अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Banka : बांका जिला परिषद कार्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने अचानक छापेमारी कर दी। टीम ने पहले से बिछाए गए जाल के तहत इंजीनियर ओमप्रकाश मंडल और जिला परिषद कर्मी जागेश्वर मंडल को 1 लाख 26 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि दोनों आरोपियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। गिरफ्तारी के बाद दोनों को भागलपुर स्थित निगरानी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
काम का भुगतान कराने के नाम पर मांगी जा रही थी रिश्वत
मामले की शुरुआत एक संवेदक की शिकायत से हुई। जिला परिषद की योजना पर काम कर रहे संवेदक अवध बिहारी ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बताया था कि उनके काम से जुड़े भुगतान और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत में जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव, जूनियर इंजीनियर सुधीर कुमार, कर्मी जागेश्वर मंडल, इंजीनियर ओमप्रकाश मंडल समेत पांच लोगों के नाम शामिल किए गए थे।
शिकायत मिलते ही निगरानी विभाग ने बिना जल्दबाजी किए पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच में यह बात सही पाई गई कि संवेदक से रिश्वत की मांग की जा रही थी। इसके बाद अधिकारियों ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप की तैयारी की और तय समय पर बांका जिला परिषद कार्यालय में कार्रवाई कर दी।
जैसे ही रिश्वत की रकम का लेनदेन हुआ, निगरानी की टीम ने मौके पर मौजूद इंजीनियर ओमप्रकाश मंडल और कर्मी जागेश्वर मंडल को दबोच लिया। उनके पास से 1 लाख 26 हजार रुपये बरामद किए गए। कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने मौके से जरूरी दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए और कई लोगों से पूछताछ की।
जिला परिषद अध्यक्ष से भी पूछताछ, अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी
छापेमारी के दौरान निगरानी विभाग की टीम ने जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव से भी पूछताछ की। शिकायत में जिन अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। फिलहाल किसी अन्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन विभाग का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी सत्येंद्र राम ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले उसका सत्यापन कराया गया था। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें भागलपुर स्थित निगरानी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी
निगरानी विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। पूरे मामले की जांच अभी जारी है और शिकायत में जिन अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। विभाग का साफ कहना है कि जांच में जिसके खिलाफ भी पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बांका जिला परिषद में हुई इस कार्रवाई की चर्चा पूरे जिले में बनी हुई है।
इसे भी पढ़ें : सहरसा में चलने से पहले धधक उठी ट्रेन, इंजन समेत एक बोगी जलकर खाक











