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Dhanbad : धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में भूधंसान से उजड़े परिवारों के दर्द को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी रविवार को उनके बीच पहुंचे। भूधंसान स्थल का जायजा लेने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों से बात की और उनकी परेशानी सुनी। मंत्री ने एसटीजी आउटसोर्सिंग कंपनी परिसर में मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को भी समर्थन दिया। इस दौरान उन्होंने बीसीसीएल और सीआईएसएफ की कार्यशैली पर जमकर नाराजगी जताई।
‘बंदूक के बल पर लोगों को डराना बंद करें’
मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि अपने हक और मुआवजे की मांग कर रहे लोगों को डराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बीसीसीएल और सीआईएसएफ से कहा कि बंदूक दिखाकर स्थानीय लोगों को डराने का काम बंद होना चाहिए। प्रभावित परिवारों की समस्या सुनकर उसका समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक लोगों की मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका धरना जारी रहेगा। मंत्री ने कहा कि कोयला केवल केंद्र सरकार या बीसीसीएल की संपत्ति नहीं है। इस जमीन से स्थानीय लोगों और रैयतों का भी अधिकार जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रभावित परिवारों के साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर उजड़ गए हैं, उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।
20 घर हुए जमींदोज, ब्लास्टिंग पर उठे सवाल
छाताबाद में छह अगस्त को हुए भूधंसान से करीब 20 घर जमींदोज हो गए थे। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसटीजी आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण जमीन धंसी और घर इसकी चपेट में आ गए। हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई परिवारों के सिर से छत छिन गई। घटना के बाद से प्रभावित परिवार मुआवजा और सुरक्षित जगह पर पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक रहने के लिए सुरक्षित आशियाना और उचित मुआवजा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
BCCL ने नहीं दिया तो आपदा प्रबंधन से दिलाएंगे मुआवजा
मुआवजे को लेकर मंत्री ने कहा कि अगर बीसीसीएल प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं देती है तो आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से उन्हें मदद दिलाने की पहल की जाएगी। जरूरत पड़ी तो प्रभावित परिवारों के लिए आशियाना उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने स्थानीय विधायक और सांसद से भी इस मामले में आगे आने की अपील की। मंत्री ने कहा कि भूधंसान की घटना बेहद गंभीर है। लोगों ने अपना घर खोया है, ऐसे समय में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि प्रभावित परिवारों को राहत मिले और उनके अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाए।
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