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Home » बिहार में जमीन की रजिस्ट्री में कागजों का झंझट खत्म, नयी व्यवस्था क्या… जानें
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बिहार में जमीन की रजिस्ट्री में कागजों का झंझट खत्म, नयी व्यवस्था क्या… जानें

August 13, 2026No Comments5 Mins Read
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जमीन
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Patna : बिहार में जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब जमीन के निबंधन की प्रक्रिया पहले जैसी कागजी भागदौड़ वाली नहीं रहेगी। सरकार ने भूमि निबंधन को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई व्यवस्था में जमीन के कागजात की ऑनलाइन जांच से लेकर GIS तकनीक से स्थल सत्यापन और निबंधित दस्तावेज की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराने तक की सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए निबंधन कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। वहीं 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे निबंधन की सुविधा भी दी जाएगी। निबंधन से जुड़े दस्तावेज WhatsApp और ई-मेल के जरिए भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

वैशाली से शुरू हुई डिजिटल निबंधन की नई व्यवस्था

सीएम सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को वैशाली के हाजीपुर स्थित जिला निबंधन कार्यालय से इस नई व्यवस्था के तहत चार सेवाओं की शुरुआत की थी। इनमें होम रजिस्ट्रेशन, जमीन की ऑनलाइन जांच, पेपरलेस निबंधन और GIS तकनीक से स्थल निरीक्षण शामिल हैं। शुरुआत में 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट की सुविधा शुरू की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने इसकी उम्र सीमा घटाकर 75 वर्ष से अधिक कर दी। यानी अब 75 साल से ज्यादा उम्र के पात्र नागरिकों को निबंधन के लिए हर बार कार्यालय तक पहुंचने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए जरूरत के मुताबिक घर पर ही निबंधन की प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा खास तौर पर उन बुजुर्गों के लिए राहत वाली है, जिनके लिए उम्र या शारीरिक परेशानी के कारण निबंधन कार्यालय तक जाना मुश्किल होता है। परिवार के लोगों को भी ऐसे मामलों में बुजुर्गों को बार-बार कार्यालय ले जाने की जरूरत कम होगी।

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जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन जांच, GIS से स्थल सत्यापन

जमीन खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि जमीन के कागजात सही हैं या नहीं और जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है। नई व्यवस्था में खरीद-बिक्री से पहले जमीन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी की ऑनलाइन जांच पर जोर दिया गया है। GIS तकनीक के इस्तेमाल से जमीन की लोकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे जमीन की स्थिति को तकनीकी तरीके से समझने और उपलब्ध रिकॉर्ड से उसका मिलान करने में मदद मिलेगी।

सरकार की कोशिश है कि जमीन खरीदने वाला व्यक्ति सौदा करने से पहले उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर जरूरी जांच कर सके। इससे गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

निबंधन विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था में पहले से दस्तावेज की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने, निबंधन कार्यालय में आने के लिए ऑनलाइन तारीख और समय चुनने तथा निबंधित दस्तावेज की सॉफ्ट कॉपी डाउनलोड करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब पेपरलेस व्यवस्था के जरिए इस डिजिटल प्रक्रिया को और आगे बढ़ाया जा रहा है।

कागजों की जगह डिजिटल रिकॉर्ड, WhatsApp और ई-मेल पर मिलेंगे दस्तावेज

नई व्यवस्था में निबंधन के दौरान कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है। आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और निबंधन के बाद रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तक ज्यादा से ज्यादा काम डिजिटल माध्यम से करने का लक्ष्य है। निबंधन के बाद दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी WhatsApp और ई-मेल के जरिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे लोगों को दस्तावेज हासिल करने के लिए दोबारा कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। मोबाइल में दस्तावेज मिलने से उसे सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करना भी आसान होगा। इस पूरी व्यवस्था का सीधा असर आम लोगों की भागदौड़ पर पड़ेगा। जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को दस्तावेज जमा करने, जांच और रिकॉर्ड लेने के लिए पहले की तुलना में कम कार्यालय जाना पड़ सकता है।

बिहार में जमीन से जुड़ी दूसरी सेवाओं को भी डिजिटल किया जा रहा है। बिहारभूमि पोर्टल के जरिए डिजिटल हस्ताक्षरित भू-अभिलेख, ऑनलाइन दाखिल-खारिज, भू-लगान भुगतान, राजस्व न्यायालय, ई-मापी, भूमि उपयोग परिवर्तन, LPC, जमाबंदी और भू-नक्शा जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। विशेष सर्वेक्षण और मोबाइल या आधार सीडिंग से जुड़ी सुविधाएं भी डिजिटल व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे में निबंधन को पेपरलेस बनाने की पहल को जमीन के रिकॉर्ड और राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि जमीन से जुड़ा काम कम कागज, कम समय और कम कार्यालय चक्कर में पूरा हो सके।

जमीन आम परिवारों की सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक होती है। इसलिए इसकी खरीद-बिक्री में कागजात और रिकॉर्ड की सही जानकारी बेहद जरूरी है। नई व्यवस्था में तकनीक के जरिए जांच और सत्यापन को बढ़ावा देकर सरकार भूमि लेन-देन को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है।

सीएम सम्राट चौधरी ने पेपरलेस निबंधन प्रणाली को डिजिटल बिहार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवा आसानी से उपलब्ध कराना और निबंधन प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। अगर यह व्यवस्था पूरी तरह जमीन पर प्रभावी होती है तो आने वाले दिनों में बिहार में जमीन की रजिस्ट्री कराने का तरीका काफी बदल सकता है। कागजों की फाइल और बार-बार दफ्तर जाने की जगह ऑनलाइन जांच, डिजिटल रिकॉर्ड, GIS आधारित सत्यापन और घर बैठे निबंधन जैसी सुविधाएं लोगों के लिए बड़ी राहत बन सकती हैं।

इसे भी पढ़ें : सीएम सम्राट ने तय की 2030 की राह, मछली उत्पादन बढ़ाने को 8 बड़ी परियोजनाएं

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