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Ramgarh : “हेमंत सोरेन मेरे बड़े भाई हैं, कल्पना भाभी हैं और पूरा सोरेन परिवार हमारा अपना परिवार है। गुरुजी का जाना सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे झारखंड की अपूरणीय क्षति है।” यह कहते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की आवाज भी भर्रा गई। दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर जब वह उनकी जन्मस्थली निमरा पहुंचे तो श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उन्होंने गुरुजी के संघर्ष और विरासत को भी पूरे सम्मान के साथ याद किया।
गुरुजी को नमन करने पहुंचे, परिवार के साथ बिताया समय
मंगलवार को निमरा गांव का माहौल पूरी तरह श्रद्धा में डूबा हुआ था। गुरुजी के पैतृक आवास पर लोगों का तांता लगा था। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी वहां पहुंचे। उन्होंने गुरुजी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन तथा सोरेन परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। कुछ देर तक परिवार के साथ बैठकर उन्होंने गुरुजी के जीवन, उनके संघर्ष और झारखंड आंदोलन के दिनों को याद किया। डॉ. अंसारी ने कहा कि यह सिर्फ श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उस महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर है, जिसने अपना पूरा जीवन झारखंड और यहां के लोगों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।

जामताड़ा से मिली आंदोलन को धार, गरीबों की आवाज बने गुरुजी
श्रद्धांजलि के बाद डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि गुरुजी का जन्म भले ही निमरा में हुआ, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा और जन आंदोलन को सबसे मजबूत पहचान जामताड़ा की धरती से मिली। वहीं से उन्होंने सूदखोरी, महाजनी प्रथा और पूंजीपतियों के शोषण के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के हक की लड़ाई लड़ते हुए गुरुजी ने कभी समझौता नहीं किया। वे सत्ता के लिए नहीं, समाज के लिए राजनीति करते थे। यही वजह है कि लोग उन्हें आज भी गरीबों का मसीहा और अपना नेता मानते हैं।
डॉ. अंसारी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा गुरुजी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य था। उनके संघर्ष और बलिदान की वजह से ही अलग झारखंड राज्य का सपना पूरा हुआ। आज झारखंड की जनता जिस राज्य में अपने अधिकारों के साथ जी रही है, उसकी नींव गुरुजी के लंबे आंदोलन ने रखी थी।

‘गुरुजी की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी’
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गुरुजी का इस दुनिया से जाना पूरे झारखंड के लिए ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। लेकिन उनके विचार, उनका संघर्ष और सामाजिक न्याय की सोच हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहेगी। उन्होंने कहा कि निमरा आकर श्रद्धांजलि देना उनके लिए बेहद भावुक पल है। यह वही धरती है, जहां से एक ऐसा आंदोलन निकला जिसने झारखंड का इतिहास बदल दिया। आने वाली पीढ़ियां जब भी झारखंड आंदोलन का इतिहास पढ़ेंगी, गुरुजी का नाम सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। डॉ. अंसारी ने कहा कि सरकार गुरुजी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए गरीबों, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और हर जरूरतमंद तक विकास की योजनाएं पहुंचाने का काम कर रही है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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