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Home » इरादे बुलंद हों तो बंद सड़कें भी बना देती हैं रास्ता… सिडनी में गूंजा झारखंड के अरुण सिन्हा का नाम
झारखंड

इरादे बुलंद हों तो बंद सड़कें भी बना देती हैं रास्ता… सिडनी में गूंजा झारखंड के अरुण सिन्हा का नाम

August 5, 2026No Comments4 Mins Read
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अरुण सिन्हा
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Ranchi : रुकावटें अक्सर उन लोगों के आगे घुटने टेक देते हैं जिनके इरादों में अडिग विश्वास होता है। एक दौर था जब हाथ में सीमित साधन थे और सामने चुनौतियों का पहाड़, लेकिन आज वही नाम दुनिया के नक्शे पर पूरे फक्र के साथ चमचमा रहा है। गिरिडीह से एक छोटी सी सिक्योरिटी एजेंसी से शुरुआत करने वाले अरुण कुमार सिन्हा ने सिडनी के Sheraton Grand होटल में अंतरराष्ट्रीय ‘जागरण अचीवर अवॉर्ड्स 2026’ अपने नाम कर यह साबित कर दिया है कि अगर आपकी नीयत साफ हो, तो बंद सड़कें भी खुद-ब-खुद रास्ता बना देती हैं। जब जागरण अचीवर अवॉर्ड्स 2026 की घोषणा हुई और अरुण सिन्हा का नाम पुकारा गया, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहटसे गूंज उठा। ऐसा लगा कि झारखंड के हर उस युवा की उम्मीद मुस्कुरा उठी जो अभावों में भी बड़े सपने देखता है।

उद्योग, उद्यमिता, रोजगार के नए अवसर गढ़ने और सामाजिक सरोकारों को मजबूती से निभाने के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इस पड़ाव के साथ ही अरुण सिन्हा उन चुनिंदा भारतीय कारोबारियों के वैश्विक क्लब में शामिल हो गए हैं, जिनकी काबिलियत की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनाई दे रही है। दुनिया भर की हस्तियों की मौजूदगी में जब उनके योगदान का जिक्र हुआ, तो हर किसी ने उनकी इस अद्भुत यात्रा को दिल से सराहा।

गिरिडीह की गलियों से सिडनी तक की अटूट तपस्या

अरुण सिन्हा की यह कामयाबी कोई अचानक मिला इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सालों की अटूट तपस्या, कड़ा अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता तलाशने की कला शामिल है। इस सफर की पहली नींव झारखंड के गिरिडीह जिले में पड़ी थी, जब उन्होंने सीमित संसाधनों और असीम सपनों के साथ एक छोटी सी सिक्योरिटी एजेंसी की शुरुआत की थी। संसाधन कम थे, चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन नीयत साफ और इरादे अटल थे।

उन्होंने पेशेवर ईमानदारी और दूरदर्शी प्रबंधन के बल पर एक-एक ईंट जोड़कर अपने काम का दायरा बढ़ाना शुरू किया। समय बीतता गया और गिरिडीह का वह छोटा सा कदम आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। आज उनका राइडर ग्रुप सिर्फ सुरक्षा सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत धाक जमा चुका है। देश के विभिन्न राज्यों में फैली इस कंपनी ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों को आजीविका दी है। यही वजह है कि अरुण सिन्हा सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने वाले मसीहा के रूप में जाने जाते हैं।

मुनाफे से आगे, समाज के प्रति जवाबदेही का सफर

ज्यादातर कारोबारी सफलता को सिर्फ बैलेंस शीट के अंकों से नापते हैं, लेकिन अरुण सिन्हा का मानना है कि किसी भी उद्योग का असली फल तब मीठा होता है जब उसकी छांव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाते हुए वे लंबे समय से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में युवाओं के विकास के लिए काम कर रहे हैं।

वे युवाओं को केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनमें हुनर की नई जोत जलाते हैं। वे समय-समय पर युवाओं के लिए मुफ्त कौशल विकास प्रशिक्षण, करियर गाइडेंस और उद्यमिता की कार्यशालाएं आयोजित कराते हैं। उनका कहना है कि अगर गांव-कस्बों के युवाओं को सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो वे नौकरी मांगने की कतार से निकलकर खुद रोजगार देने की काबिलियत हासिल कर सकते हैं। उनके इस निस्वार्थ प्रयास ने कई युवाओं के भटके कदमों को एक ठोस दिशा दी है।

अजरबैजान से दुबई तक, हर जगह माना गया काबिलियत का लोहा

सिडनी की सरजमीं पर मिला यह सम्मान अरुण सिन्हा के सफर का पहला पड़ाव नहीं है। इससे पहले भी दुनिया के कई बड़े और प्रतिष्ठित मंचों पर उनकी नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक दृष्टि को सराहा जा चुका है। अज़रबैजान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में उन्हें बिजनेस एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया था। इसके अलावा दुबई, वियतनाम और थाईलैंड के फुकेत जैसे वैश्विक बिजनेस केंद्रों पर भी उनके काम और नेतृत्व की सराहना हो चुकी है। राइडर ग्रुप के 27 साल पूरे होने के ऐतिहासिक मौके पर भी उनके इस लंबे सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया था।

इसे भी पढ़ें : सगे भाई को दी थी दर्दनाक मौ’त, अब उम्र कटेगी सलाखों के पीछे

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