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Home » चार हफ्तों में पटना हाईकोर्ट की बदली रफ्तार, ACJ सुधीर सिंह ने निपटाये 17 हजार से ज्यादा केस
बिहार

चार हफ्तों में पटना हाईकोर्ट की बदली रफ्तार, ACJ सुधीर सिंह ने निपटाये 17 हजार से ज्यादा केस

August 20, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna (Vivek Kumar) : हाईकोर्ट में केस दाखिल करने के बाद सबसे बड़ा इंतजार होता है अगली तारीख का। तारीख मिल जाए तो सुनवाई का इंतजार और सुनवाई हो जाए तो आदेश का। खासकर जमानत के मामलों में यह इंतजार किसी परिवार के लिए भारी पड़ता है। ऐसे में पटना हाईकोर्ट में पिछले चार सप्ताह से भी कम समय के आंकड़े राहत देने वाली तस्वीर दिखाते हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह के नेतृत्व में कोर्ट में मामलों के निपटारे की रफ्तार तेज हुई है और नए मामलों से ज्यादा पुराने मामलों का निपटारा किया गया है।

चार सप्ताह से भी कम समय में पटना हाईकोर्ट में 15,394 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 17,107 मामलों का निपटारा कर दिया गया। यानी जितने नए मामले आए, उससे 1,713 ज्यादा मामलों का निपटारा हुआ। इस दौरान कोर्ट का केस क्लियरेंस रेट 111.13 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा बताता है कि इस अवधि में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में लगातार काम हुआ।

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जमानत मामलों पर खास जोर, करीब 12 हजार याचिकाएं निपटीं

इन आंकड़ों में सबसे खास बात आपराधिक और जमानत मामलों के निपटारे की है। इस दौरान करीब 13,350 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ। इनमें लगभग 12 हजार जमानत याचिकाएं शामिल हैं। जमानत के मामलों में तेजी का सीधा संबंध किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से होता है। ऐसे में इन मामलों की जल्द सुनवाई का महत्व और बढ़ जाता है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह के कार्यकाल में दोषरहित जमानत आवेदनों को संभव होने पर दाखिल होने के अगले ही दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर जोर दिया गया है। अगर आवेदन में कोई कमी नहीं है तो उसे सिर्फ लिस्टिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, यही कोशिश है।

किसी जेल में बंद व्यक्ति के परिवार के लिए जमानत की हर तारीख उम्मीद लेकर आती है। तारीख आगे बढ़ने का मतलब इंतजार और बढ़ना होता है। ऐसे में आवेदन की जल्द लिस्टिंग और समय पर सुनवाई की व्यवस्था लोगों को राहत देने वाली है। इसी वजह से सुधीर सिंह की इस पहल की विधि क्षेत्र में चर्चा हो रही है।

रिट और दीवानी मामलों की भी नियमित सुनवाई

मामलों के निपटारे की रफ्तार सिर्फ आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं रही। इस अवधि में करीब 3,757 दीवानी मामलों का निपटारा हुआ, जिसमें लगभग 2,850 रिट याचिकाएं शामिल हैं। रिट मामलों में आम लोगों के अधिकारों और सरकारी फैसलों से जुड़े मामले भी आते हैं। इनकी नियमित सुनवाई का सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो अपनी शिकायत लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं।

इसके साथ ही जमानत मामलों, अवमानना से जुड़े एमजेसी मामलों और नई दाखिल रिट याचिकाओं की नियमित और व्यवस्थित लिस्टिंग पर भी ध्यान दिया गया है। इससे मामलों को सुनवाई के लिए समय पर सामने लाने और कोर्ट के उपलब्ध समय का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल रही है।

अदालत में हर दिन बड़ी संख्या में नए मामले दाखिल होते हैं। ऐसे में सिर्फ ज्यादा मामले सुनना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि मामलों की सूची सही तरीके से तैयार हो और पुराने मामलों के साथ नए मामलों को भी समय मिले। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह के नेतृत्व में इसी व्यवस्था को बेहतर करने की कोशिश दिखाई दे रही है।

111.13 प्रतिशत केस क्लियरेंस रेट ने खींचा ध्यान

पटना हाईकोर्ट के कामकाज में 111.13 प्रतिशत का केस क्लियरेंस रेट सबसे अहम आंकड़ों में से एक है। 15,394 नए मामलों के मुकाबले 17,107 मामलों का निपटारा हुआ। इसका मतलब है कि अदालत ने नए मामलों के साथ पुराने लंबित मामलों को भी तेजी से निपटाने की कोशिश की।

हालांकि लंबित मामलों का बोझ पूरी तरह कम करने के लिए इस रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखना जरूरी होगा। लेकिन चार सप्ताह से भी कम समय के आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि न्यायिक कामकाज को तेज करने और केस मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर गंभीरता से ध्यान दिया गया है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह की तारीफ सिर्फ इसलिए नहीं हो रही कि 17 हजार से ज्यादा मामलों का निपटारा हुआ। उनकी पहल का असर कोर्ट की रोजमर्रा की प्रक्रिया में भी दिखाई दे रहा है। जमानत मामलों की जल्द लिस्टिंग, रिट याचिकाओं की नियमित सूची और पुराने मामलों के निपटारे पर जोर ने कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद की है।

इसे भी पढ़ें : बिहार में AI से बदलेगा सरकारी कामकाज का तरीका, कैसे… बता गये मंत्री नीतीश

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