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Home » बुजुर्ग बोझ नहीं, जिम्मेदारी हैं… मंत्री श्वेता गुप्ता ने खींचा सुविधाओं का खाका
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बुजुर्ग बोझ नहीं, जिम्मेदारी हैं… मंत्री श्वेता गुप्ता ने खींचा सुविधाओं का खाका

August 12, 2026No Comments6 Mins Read
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Patna : उम्र बढ़ने के साथ इंसान को सबसे ज्यादा जरूरत किसी सहारे के साथ अपनेपन और सम्मान की होती है। दवा समय पर मिल जाए, खाने की थाली सामने आ जाए, रहने के लिए छत मिल जाए, यह जरूरी है। लेकिन उससे भी जरूरी है कि कोई पास बैठकर दो बातें कर ले, उसकी बात सुने और उसे यह महसूस न होने दे कि वह परिवार या समाज पर बोझ है। बिहार सरकार अब वरिष्ठ नागरिकों को लेकर इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है।

राज्य में बुजुर्गों के लिए 139 नए वृद्धाश्रम बनाए जाएंगे। इसकी योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब संबंधित जगहों पर जमीन उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सिर्फ नए वृद्धाश्रम बनाना ही मकसद नहीं है। पहले से चल रहे वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को बेहतर सुविधा और सम्मानजनक माहौल मिले, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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समाज कल्याण विभाग की ओर से बुधवार को वरिष्ठ नागरिकों की राज्य परिषद की बैठक हुई। समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बुजुर्गों की रोजमर्रा की परेशानियों से लेकर वृद्धाश्रमों की स्थिति और परिवार में उनके सम्मान तक कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

घर में जगह है तो बुजुर्गों के लिए दिल में भी जगह हो

बैठक में पेड ओल्ड एज होम की जरूरत का मुद्दा भी उठा। बदलते परिवार और कामकाज की व्यस्त जिंदगी के बीच ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल तो करना चाहते हैं, लेकिन हर समय उनके साथ नहीं रह पाते। ऐसे में सुविधाओं से लैस पेड ओल्ड एज होम की जरूरत महसूस की जा रही है।

मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि बिहार की अपनी पारिवारिक परंपरा रही है। यहां माता-पिता और बुजुर्गों को परिवार के साथ रखने की सोच रही है। इसलिए सरकार का मुख्य जोर पहले से मौजूद वृद्धाश्रमों को बेहतर और व्यवस्थित बनाने पर है। पेड ओल्ड एज होम के क्षेत्र में निजी संस्थाओं को आगे आने की जरूरत है।

बात सिर्फ रहने की जगह की नहीं है। वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार होता है, उन्हें समय पर दवा मिलती है या नहीं, उनकी बात कोई सुनता है या नहीं, यह सब भी उतना ही मायने रखता है। बैठक में इसको लेकर सदस्यों ने चिंता जताई तो मंत्री ने अपने हालिया अनुभव के बारे में बताया।

गुलजारबाग में बुजुर्गों से मिलीं मंत्री, बोलीं- यहां अपनापन मिलता है

मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने पटना के गुलजारबाग स्थित वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया था। उन्होंने बैठक में बताया कि वहां रहने वाले बुजुर्गों को देखकर उन्हें संतोष हुआ। बुजुर्ग खुश और संतुष्ट नजर आए। वहां रहने वाले लोगों ने खुद बताया कि उन्हें समय पर दवाइयां मिलती हैं और कर्मचारी उनकी देखभाल संवेदनशीलता के साथ करते हैं।

कुछ बुजुर्गों ने तो यहां तक कहा कि वृद्धाश्रम में उन्हें जिस तरह की देखभाल और आत्मीयता मिल रही है, कभी-कभी वह अपने घर में भी नहीं मिल पाती। यह बात सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे बुजुर्गों की एक बड़ी जरूरत छिपी है। उम्र के आखिरी पड़ाव में उन्हें सिर्फ खाना, दवा और बिस्तर नहीं चाहिए। उन्हें बातचीत, अपनापन और यह भरोसा चाहिए कि उनकी जिंदगी की अहमियत अभी भी उतनी ही है।

सरकार अब इसी पहलू को भी अपनी व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।

बच्चों को बचपन से समझाना होगा कि दादा-दादी बोझ नहीं, परिवार की नींव हैं

बैठक में बुजुर्गों के सम्मान को लेकर एक और महत्वपूर्ण सुझाव आया। परिषद के एक सदस्य ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को बचपन से ही बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है।

मंत्री ने इस सुझाव पर सहमति जताई। उनका कहना था कि दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना बच्चों में छोटी उम्र से ही पैदा होनी चाहिए। घर में बच्चे जैसा व्यवहार देखते हैं, वैसा ही सीखते हैं। इसलिए परिवार और स्कूल दोनों स्तर पर बच्चों को बुजुर्गों की अहमियत समझाना जरूरी है।

यह पहल सिर्फ बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि परिवारों के लिए भी जरूरी है। क्योंकि जिस घर में बच्चों को अपने बुजुर्गों के अनुभव और संघर्ष की कद्र करना सिखाया जाता है, वहां पीढ़ियों के बीच दूरी कम होती है।

बैंक और अस्पताल की लंबी लाइन में बुजुर्गों को नहीं करना पड़े इंतजार

बुजुर्गों की परेशानी सिर्फ घर या वृद्धाश्रम तक सीमित नहीं है। बैंक में पेंशन या दूसरे काम के लिए जाना हो, अस्पताल में इलाज कराना हो या किसी सरकारी कार्यालय में काम हो, लंबी कतार में खड़ा होना उम्रदराज लोगों के लिए काफी मुश्किल होता है।

बैठक में इस मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया गया। मंत्री ने अस्पतालों, बैंकों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग लाइन और विशेष काउंटर की व्यवस्था पर जोर दिया। अस्पतालों में बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।

अगर किसी बुजुर्ग को घंटों लाइन में खड़ा होने के बजाय कुछ ही समय में अपनी पेंशन, बैंकिंग या इलाज से जुड़ा काम हो जाए तो यह उनके लिए बड़ी राहत होगी। सरकार इसी तरह की छोटी लेकिन जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।

139 वृद्धाश्रमों से उन बुजुर्गों को मिलेगा सहारा, जिन्हें परिवार का साथ नहीं

बिहार में 139 वृद्धाश्रम बनाने की योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। उचित जमीन उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित रहने की सुविधा उपलब्ध हो।

हालांकि सरकार की प्राथमिकता यह भी साफ है कि जहां संभव हो, बुजुर्ग परिवार के साथ ही रहें। वृद्धाश्रम को परिवार का विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत के समय सहारे की व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।

समाज कल्याण मंत्री ने भरोसा दिया कि वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को समझने और उनकी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य परिषद की बैठकें आगे भी होती रहेंगी। बैठक में समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, गृह, स्वास्थ्य, वित्त, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रतिनिधि और परिषद के सदस्य मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत पिछली बैठक की कार्यवाही और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी से हुई। अंत में सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के निदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इसे भी पढ़ें : आस्था के धाम को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की पहल, CM सम्राट से मिले मंत्री लखेन्द्र पासवान

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