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Assam/Ranchi : असम में जब नदियां अपने रौद्र रूप में आती हैं, तो अपने साथ सिर्फ पानी का सैलाब नहीं लातीं, बल्कि लाखों परिवारों के हंसते-खेलते आशियाने, मेहनत की कमाई और बरसों के सपने भी बहा ले जाती हैं। इस वक्त ऊपरी असम के शिवसागर और धीमाजी जैसे जिलों का मंजर किसी का भी कलेजा कंपा देने के लिए काफी है। चारों तरफ फैला गंदला पानी, जलमग्न होते गांव, छतों पर शरण लिए बेबस चेहरे और तिरपाल के नीचे अपने बच्चों को समेटे बैठी मां की आंखें सिर्फ एक ही सवाल पूछती हैं कि क्या कोई हमारी सुध लेने आएगा?
ऐसी भीषण त्रासदी के बीच जब दूर-दराज के कटे हुए गांवों तक नावों की सरसराहट सुनाई देती है और कोई हाथों में राहत सामग्री लेकर पहुंचता है, तो पानी से घिरे उन लाचार लोगों की आंखों में पसरी मायूसी अचानक उम्मीद की चमक में बदल जाती है। असम के इन्हीं हजारों बेबस परिवारों का संबल बनने और उनके आंसुओं को पोंछने के लिए देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी और उनका अदाणी फाउंडेशन पूरी आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ मैदान में उतरा है।

₹11 करोड़ का बड़ा योगदान और जमीनी धरातल पर सेवा का भाव
आफत के इस भयावह दौर में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने असम के लोगों का दर्द महसूस करते हुए असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये की विशाल राशि का योगदान दिया है। लेकिन इस पहल की सबसे खास और दिल को छू लेने वाली बात यह है कि गौतम अदाणी का यह सहयोग केवल एक औपचारिक आर्थिक मदद या कागजी चेक तक सीमित नहीं रहा।
गौतम अदाणी के दूरदर्शी नेतृत्व में अदाणी फाउंडेशन की ग्राउंड टीमें खुद जोखिम उठाकर नावों और घुटनों तक भरे मटमैले पानी के रास्तों को पार करते हुए सीधे बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंची हैं। अदाणी फाउंडेशन ने इस विशाल राहत अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अदाणी स्मार्ट मीटर और गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है। इस साझे प्रयास के जरिए ऊपरी असम के शिवसागर जिले के नाज़िरा उप-मंडल और धीमाजी जिले के सिलापाथर में बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है, ताकि आपदा की मार झेल रहे लगभग 8,000 बाढ़ पीड़ित परिवारों तक बिना किसी देरी के सीधी मदद पहुंचाई जा सके।
हर प्रभावित परिवार को दी जा रही राहत किट को बेहद ध्यान से तैयार किया गया है। इसमें केवल सूखा राशन ही नहीं, बल्कि आपातकालीन दवाइयां, शुद्ध पेयजल, साबुन, सैनिटाइजर और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी जरूरी चीजें शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि अपना सबकुछ गंवा चुके लोग अपनी तुरंत की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें और पानी उतरने के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से अपने मासूम बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित रख सकें।

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा बोले- बिना प्रचार के सेवा करना ही असली संवेदनशीलता है
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गौतम अदाणी की इस अद्वितीय मानवीय पहल की खुले दिल से तारीफ की और असम की जनता की ओर से अदाणी समूह का हार्दिक आभार जताया। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में गौतम अदाणी ने जिस तरह से असम के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है, वह मिसाल देने योग्य है। उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऑनलाइन माध्यम से भेजी है, बल्कि अपनी कार्यशैली के अनुसार बिना किसी शोर-शराबे या प्रचार-प्रसार के हजारों प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए अपने संसाधन झोंक दिए हैं। संकट के इस दौर में असम के लोगों के प्रति उनका यह गहरा लगाव, अपनापन और उनके साथ मजबूती से खड़े रहने का स्वभाव सच में काबिले तारीफ है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता को यह भरोसा भी दिलाया कि मुख्यमंत्री राहत कोष में समाज के विभिन्न वर्गों से मिल रहे हर एक रुपये का इस्तेमाल अत्यंत सावधानी, पारदर्शिता और पूर्ण जवाबदेही के साथ किया जाएगा। इस पैसे की मदद से बाढ़ से तबाह हुए परिवारों के जीवन का पुनर्निर्माण किया जाएगा और उन्हें एक बार फिर से खुशहाल जिंदगी दी जाएगी।

कट चुके दुर्गम गांवों तक पहुंचीं टीमें, बिखरते हौसलों को मिला सहारा
बाढ़ की सबसे बड़ी विभीषिका यह होती है कि कई गांव मुख्य मार्गों और शहरों से पूरी तरह कट जाते हैं। वहां तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। लेकिन अदाणी फाउंडेशन के राहत कर्मियों ने हार नहीं मानी। यह राहत अभियान नाज़िरा उप-मंडल के 14 अत्यंत दुर्गम और जलमग्न गांवों तक सफलतापूर्वक पहुंच रहा है। इनमें गुरमुर मिरी (नेपाली बस्ती), संतक ग्रांट, बालीगांव, रोजापूल दुवराह गांव, बामुनपुखुरी, गोहाइन गांव (कोमोल सपोरी), हुलांग कटोनी, हुलांग कलिता, बेंगमोरा कोनवार गांव, बैलुंग गांव, मिरी गांव, औगुरीजान और बिहुबोर ग्रांट जैसे सुदूर इलाके शामिल हैं। इसके साथ ही धीमाजी के सिलापाथर में भी राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
इन इलाकों में कई जगह ऐसी हैं जहां सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं और बिजली गुल है। इसके बावजूद अदाणी फाउंडेशन की गाड़ियां और नावें दिन-रात काम कर रही हैं। राहत टीम का हर एक सदस्य यह सुनिश्चित कर रहा है कि सहायता उन दूरस्थ और दुर्गम झोपड़ियों तक भी जरूर पहुंचे, जहां अब तक कोई अन्य मदद नहीं पहुंच सकी थी।

आपदा के बाद की तबाही और मानवीय संवेदना का स्पर्श
बाढ़ का पानी जब धीरे-धीरे उतरना शुरू होता है, तो अपने पीछे बर्बादी की एक भयावह तस्वीर छोड़ जाता है। खेतों में बिछी रेत, कीचड़ से सने कच्चे मकान, ढह चुकी दीवारें और सड़ा हुआ अनाज देखकर किसी का भी हौसला टूट सकता है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद का समय पीड़ितों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से सबसे ज्यादा कठिन होता है। ऐसे निराशाजनक माहौल में जब अदाणी फाउंडेशन के वॉलिंटियर्स राशन, दवाइयों और रोजमर्रा के सामान से भरी किट लेकर किसी परिवार के पास पहुंचते हैं, तो वह दृश्य केवल सामान के लेन-देन का नहीं रह जाता। वह एक मानवीय स्पर्श बन जाता है। जब एक छोटे बच्चे के हाथ में दूध और बिस्किट का पैकेट आता है या किसी बीमार बुजुर्ग को समय पर जीवनरक्षक दवा मिलती है, तो उनके चेहरों पर जो राहत दिखाई देती है, वह किसी भी बड़े दावे से कहीं अधिक कीमती होती है। यह राहत सामग्री उन्हें यह अहसास कराती है कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा से लड़ने में वे अकेले नहीं हैं, बल्कि देश का एक बड़ा वर्ग और कॉर्पोरेट जगत उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

‘यह सिर्फ शुरुआत है, पुनर्वास तक जारी रहेगा यह अटूट साथ’
अदाणी फाउंडेशन का मानना है कि किसी आपदा के समय केवल सूखा राशन या प्राथमिक किट बांट देना ही सब कुछ नहीं होता। असली चुनौती तो तब शुरू होती है जब पानी पूरी तरह सूख जाता है और लोगों को अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करनी होती है। अदाणी फाउंडेशन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनके लिए यह राहत अभियान केवल पुनर्वास की शुरुआत भर है। असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों के जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की इस लंबी लड़ाई में फाउंडेशन उनके साथ हर कदम पर खड़ा रहेगा।
अदाणी फाउंडेशन का मुख्य संकल्प असम के इन प्रभावित ग्रामीण समुदायों को पहले से अधिक मजबूत, समर्थ और आत्मनिर्भर बनाना है। चाहे वह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हो, पीने के साफ पानी का प्रबंध करना हो या फिर लोगों के आशियाने को फिर से बसाने में सहयोग देना हो, अदाणी समूह पूरी निष्ठा और सेवा भाव के साथ असम के पुनरुत्थान में अपनी भागीदारी निभाता रहेगा। गौतम अदाणी की इस दूरदर्शी और संवेदनशील पहल ने न केवल हजारों जिंदगियों को तात्कालिक संकट से उबारा है, बल्कि असम के लोगों के दिलों में विश्वास की एक नई अलख भी जगाई है।
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