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Bhagalpur : भागलपुर में बाढ़ के बिगड़ते हालात के बीच राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा ने जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों और राहत कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहें ताकि संकट की इस घड़ी में लोगों तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। जिले के 13 अंचलों की 82 पंचायतों के 269 गांवों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है, जिससे करीब 3 लाख 87 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। प्रशासन इन सभी इलाकों में युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने में जुटा है।
नावों से सुरक्षित निकाले गए 23 हजार से ज्यादा लोग
जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं। प्रशासन ने अब तक जोखिम भरे इलाकों से 4,696 परिवारों के 23,412 लोगों को सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। पानी में घिरे दूरदराज के गांवों में आने-जाने और आपातकालीन मदद के लिए 90 नावें लगातार चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही बेघर हुए परिवारों को सिर छिपाने के लिए अब तक 7,025 पॉलिथीन शीट्स बांटी जा चुकी हैं। खरीक के राघोपुर इलाके के बाढ़ पीड़ितों के रहने के लिए इस्माईलपुर के गणेश बासा में विशेष व्यवस्था की गई है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन इलाकों में तत्काल पका हुआ खाना पहुंचाना मुश्किल है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सूखा राशन और जरूरी सामान पहुंचाया जाए।

91 सामुदायिक रसोइयों और 7 प्रमुख शिविरों में भोजन की व्यवस्था
बाढ़ पीड़ितों को खाने-पीने की किल्लत न हो, इसके लिए जिले भर में 91 सामुदायिक रसोइयां दिन-रात चलाई जा रही हैं। इन रसोइयों के जरिए अब तक 1 लाख 92 हजार से ज्यादा लोगों को गरमा-गरम भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा भागलपुर शहर के टीएनबी कॉलेजिएट और सीटीएस चर्च मैदान समेत 7 प्रमुख राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में ठहरने से लेकर भोजन तक का पूरा इंतजाम है, जहां अब तक 20 हजार से ज्यादा लोग शरण ले चुके हैं। मंत्री ने सख्त हिदायत दी कि रसोइयों का संचालन नियमित और पारदर्शी तरीके से हो, ताकि कोई भी भूखा न सोए।
इंसानों के साथ पशुओं के इलाज और चारे का भी पूरा प्रबंध
बाढ़ के पानी के बीच बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 13 मेडिकल कैंप लगाए हैं, जहां अब तक 6,366 मरीजों का इलाज कर उन्हें जरूरी दवाएं दी गई हैं। इंसानों के साथ-साथ पशुधन को बचाने के लिए भी पुख्ता कदम उठाए गए हैं। इलाके में 8 पशु चिकित्सा शिविर और 5 मोबाइल वेटरनरी टीमें लगातार घूम रही हैं। इन टीमों ने अब तक 1,846 बीमार और घायल मवेशियों का उपचार किया है। मंत्री ने पशुपालकों के लिए चारे की कोई कमी न होने देने का आदेश दिया और कहा कि सरकार इस संकट में जनता के साथ मजबूती से खड़ी है, बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
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