तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे। इस हाई-लेवल मीटिंग में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित कई बड़े नीति-निर्माता शामिल हुए। बैठक से जो फैसले और नीतियां निकलकर आईं, वे आने वाले दिनों में झारखंड के ग्रामीण परिवेश में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

प्रमंडलों में सजेंगे कृषि और पशु मेले, किसानों को मिलेगा नया बाजार

कुछ समय पहले रांची में हुए राज्यस्तरीय कृषि व्यापार मेले की कामयाबी के बाद अब सरकार इसे हर इलाके तक ले जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि अब हर साल अलग-अलग प्रमंडलों में कृषि व्यापार मेलों का आयोजन किया जाए। इससे सुदूर इलाकों में रहने वाले किसानों को आधुनिक तकनीक, नए बीज और बड़ा बाजार देखने-समझने का मौका मिलेगा। इसी तर्ज पर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए प्रमंडल स्तर पर पशु मेलों का आयोजन होगा, जिसके लिए अधिकारियों को एक प्रॉपर कैलेंडर तैयार करने को कहा गया है।

अब यूनिवर्सिटी की तकनीक सीधे पहुंचेगी खेतों तक

झारखंड में इस वक्त 57 किसान पाठशालाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ पाठशाला बनाना काफी नहीं है, इन्हें कृषि विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों से जोड़ा जाए ताकि वैज्ञानिक तरीके से खेती की ट्रेनिंग सीधे किसानों को मिले। सरकार की योजना हर जिले में कम से कम एक गांव या पंचायत को चुनकर ‘मॉडल कृषक पाठशाला’ शुरू करने की है। इसके साथ ही, जिलों में पड़ी उस बंजर या परती जमीन का सर्वे होगा जो खेती के लायक है, ताकि वहां नए सिरे से एग्रीकल्चर एक्टिविटी शुरू की जा सके।

मोटे अनाज, मशरूम और शहद से बढ़ेगी आमदनी

राज्य में मिलेट (मोटे अनाज) और दलहन की खेती को खास तवज्जो दी जाएगी। पलामू जैसे इलाके जहां पानी की कमी रहती है, वहां के किसानों को कम पानी में उगने वाली इन फसलों के लिए तैयार किया जाएगा। इसके अलावा हर जिले में मशरूम ट्रेनिंग सेंटर खुलेंगे और महिलाओं के किसान प्रोड्यूसर ग्रुप बनाकर उन्हें मशरूम और उसके बीज (स्पॉन) बनाने का हुनर सिखाया जाएगा। वहीं शहद उत्पादन से जुड़े किसानों को सुरक्षित रखने के लिए मधुमक्खियों के काटने से बचाने वाले खास एप्रन और पीपीई किट जैसी पोशाक दी जाएगी।

सीएम ने दिया किसान समृद्धि योजना पर जोर

खेती में सबसे बड़ा खर्च सिंचाई और बिजली का आता है। इसे दूर करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपसेट बांटने वाली ‘किसान समृद्धि योजना’ और ‘पीएम कुसुम योजना’ की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए जरेडा (JREDA) के साथ मिलकर एक मजबूत फ्रेमवर्क बनाने का निर्देश दिया, ताकि किसानों की जेब पर बिजली बिल का बोझ कम हो और वे आत्मनिर्भर बन सकें।

कम बारिश से निपटने के लिए बनेगा ‘प्रोक्योरमेंट सिस्टम’

झारखंड के कई जिलों में, खासकर पलामू प्रमंडल में, हर साल कम बारिश की वजह से सुखाड़ के हालात बन जाते हैं और धान की रोपाई नहीं हो पाती। इस चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने एक मजबूत प्रोक्योरमेंट सिस्टम और सुखाड़ स्पेशल कार्ययोजना बनाने को कहा है। सरकार का जोर अब केमिकल वाली खेती के बजाय जैविक खेती, कमर्शियल फार्मिंग और जल संरक्षण पर है।

गांव और पंचायत बनेंगे कृषि के रोल मॉडल

मुख्यमंत्री ने एक जरूरी निर्देश यह भी दिया कि एक ही किसान को बार-बार अलग-अलग योजनाओं का लाभ देने के बजाय लाभार्थियों का दायरा बढ़ाया जाए। अब किसी एक गांव या पंचायत को चुनकर वहां की मिट्टी की जांच से लेकर सिंचाई तक की जरूरतों का पूरा सर्वे होगा। फिर उसे एक ‘मॉडल कृषि विलेज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट में गांव के बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा जाएगा।

माइनिंग एरिया में खुलेगा पोल्ट्री-गोटरी का रास्ता, जेलों में बनेगी डेयरी

पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने एक बहुत ही व्यावहारिक सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिन माइनिंग (खनन) वाले इलाकों में जमीन की कमी के कारण खेती नहीं हो पा रही है, वहां मुर्गी पालन (पोल्ट्री) और बकरी पालन (गोटरी) का बिजनेस मॉडल खड़ा किया जाए। इसके अलावा पशुपालकों का एक पूरा डेटाबेस तैयार कर उन्हें मिल्क फेडरेशन से जोड़ा जाएगा। साथ ही राज्य की सेंट्रल जेलों (केन्द्रीय कारा) के भीतर डेयरी फार्म बनाने का कॉन्सेप्ट तैयार करने को कहा गया है, ताकि वहां सजा काट रहे कैदी भी काम सीख सकें और गरिमापूर्ण रोजगार से जुड़ सकें। मत्स्य पालन (मछली पालन) के क्षेत्र में भी युवाओं के लिए रोजगार की नई राहें खोली जाएंगी।

डिजिटल और एक्टिव होंगे लैम्प्स-पैक्स

गांवों में सहकारी समितियों की भूमिका को मजबूत करने के लिए लैम्प्स और पैक्स को पूरी तरह एक्टिव किया जाएगा। सीएम हेमंत सोरेन ने साफ कहा कि किसानों से अनाज की खरीद और उनके खातों में पैसों का ट्रांसफर पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। सभी बड़ी सहकारी समितियों को ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ बनाकर पैक्स से जोड़ा जाएगा। पूरे सिस्टम का कंप्यूटराइजेशन होगा और बीज वितरण के नेटवर्क को ऑनलाइन ट्रैक किया जाएगा।

सीएम ने खुद वीडियो कॉल कर जाना Ground Reality

इस हाई-लेवल मीटिंग के दौरान सिर्फ फाइलों पर बात नहीं हुई। सीएम हेमंत सोरेन ने खुद मीटिंग रूम से सीधे वीडियो कॉल मिलाकर जमीनी हकीकत देखी। उन्होंने गढ़वा के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. प्रदीप कुमार सैनी से लाइव बात की और वहां के ट्रेनिंग हॉल, नर्सरी और फार्म हाउस का मुआयना किया। इसके बाद दुमका के लोकपाड़ी के किसान सुरेश मरांडी से सीधे बात कर उनका हाल जाना और उन्हें कम पानी वाली फसलें लगाने की सलाह दी। साथ ही जामताड़ा के जिला कृषि अधिकारी से ऑनलाइन जुड़कर काजू की खेती की प्रगति रिपोर्ट मांगी।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी., निबंधक सहयोग समितियां शशि रंजन, निदेशक पशुपालन रॉबिन टोप्पो, निदेशक कृषि विद्यानंद शर्मा पंकज समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी उपस्थित रहीं।

इसे भी पढ़ें : सिर्फ रथ नहीं खींचा… जगन्नाथपुर मंदिर के भविष्य की तस्वीर भी खींच गए सीएम हेमंत

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