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Hazaribagh : “जब शरीर में बीमारी घर कर लेती है, तो सिर्फ दवाएं काम नहीं आतीं। कमजोरी इतनी महसूस होती है कि छोटी-छोटी बातें भी पहाड़ जैसी लगने लगती हैं। ऐसे में अगर कोई पौष्टिक आहार का हाथ बढ़ा दे, तो जीने की उम्मीद और हिम्मत दोनों दोगुनी हो जाती हैं।” सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोषण किट पाकर एक मरीज की आंखों में झलकी यह राहत बयां कर रही थी कि यह आयोजन सिर्फ एक सामाजिक या कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने की एक आत्मीय पहल थी।
गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत अदाणी फाउंडेशन ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बड़कागांव में चालू वित्तीय वर्ष के पहले ‘टीबी न्यूट्रिशन किट वितरण शिविर’ का सफल आयोजन किया। इस खास शिविर के दौरान क्षेत्र के 80 टीबी मरीजों के चेहरों पर राहत और उम्मीद की मुस्कान साफ तौर पर दिखाई दी।
दवा के साथ जब मिला अपनों का सहारा
टीबी एक ऐसी बीमारी है जो न सिर्फ इंसान के शरीर को तोड़ती है, बल्कि कई बार मरीजों को समाज और अपनों के बीच अकेला भी कर देती है। इस बीमारी से पूरी तरह उबरने के लिए सिर्फ गोलियां खाना काफी नहीं होता, बल्कि दवाइयों का असर झेलने और शरीर को ताकत देने के लिए पौष्टिक खाना बेहद जरूरी होता है।
इसी जरूरत को समझते हुए अदाणी फाउंडेशन की सीएसआर टीम ने मरीजों के हाथों में पोषण किट सौंपी। किट में ऐसी खाद्य सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं, जो मरीजों के शरीर को जरूरी पोषण देंगी और उन्हें जल्द से जल्द स्वस्थ होने में मदद करेंगी। कार्यक्रम में पहुंचे सीनियर टीबी सुपरवाइजर दीपक कुमार और गोंदुलपारा परियोजना के सुरक्षा प्रमुख वीपी सिंह ने मरीजों से सीधे बातचीत की और उनका मनोबल बढ़ाया।
बीमारी से डरना नहीं, खुलकर मुकाबला करना है
कार्यक्रम के दौरान सीएसआर टीम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीजों को समझाया कि टीबी कोई नासूर नहीं है, बल्कि सही समय पर इलाज और देखभाल से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। टीम ने मरीजों से भावुक अपील की कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज को बीच में बिल्कुल न छोड़ें, क्योंकि अधूरी दवा बीमारी को और गंभीर बना सकती है। इसके साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों से आग्रह किया गया कि वे समाज में टीबी को लेकर फैले भ्रम और झिझक को दूर करने में मदद करें तथा दूसरों को भी सही जानकारी देकर जागरूक बनाएं।
बड़कागांव के समग्र विकास की मजबूत नींव
अदाणी फाउंडेशन की यह पहल केवल किट बांटने तक सीमित नहीं है। गोंदुलपारा खनन परियोजना के जरिए फाउंडेशन बड़कागांव इलाके में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में लगातार जुटा हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए फाउंडेशन द्वारा मुफ्त स्वास्थ्य और नेत्र जांच शिविर लगाए जाते हैं, ताकि दूर-दराज के ग्रामीणों को समय पर इलाज मिल सके।
इसके साथ ही, ग्रामीण युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई का बेहतर माहौल देने के उद्देश्य से स्थानीय सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को मदद दी जा रही है। वहीं, गांवों में शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, आधुनिक कृषि और आजीविका संवर्धन के काम भी लगातार जारी हैं।
अदाणी फाउंडेशन का मानना है कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक और सतत विकास तभी संभव है जब वहां का हर परिवार स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त हो। फाउंडेशन सरकारी विभागों के साथ तालमेल बनाकर बड़कागांव के समग्र विकास के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे भी काम करता रहेगा।
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