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Ayodhya : उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत और खुशियों भरा साबित हुआ। धर्मनगरी अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की लाखों आंगनवाड़ी बहनों की झोली सौगातों से भर दी। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि अब आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को हर महीने 12 हजार रुपये और सहायिकाओं को 6 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने इन सभी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की सेहत की चिंता करते हुए हर साल 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बच्चों की पहली शिक्षक और पोषण की मजबूत नींव तैयार करने वाली इन बहनों के सम्मान और सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
अयोध्या में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मेधावी बच्चों, पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली सुपरवाइजर्स और नई भर्ती हुई कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र बांटे। इस दौरान पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों से आंगनवाड़ी बहनें वर्चुअल माध्यम से जुड़ी रहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का मकसद सिर्फ कागजी घोषणाएं करना नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाली महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है।
मानदेय में सीधा इजाफा, काम के आधार पर और बढ़ेगा पैसा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पुरानी सरकारों के दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को सिर्फ 3 हजार रुपये महीना मिलता था। हमारी सरकार ने इसे पहले बढ़ाकर 8 हजार रुपये किया और अब इसे सीधे 12 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है। ठीक इसी तरह सहायिकाओं को पहले केवल 1500 रुपये महीना दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 4 हजार किया गया और अब वे हर महीने 6 हजार रुपये पाएंगी।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब मानदेय को परफॉर्मेंस यानी काम की गुणवत्ता से भी जोड़ दिया गया है। जो बहनें अपने केंद्र पर बच्चों की सेहत, उपस्थिति और योजनाओं के क्रियान्वयन में शानदार काम करेंगी, उन्हें आगे चलकर मानदेय वृद्धि में सीधा फायदा मिलेगा। इससे मेहनत करने वाली कार्यकर्ताओं की पहचान होगी और उन्हें अपनी मेहनत का पूरा फल भी मिलेगा।

गंभीर बीमारी में इलाज की चिंता खत्म, 5 लाख का सालाना सुरक्षा कवच
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है कैशलेस स्वास्थ्य योजना। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों, सहायिकाओं और उनके पूरे परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस हेल्थ कवर दिया जाएगा। अक्सर देखने में आता था कि परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर इन बहनों की पूरी जमा-पूंजी इलाज में खर्च हो जाती थी। अब उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह सुविधा सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ सरकार के पैनल में शामिल बड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि यह कोई एक बार मिलने वाली मदद नहीं है, बल्कि हर साल 5 लाख रुपये का यह सुरक्षा कवच रिन्यू होगा। इससे पहले सरकार ने बेसिक शिक्षा से जुड़े 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को इस दायरे में लिया था, और अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस दायरे में लाकर पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है।
साड़ी के लिए सीधे खाते में भेजी रकम, डिजिटल काम के लिए मिले स्मार्टफोन
कार्यकर्ताओं की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए सरकार ने ड्रेस कोड में भी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साल में 2 साड़ियां दी जाती थीं। अब इसमें एक और साड़ी जोड़ दी गई है। इस तीसरी साड़ी के लिए 500 रुपये की अतिरिक्त धनराशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेज दी गई है। कार्यक्रम के दौरान ही वर्ष 2026-27 के लिए 2 लाख 91 हजार से ज्यादा बहनों के खातों में यह पैसा ट्रांसफर किया गया।
इसके अलावा काम को आसान बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन दिए जा रहे हैं। पहले चरण में 1 लाख 28 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को आधुनिक स्मार्टफोन बांटे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है, यह काम का बोझ बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि रजिस्टर के झंझट को खत्म करने के लिए है। मोबाइल फोन की मदद से बहनें सीधे पोषण ट्रैकर पर रियल टाइम डेटा दर्ज कर सकेंगी, जिससे कागजी लिखा-पढ़ी कम होगी और योजनाओं की मॉनिटरिंग पारदर्शी बनेगी।

माफिया के चंगुल से छूटा राशन, अब महिलाएं खुद चला रहीं 204 प्लांट
मुख्यमंत्री ने पुरानी व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 9 साल पहले प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्र बेहद बदहाल स्थिति में थे। छोटे-छोटे मासूम बच्चे घर से बोरी और टाट-पट्टी लेकर केंद्रों पर जाते थे। न पीने का साफ पानी था और न ही बैठने की ढंग की जगह। केंद्र सरकार से पैसा आने के बाद भी पिछली सरकारों की लापरवाही से वह बच्चों तक नहीं पहुंच पाता था। टेक होम राशन और पुष्टाहार की पूरी व्यवस्था पर माफियाओं का कब्जा था, जिसकी बदनामी आंगनवाड़ी बहनों के सिर मढ़ दी जाती थी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने सत्ता में आते ही इस माफिया तंत्र को पूरी तरह उखाड़ फेंका। आज प्रदेश भर में 204 स्थानों पर महिला स्वयं सहायता समूह टेक होम राशन के प्लांट चला रहे हैं। अब महिलाएं खुद पौष्टिक आहार तैयार कर रही हैं और अपने ही गांव के बच्चों तक पहुंचा रही हैं। इससे राशन की क्वालिटी बेहतर हुई है, धांधली खत्म हुई है और हजारों महिलाओं को घर के पास ही पक्के रोजगार का जरिया मिल गया है।
70 हजार केंद्रों की सूरत बदली, अब हर केंद्र की होगी अपनी पक्की इमारत
प्रदेश में बुनियादी ढांचे के सुधार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 सालों में 70 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया जा चुका है। सरकार का साफ लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रदेश के हर एक आंगनवाड़ी केंद्र की अपनी पक्की और सर्वसुविधायुक्त इमारत हो। इसके लिए राज्य वित्त आयोग के साथ-साथ अलग से बजट की व्यवस्था की जा रही है ताकि भवनों का तेजी से निर्माण कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर देश का बचपन सुरक्षित, सेहतमंद और सुपोषित रहेगा तभी भारत आत्मनिर्भर और विकसित बन सकेगा। आंगनवाड़ी केंद्र केवल दलिया बांटने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह देश की अगली पीढ़ी की नींव रखने वाली पहली पाठशाला हैं। जब बच्चे को 3 से 6 साल की उम्र में सही पोषण और अच्छी आदतें मिलेंगी, तो उसका भविष्य अपने आप उज्ज्वल हो जाएगा।
कोरोना काल के सेवा भाव को याद कर जताया आभार
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की निष्ठा की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में आंगनवाड़ी बहनों की तुलना यशोदा मैया से की थी, जिन्होंने बाल गोपाल का लालन-पालन किया था। मां के बाद अगर कोई बच्चे के सबसे करीब होता है तो वह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ही होती है। प्रदेश में करीब 2 लाख 91 हजार बहनें बच्चों और गर्भवती महिलाओं की दिन-रात सेवा कर रही हैं।
उन्होंने वैश्विक महामारी कोरोना के मुश्किल दिनों को याद करते हुए कहा कि जब लोग घरों में बंद थे, तब आंगनवाड़ी, आशा और एएनएम बहनों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गांव-गांव दस्तक दी थी। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करना, दवाएं पहुंचाना और पीड़ितों की मदद करना, यह काम इन बहनों ने बिना रुके किया। सरकार उनके इस त्याग और सेवा को कभी नहीं भूल सकती और आज का यह मानदेय विस्तार उसी सम्मान की एक कड़ी है।
रामलला के दर्शन कर सीएम ने संतों से की मुलाकात
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल पर बाल विकास विभाग की प्रदर्शनी देखी। उन्होंने नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन कराया और गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म पूरी की। इसके साथ ही एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई पूरी करने वाली बहादुर बेटियों को सम्मानित किया गया। टेक होम राशन व्यवस्था पर आधारित एक खास कॉफी टेबल बुक और लघु फिल्म का विमोचन भी मंच से किया गया।
मंच पर मौजूद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य और राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी सरकार के कदमों को ऐतिहासिक बताया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए, आरती उतारी और प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर जाकर बजरंगबली की पूजा-अर्चना की और साधु-संतों से कुशलक्षेम जाना।
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