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Hazaribagh : सुबह की धुंध छंटते ही जब गोंदुलपारा की गलियों में साइकिलों की घंटियां बजती हैं, तो उनमें एक अलग ही खनक सुनाई देती है। यह खनक केवल सफर की नहीं, बल्कि बदलती तकदीर की है। हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित इस खनन प्रभावित क्षेत्र में इन दिनों निराशा की जगह उम्मीद ने ले ली है। जिस उम्र में इलाके के युवा अक्सर आजीविका के लिए भटकते थे, आज वही युवा हाथ में हुनर की डिग्री और जेब में नौकरी का ऑफर लेटर लेकर मुस्कुरा रहे हैं।
अदाणी फाउंडेशन की कौशल विकास पहल ने गोंदुलपारा और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल दी है। अब यहाँ की पहचान सिर्फ खदानें नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से जिंदगी संवारते ये नौजवान बन चुके हैं।
जब कंप्यूटर की स्क्रीन पर चमकी हुनर की रोशनी
गोंदुलपारा के रहने वाले युवाओं के लिए कॉर्पोरेट ऑफिस या बड़ी कंपनियों में काम करना कभी सपने जैसा था। लेकिन अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर ने इस दूरी को मिटा दिया। सेंटर में युवाओं को ‘डोमेस्टिक डेटा एंट्री ऑपरेटर’ और ‘असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन’ जैसी व्यावहारिक चीजें सिखाई जा रही हैं।
अब तक 510 युवा यहाँ से ट्रेनिंग ले चुके हैं। इनमें से 53 युवाओं को तो नामी प्राइवेट कंपनियों में तुरंत जॉब मिल भी चुकी है। हाथ में हुनर आते ही जो युवा कल तक दूसरों पर निर्भर थे, आज अपने परिवारों की रीढ़ बन चुके हैं।

बेल्टफोर्स का कड़ा अनुशासन और सरकारी नौकरी का सपना
वर्दी पहनने और देश सेवा करने की ललक गोंदुलपारा के युवाओं में हमेशा से रही है, बस सही मार्गदर्शन की कमी थी। फाउंडेशन के ‘बेल्टफोर्स’ ट्रेनिंग प्रोग्राम ने इस कमी को दूर किया। 40 युवाओं को अनुशासन, शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा की ऐसी ट्रेनिंग दी गई कि 7 युवाओं ने सीधे सरकारी नौकरी की परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया।
सफलता की यह कहानी यहीं नहीं रुकती… 6 युवाओं को सिंगरौली में सुरक्षा गार्ड के रूप में सम्मानजनक रोजगार मिला। 2 होनहारों को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में विशेष प्रशिक्षण का मौका मिला, जिससे उनका पेशेवर अंदाज और निखर गया।
स्टीयरिंग पर पकड़ और हाथ में ड्राइविंग लाइसेंस
गाड़ी चलाना सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि आजीविका का एक मजबूत जरिया भी है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स में बढ़ते मौकों को देखते हुए 20 युवाओं को हल्के और भारी वाहन (LMV और HMV) चलाने की ट्रेनिंग दी गई। सफलता से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब इन सभी 20 युवाओं के हाथों में ड्राइविंग लाइसेंस आया, तो उनके लिए स्वरोजगार के दरवाजे अपने आप खुल गए।
हाल ही में लगे एक बड़े रोजगार मेले में जब 405 युवाओं का हुजूम उमड़ा, तो यह साफ दिख गया कि यहाँ का युवा अब सिर्फ अवसरों का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बंदिशें तोड़तीं गोंदुलपारा की बेटियां
इस पूरी कहानी का सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायक पहलू यहाँ की बेटियां हैं। आमतौर पर माना जाता है कि जोखिम भरे काम सिर्फ पुरुषों के बस की बात हैं, लेकिन गोंदुलपारा की तीन बेटियों ने इस सोच को हमेशा के लिए बदल दिया।
इन महिला अभ्यर्थियों ने ‘फायर फाइटिंग’ (आग से सुरक्षा और बचाव) जैसी तकनीकी और बेहद कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। जब ये बेटियाँ फायर फाइटिंग किट पहनकर ट्रेनिंग मैदान में उतरीं, तो उन्होंने साबित कर दिया कि हौसले के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
तरक्की का सफर अभी जारी है
अदाणी फाउंडेशन का मानना है कि जब तक गांव का आखिरी युवा और महिला खुद के पैरों पर खड़ी नहीं होती, तब तक विकास का चक्र अधूरा है। गोंदुलपारा से शुरू हुआ हुनर और सफलता का यह सिलसिला तो बस एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी युवाओं के हाथों में काम होगा, और गोंदुलपारा का यह हुनरमंदी का मॉडल पूरे झारखंड के लिए एक मिसाल बनेगा।
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