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Godda : सुबह के सूरज की किरणें अभी गोड्डा की सड़कों पर पूरी तरह फैली भी नहीं थीं कि ‘दीक्षित ऑटो ड्राइविंग सेंटर’ के बाहर एक अलग ही हलचल थी। चेहरे पर थोड़ी हिचकिचाहट, आंखों में ढेर सारे सपने और हाथों में कुछ नया सीखने का जज्बा। यह नजारा था जितपुर माइंस क्षेत्र से आए 15 युवाओं का, जो अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं। टेरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड और अदाणी फाउंडेशन की साझा पहल पर इलाके के 15 बेरोजगार युवाओं को एक महीने के लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) ड्राइविंग प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। आमतौर पर गाड़ियों और स्टेयरिंग पर पुरुषों का एकाधिकार माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर थोड़ी जुदा है। प्रशिक्षण लेने वाले इस जत्थे में 13 युवाओं के साथ 2 बेटियां भी शामिल हैं, जो समाज की पुरानी सोच को पीछे छोड़ते हुए अपने पैरों पर खड़ा होने का संकल्प लेकर आगे आई हैं।

पंचायत प्रधान ने बढ़ाया हौसला, हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत बेहद आत्मीय माहौल में हुई। ग्राम पंचायत पहाड़पुर की प्रधान मेरी मार्गरेट ने युवाओं के इस जत्थे को हरी झंडी दिखाकर गोड्डा के लिए रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने युवाओं से बात करते हुए कहा कि हुनर ही वह सबसे बड़ी ताकत है, जो किसी भी इंसान के रास्ते के अंधेरे को दूर कर सकती है। जब तक हमारे युवा हुनरमंद नहीं बनेंगे, तब तक इलाके का सही मायने में विकास नहीं हो सकता।
उन्होंने विशेष रूप से प्रशिक्षण में शामिल दोनों लड़कियों की तारीफ करते हुए कहा कि यह पहल गांव-घर की दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
सिर्फ गाड़ी चलाना ही नहीं, सड़क के कायदे-कानून भी सीखेंगे युवा
एक महीने तक चलने वाले इस ट्रेनिंग सेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि युवा महज ड्राइवर न बनें, बल्कि एक जिम्मेदार और कुशल पेशेवर के रूप में पहचान बनाएं। इस दौरान युवाओं को सड़क सुरक्षा के नियम, यातायात के संकेतों और दुर्घटनाओं से बचाव की तकनीक सिखाई जाएगी। साथ ही यात्रियों और कमर्शियल गाड़ियों के रख-रखाव से जुड़ी जरूरी बातें और व्यस्त रास्तों पर स्टेयरिंग संभालकर लाइव ड्राइविंग का अनुभव भी कराया जाएगा।
प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक माह का कोर्स पूरा होने के बाद इन युवाओं को अलग-अलग सेक्टरों में काम-धंधे और रोजगार से जोड़ने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाएंगे, ताकि ट्रेनिंग खत्म होते ही इनकी कमाई का रास्ता खुल सके।

इलाके में उम्मीद की नई भोर
कार्यक्रम के दौरान परियोजना प्रमुख रितेश कुमार तिवारी ने बताया कि कंपनी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि माइंस क्षेत्र के आसपास रहने वाले स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। जितपुर माइंस परियोजना के तहत केवल ड्राइविंग ही नहीं, बल्कि पढ़ाई, अच्छी सेहत और आजीविका बढ़ाने से जुड़े कई काम लगातार किए जा रहे हैं।
जब गांव के युवा हाथों में गाड़ियों की चाबी थामकर सड़कों पर उतरेंगे, तो यह सिर्फ किसी वाहन की आवाजाही नहीं होगी, बल्कि यह जितपुर क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक नई कहानी होगी।
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