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Ranchi : कुछ साल पहले तक गांव के किसी बुजुर्ग को आधार कार्ड में नाम ठीक कराना हो, किसी छात्र को जाति या आय प्रमाण पत्र बनवाना हो या फिर किसी किसान को बैंक से जुड़ा कोई काम कराना हो, तो पूरा दिन प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने में निकल जाता था। किराया अलग लगता था और कई बार एक काम के लिए दो-तीन बार जाना पड़ता था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। गांव के बीचोंबीच बने कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी लोगों के लिए सरकारी सेवाओं का सबसे भरोसेमंद ठिकाना बनते जा रहे हैं। इसी बदलाव की कहानी को और मजबूत करने के लिए शुक्रवार को रांची के CTI यानी सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का 17वां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम सिर्फ सालगिरह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां ऐसे फैसले हुए, जिनका असर आने वाले दिनों में झारखंड के गांवों, महिलाओं और युवाओं की जिंदगी पर साफ दिखाई देगा। ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान बेहतर काम करने वाले वीएलई (Village Level Entrepreneurs) को सम्मानित किया गया और दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिन्हें ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजीव गांधी की डिजिटल सोच का किया जिक्र
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत पहले ही 21वीं सदी के भारत की कल्पना की थी, जिसमें तकनीक और डिजिटल व्यवस्था की बड़ी भूमिका होगी। मंत्री ने कहा कि उसी दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाते हुए यूपीए सरकार के कार्यकाल में कॉमन सर्विस सेंटर जैसी पहल शुरू हुई। आज उसी का नतीजा है कि डिजिटल सेवाएं शहरों से निकलकर गांवों की चौपाल तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज सीएससी सिर्फ सरकारी दस्तावेज बनाने का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए सरकार का सबसे नजदीकी सेवा केंद्र बन चुका है।

गांव की चौपाल तक पहुंचा डिजिटल भारत
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जिस डिजिटल भारत की कल्पना वर्षों पहले की गई थी, वह अब गांवों में साकार होती दिख रही है। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। आधार, पैन, बैंकिंग, जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कामों के लिए लोगों का पूरा दिन निकल जाता था। अब यही सुविधाएं पंचायत स्तर पर सीएससी के जरिए मिल रही हैं। इससे न सिर्फ लोगों का समय बच रहा है, बल्कि जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि गांवों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार ग्रामीणों के जीवन को आसान बना रहा है।
पंचायत भवन सिर्फ दफ्तर नहीं, अब डिजिटल सेवा केंद्र भी
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायत भवनों में सीएससी को जगह देकर ग्रामीणों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था तैयार की है। इससे पंचायत भवनों की उपयोगिता भी बढ़ी है और लोगों का भरोसा भी। उन्होंने वीएलई से कहा कि वे सिर्फ सेवा प्रदाता नहीं हैं, बल्कि सरकार और ग्रामीणों के बीच सबसे मजबूत कड़ी हैं। इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा बढ़ गई है। अगर वे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करेंगे तो गांवों में लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।
15 नवंबर से पहले हर पंचायत में मिलेगी आधार सेवा
कार्यक्रम में सबसे अहम घोषणा आधार सेवाओं को लेकर हुई। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में यूआईडीएआई के साथ हुए समझौते के बाद पंचायत स्तर पर आधार सेवाएं शुरू करने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में इसकी शुरुआत हो चुकी है और सरकार का लक्ष्य है कि 15 नवंबर, झारखंड स्थापना दिवस से पहले राज्य की सभी पंचायतों में आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएं। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो लाखों ग्रामीणों को आधार में नाम, पता, मोबाइल नंबर या अन्य सुधार के लिए प्रखंड और जिला कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। यह सुविधा उनके अपने पंचायत भवन में ही मिल जाएगी।
महिलाओं की मेहनत अब पहुंचेगी देशभर के बाजार तक
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक CSC eStore और झारखंड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी (JSLPS) के बीच हुआ समझौता रहा। झारखंड के हजारों स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वर्षों से अचार, मसाले, मिलेट उत्पाद, हस्तशिल्प, कपड़े और कई तरह की घरेलू चीजें तैयार करती हैं। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की रहती थी। अब ‘पलाश’ और ‘आदिवा’ ब्रांड के तहत तैयार होने वाले ये उत्पाद सीएससी के ई-स्टोर नेटवर्क के जरिए देशभर के ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़े शहरों या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि सरकार इन उत्पादों को पर्यटन स्थलों और सरकारी भवनों में भी प्रदर्शित करने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।

युवाओं को मिलेगी नई तकनीक सीखने का मौका
कार्यक्रम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग (DHTE) और CSC SPV के बीच भी समझौता हुआ। इस पहल का मकसद राज्य के युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ना है। अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते के बाद तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को डिजिटल स्किल, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े नए अवसर मिलेंगे। बदलते समय में युवाओं को तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलने में इससे मदद मिलेगी।
डिजिटल सेवाओं का अगला पड़ाव गांव
कार्यक्रम में आयोजित तकनीकी सत्रों में सीएससी एसपीवी के वरिष्ठ अधिकारियों ने डिजिटल गवर्नेंस, ग्रामीण बैंकिंग, डिजिटल शिक्षा और वित्तीय समावेशन पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में और भी कई सरकारी सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले वर्षों में गांव के लोगों को अपने रोजमर्रा के अधिकतर सरकारी कामों के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
जिन्होंने बदली गांवों की तस्वीर, उनका हुआ सम्मान
कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग जिलों से आए उन वीएलई को सम्मानित किया गया, जिन्होंने गांवों में डिजिटल सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय काम किया है। इन डिजिटल उद्यमियों ने ऐसे इलाकों में भी सरकारी सेवाएं पहुंचाई हैं, जहां कभी लोगों को छोटी-सी सुविधा के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था।
ये रहे मौजूद
समारोह में पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी., यूआईडीएआई रांची के निदेशक नीरज कुमार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव राज कुमार गुप्ता (आईएएस), सीएससी झारखंड के राज्य प्रमुख शंभू कुमार, जेएसएलपीएस के अनन्या मित्तल, सीएससी के वरिष्ठ अधिकारी और राज्यभर से पहुंचे बड़ी संख्या में वीएलई मौजूद रहे।
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