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Ranchi : झारखंड में JPSC और JSSC की नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस लाठीचार्ज के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नाराजगी बढ़ा दी है। करणी सेना, झारखंड ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण सिंह ने लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए सरकार से तत्काल छात्रों से बातचीत करने की मांग की है।
प्रवीण सिंह ने कहा कि झारखंड के हजारों युवा अपने भविष्य और रोजगार के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। कई छात्र वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने समय के साथ बड़ी रकम भी खर्च की है। ऐसे में जब वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखते हैं, तो उन पर लाठीचार्ज करना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
छात्रों की बात सुनने के बजाय बल प्रयोग गलत
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र सरकार के विरोधी नहीं हैं, बल्कि झारखंड के वही युवा हैं जो सरकारी नौकरी हासिल कर अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं। उनकी शिकायतों और मांगों को बातचीत के जरिए समझने की जरूरत है। छात्रों पर बल प्रयोग करने के बजाय सरकार को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकर पूरे मामले पर बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से कई तरह की शिकायतें और सवाल हैं। इन मामलों में सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम हो सके।
घायलों को इलाज और परीक्षा का स्पष्ट कैलेंडर जारी करने की मांग
प्रवीण सिंह ने लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कार्रवाई में घायल हुए छात्र-छात्राओं को उचित इलाज और जरूरी सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही विवादित या जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनके संबंध में सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी निर्णय लेना चाहिए।
करणी सेना ने आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों का स्पष्ट एवं समयबद्ध कैलेंडर जारी करने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार होने वाली देरी से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ती है। इसलिए सरकार को पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए छात्रों को समय पर जानकारी देनी चाहिए।
प्रवीण सिंह ने कहा कि आंदोलनरत छात्रों के खिलाफ अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई करने के बजाय उनकी बात लोकतांत्रिक तरीके से सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि करणी सेना छात्र-युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं करेगी। सरकार को तत्काल पहल करते हुए आंदोलनरत अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करनी चाहिए और उनकी जायज मांगों का सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा, “झारखंड के युवाओं के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए, लाठी नहीं। सरकार छात्रों की आवाज सुने और बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाए।”
करणी सेना ने कहा है कि छात्रहित से जुड़ी जायज और लोकतांत्रिक मांगों के साथ संगठन मजबूती से खड़ा है। यदि छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उनकी आवाज को और मजबूती से उठाएगा।
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