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Ranchi : विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर झारखंड में हर बार की तरह इस साल भी दो दिवसीय ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव’ का भव्य आगाज हो गया है। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर पोस्ट शेयर कर पूरे राज्य और देशवासियों को बधाई दी है। सीएम ने अपने संदेश में आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प दोहराया।
प्रकृति पूजा और समुदाय सबसे ऊपर
सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में लिखा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को एक अलग और अनोखा जीवन दर्शन दिया है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ प्रकृति को भगवान की तरह पूजा जाता है, समाज और समुदाय को सबसे ऊपर रखा जाता है और संस्कृति यहाँ के लोगों के जीने का तरीका है। उन्होंने महोत्सव में शामिल हो रहे सभी लोगों का ‘जोहार’ के साथ स्वागत किया।
सिर्फ उत्सव नहीं, हक और वजूद की लड़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ नाच-गाने, कला या पुरानी विरासत का जश्न मनाने तक सीमित नहीं है। यह आयोजन आदिवासी समाज के वजूद, उनकी पहचान और अधिकारों के प्रति संकल्प लेने का एक बड़ा मंच है। उन्होंने याद दिलाया कि अपनी पहचान और हक के लिए लड़ना झारखंड के लोगों का इतिहास रहा है।
झारखंड में हर वर्ष की तरह आज फिर ऐतिहासिक झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है।
विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस महाआयोजन के लिए आप सभी का हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं और जोहार।
झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहाँ प्रकृति पूजनीय है,… pic.twitter.com/C6qztuswwK
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 9, 2026
‘अबुआ दिशुम-अबुआ राज’ के साथ नए भविष्य की ओर
सीएम ने आगे लिखा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने का संघर्ष हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। अब इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज’ (हमारा देश, हमारा राज) का नारा दिया और कहा कि अपनी पहचान के साथ राज्य अब एक सुनहरे भविष्य की तरफ कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने झारखंड के वीर शहीदों को याद करते हुए उन्हें नमन भी किया।
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