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Home » सरकारी अस्पतालों में अब नहीं भटकेंगे मरीज, जीविका दीदियां संभाल रहीं मदद की कमान
बिहार

सरकारी अस्पतालों में अब नहीं भटकेंगे मरीज, जीविका दीदियां संभाल रहीं मदद की कमान

August 24, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी अब कुछ कम हुई है। खासकर गांव और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले गरीब परिवारों को अस्पताल में डॉक्टर, जांच और दवा केंद्र ढूंढने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ रहा है। उनकी मदद के लिए जीविका दीदियां स्वास्थ्य मित्र बनकर अस्पतालों में तैनात हैं। ये मरीजों को सही डॉक्टर तक पहुंचाने के साथ जांच, दवा, ब्लड और ऑक्सीजन जैसी जरूरतों में भी मदद कर रही हैं।

राज्य सरकार और जीविका के साझा प्रयास से बिहार में 45 जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र चल रहे हैं। इनमें 35 केंद्र बड़े सरकारी और जिला अस्पतालों में हैं, जबकि 10 केंद्र प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में संचालित हो रहे हैं। यहां अलग-अलग शिफ्ट में स्वास्थ्य मित्र अपनी सेवाएं दे रही हैं।

भागलपुर से शुरू हुआ सफर, अब 45 अस्पतालों तक पहुंची व्यवस्था

जीविका के स्वास्थ्य सहायता केंद्र की शुरुआत 5 सितंबर 2022 को भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच से हुई थी। यहां स्वास्थ्य मित्रों को प्रशिक्षण देकर अलग-अलग शिफ्ट में तैनात किया गया। उनका काम अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इलाज की प्रक्रिया समझाना और उन्हें सही जगह तक पहुंचाना था।

शुरुआत में इस पहल से मरीजों को काफी राहत मिली। इसके बाद धीरे-धीरे दूसरे सरकारी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सहायता केंद्र शुरू किए गए। अब राज्य के 45 अस्पतालों में जीविका दीदियां मरीजों की मदद कर रही हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।

अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज को किस डॉक्टर को दिखाना है, जांच कहां होगी, रिपोर्ट कहां मिलेगी और दवा कहां से लेनी है, इन सबकी जानकारी स्वास्थ्य मित्र देती हैं। इससे मरीज और उनके परिजन अस्पताल के अलग-अलग काउंटरों के चक्कर लगाने से बच जाते हैं।

भर्ती मरीजों की भी रखती हैं पूरी जानकारी

स्वास्थ्य मित्रों की जिम्मेदारी सिर्फ ओपीडी तक सीमित नहीं है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जानकारी भी दर्ज की जाती है। स्वयं सहायता समूह से जुड़े किसी सदस्य या उनके परिवार के व्यक्ति के भर्ती होने पर मरीज का विवरण निर्धारित फॉर्म में दर्ज किया जाता है। इसके बाद मरीज को जिस तरह की मदद की जरूरत होती है, उसके लिए संबंधित विभाग से संपर्क किया जाता है।

इलाज के दौरान ब्लड या ऑक्सीजन की जरूरत हो तो उसकी व्यवस्था कराने में भी स्वास्थ्य मित्र सहयोग करती हैं। मरीजों के भोजन की जरूरत होने पर भी संबंधित लोगों से समन्वय किया जाता है। डॉक्टर, नर्स, एएनएम, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी कर्मियों के साथ संपर्क बनाकर मरीज की जांच और इलाज की प्रक्रिया को आसान करने की कोशिश की जाती है।

इलाज के बाद भी मरीजों की जानकारी पर नजर रखी जाती है। डॉक्टर ने दोबारा जांच या फॉलोअप के लिए बुलाया है तो मरीज और डॉक्टर के बीच समन्वय कराने में भी स्वास्थ्य मित्र मदद करती हैं।

गरीब परिवारों के लिए अस्पताल की भागदौड़ हुई आसान

बड़े सरकारी अस्पतालों में पहली बार पहुंचने वाले मरीजों के लिए सबसे मुश्किल काम होता है सही विभाग और डॉक्टर तक पहुंचना। ग्रामीण परिवारों के साथ यह परेशानी और बढ़ जाती है। कई लोग अस्पताल की व्यवस्था से परिचित नहीं होते और जानकारी के अभाव में एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक घूमते रहते हैं।

जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र इस परेशानी को कम करने का काम कर रहे हैं। मरीजों को एक जगह से जानकारी मिल जाती है और वे सीधे संबंधित डॉक्टर या जांच केंद्र तक पहुंच जाते हैं। इससे समय भी बच रहा है और इलाज की प्रक्रिया भी कुछ आसान हो रही है।

स्वास्थ्य सहायता केंद्रों के संचालन के लिए स्थानीय जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ की ओर से स्वास्थ्य मित्रों का चयन किया जाता है। चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद वे अस्पतालों में अलग-अलग शिफ्ट में अपनी जिम्मेदारी संभालती हैं।

परेशानी और बिचौलियों से बचाना सरकार का मकसद : श्रवण कुमार

ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्था का सीधा लाभ गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को मिल रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि इलाज के लिए आने वाले हर व्यक्ति को जल्द और सहज सहायता मिले, ताकि उसे किसी तरह की परेशानी या बिचौलियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह के सुधार जनता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं।

इसे भी पढ़ें : क्रिकेट के बाद अब दूसरे खेलों की बारी, प्रखंडों में बनेंगे आधुनिक खेल परिसर : मंत्री श्रेयसी सिंह

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