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Sitamarhi : “31 दिसंबर 2028 तक मंदिर का निर्माण पूरा कर मां जानकी को भव्य मंदिर में स्थापित कर दिया जाएगा।” सीएम सम्राट चौधरी ने शनिवार को सीतामढ़ी के पुनौराधाम में यह बात कही तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल बन गया। मां जानकी की जन्मभूमि माने जाने वाले इस पवित्र स्थल को अब नए रूप में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि पुनौराधाम का विकास सिर्फ मंदिर बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे इलाके को श्रद्धालुओं की सुविधा के हिसाब से विकसित किया जाएगा।
सीएम सम्राट चौधरी शनिवार को पुनौराधाम मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से मां जानकी की पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान उन्होंने बिहार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद मंदिर परिसर में नवनिर्मित अस्थायी काष्ठ मंडप में भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं की स्थापना की।
पुनौराधाम में चल रहे निर्माण कार्यों को देखने के दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से मंदिर निर्माण की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने प्रस्तावित मंदिर का मॉडल दिखाकर उन्हें पूरे परिसर की योजना समझाई। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति भी देखी और तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने पर जोर दिया।

मंदिर ही नहीं, पूरा पुनौराधाम बदलेगा
पुनौराधाम को विकसित करने की जो योजना तैयार की गई है, उसमें भव्य माता सीता मंदिर के साथ कई दूसरी सुविधाएं भी शामिल हैं। प्रस्तावित मंदिर के चारों तरफ परकोटा बनाया जाएगा। यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अलग-अलग मंडप होंगे। पीठाधीश्वर निवास के साथ म्यूजियम और ऑडिटोरियम भी बनाया जाएगा। महिला हाट भी योजना का हिस्सा है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में पुनौराधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को केवल मंदिर में दर्शन करके वापस नहीं लौटना होगा। यहां उन्हें मां जानकी से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने और समझने का भी मौका मिलेगा। मंदिर परिसर को इस तरह विकसित करने की तैयारी है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने, घूमने और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के दौरान बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि पुनौराधाम मां जानकी की जन्मभूमि होने के कारण बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। इस पवित्र धाम का समग्र विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकास का काम पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को पहले से बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक तथा आध्यात्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब किसी धार्मिक स्थल पर लोगों की आवाजाही बढ़ती है तो उसका फायदा आसपास के लोगों को भी मिलता है। पुनौराधाम के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ेंगे। होटल, दुकान, परिवहन, खान-पान, फूल-प्रसाद और दूसरे छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

मां जानकी की जन्मभूमि में दिखेगी मिथिला की कला
सीएम सम्राट चौधरी के दौरे के दौरान पुनौराधाम में सिर्फ धार्मिक गतिविधियां ही नहीं दिखीं, बल्कि मिथिला और स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। मंदिर परिसर में बज्जिका कला और सिक्की कला पर आधारित शिल्प प्रदर्शनी लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों से उनकी कला के बारे में जानकारी ली।
स्थानीय कलाकारों की बनाई कलाकृतियों ने मुख्यमंत्री का ध्यान खींचा। पुनौराधाम के विकास की योजना में ऐसी स्थानीय कला और शिल्प को जगह मिलने से कलाकारों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आएंगे तो स्थानीय हस्तशिल्प और दूसरे पारंपरिक उत्पादों की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।

सीएम सम्राट चौधरी के पहुंचने पर बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने भी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। मंदिर प्रबंधन की ओर से उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, उद्योग एवं खेल मंत्री तथा सीतामढ़ी जिले की प्रभारी मंत्री श्रेयसी सिंह, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नन्द किशोर राम, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर समेत कई विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह, तिरहुत प्रक्षेत्र के डीआईजी चंदन कुशवाहा, जिलाधिकारी रिचि पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक अमित रंजन समेत प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

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