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News Samvad : कनेर का फूल आपने मंदिरों और घरों में पूजा के दौरान जरूर देखा होगा। लाल, गुलाबी, सफेद और पीले रंगों में खिलने वाला यह फूल देखने में बेहद सुंदर होता है। धार्मिक मान्यताओं में कनेर को भगवान शिव और भगवान विष्णु का प्रिय फूल माना गया है। यही वजह है कि पूजा-पाठ में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। लेकिन कनेर की पहचान सिर्फ एक पूजा के फूल के तौर पर ही नहीं है। आयुर्वेद में भी इसे औषधीय गुणों से भरपूर पौधा माना गया है। कनेर को कई जगहों पर पीत करवीर और दिव्य पुष्प जैसे नामों से भी जाना जाता है। जानकारों के अनुसार, इसके पौधे के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिनका पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, इसके औषधीय गुणों के साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा है। कनेर का पौधा विषैला माना जाता है। इसलिए इसका इस्तेमाल बिना जानकारी या बिना विशेषज्ञ की सलाह के करना नुकसानदायक हो सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को दे सकते हैं सुरक्षा
कनेर में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाने की बात कही जाती है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट तत्व कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करने में मददगार माने जाते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेदिक परंपरा में कनेर को शरीर के लिए उपयोगी पौधों में शामिल किया गया है। हालांकि, इसके प्रभाव और इस्तेमाल की मात्रा व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है।
सिरदर्द और दर्द में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल
कनेर में सूजन कम करने और दर्द से राहत देने वाले गुण होने का उल्लेख आयुर्वेदिक उपयोगों में मिलता है। पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल सिरदर्द, दांत दर्द और शरीर में होने वाली सूजन जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। कनेर के पौधे के अलग-अलग हिस्सों से तैयार किए जाने वाले लेप का बाहरी इस्तेमाल कुछ समस्याओं में किया जाता है। लेकिन यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए इसका इस्तेमाल सुरक्षित हो, ऐसा नहीं है। गलत मात्रा या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा को नुकसान भी हो सकता है।
दाद, खाज और खुजली में लेप का इस्तेमाल
आयुर्वेद में कनेर की पत्तियों और फूलों से तैयार लेप का बाहरी इस्तेमाल त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं में किया जाता रहा है। दाद, खाज, खुजली और सफेद दाग जैसी समस्याओं में इसके लेप का उल्लेख मिलता है। हालांकि, त्वचा पर किसी भी तरह का लेप लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
महिलाओं के लिए भी बताया गया है उपयोगी
मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन से कई महिलाओं को काफी परेशानी होती है। पारंपरिक चिकित्सा में कनेर का इस्तेमाल इस तरह के दर्द में भी किए जाने का उल्लेख मिलता है। कुछ जगहों पर कनेर से तैयार काढ़े का सेवन करने की बात कही जाती है। लेकिन इस मामले में विशेष सावधानी जरूरी है। कनेर विषैला पौधा है और इसका आंतरिक सेवन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसे किसी भी रूप में पीने या खाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
बालों के झड़ने में भी पारंपरिक इस्तेमाल
कनेर का इस्तेमाल बालों से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। इसके तैयार किए गए कुछ बाहरी प्रयोग बालों को मजबूत बनाने और बालों के झड़ने की समस्या को नियंत्रित करने में मददगार बताए जाते हैं। हालांकि, बालों और सिर की त्वचा पर इसका इस्तेमाल भी सावधानी से किया जाना चाहिए। किसी भी तरह की एलर्जी, जलन या खुजली होने पर तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।
कनेर में पाए जाते हैं हृदय पर असर डालने वाले तत्व
कनेर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि इसके पौधे में हृदय पर असर डालने वाले ग्लाइकोसाइड पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों में ओलिएंड्रिन जैसे तत्व पाए जाते हैं। वहीं, पीले कनेर में पेरुवोसाइड जैसे यौगिकों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं तत्वों के कारण कनेर का पौधा औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन यही तत्व इसे खतरनाक भी बनाते हैं। कनेर की पत्तियों, फूलों, बीजों या किसी अन्य हिस्से का सेवन गलत मात्रा में करने पर हृदय की धड़कन और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सुंदर फूल देखकर सेवन की गलती न करें
कनेर का फूल भले ही बेहद खूबसूरत हो और धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता हो, लेकिन इसे सामान्य फूल समझकर खाना या इसका घरेलू इलाज के तौर पर सेवन करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। खासकर बच्चे और पालतू जानवर इसके विषैले प्रभाव की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। कनेर से जुड़े किसी भी औषधीय प्रयोग को विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। घरेलू नुस्खों के नाम पर इसका सेवन करना गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है।
औषधीय महत्व के साथ सावधानी भी जरूरी
कनेर का पौधा धार्मिक, पारंपरिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट, सूजन कम करने वाले और दर्द से राहत देने वाले गुणों का उल्लेख मिलता है। त्वचा, दर्द और बालों से जुड़ी कुछ समस्याओं में इसके बाहरी उपयोग की पारंपरिक जानकारी भी मौजूद है। लेकिन कनेर को लेकर सबसे जरूरी बात इसकी विषाक्तता है। इसलिए इसके औषधीय लाभ लेने के लिए खुद से प्रयोग करने के बजाय योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। खासकर कनेर का काढ़ा, अर्क या किसी भी रूप में आंतरिक सेवन बिना विशेषज्ञ की निगरानी के नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह खबर सामान्य जानकारी और पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित है। कनेर का पौधा विषैला माना जाता है। इसके फूल, पत्तियों, बीज या किसी भी हिस्से का सेवन बिना योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के न करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लें। गलत मात्रा या गलत तरीके से कनेर का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य नुकसान पहुंचा सकता है।
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