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Home » हाजीपुर सदर अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, बिना इलाज मरीजों को टरकाने पर बिफरे
Headlines

हाजीपुर सदर अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, बिना इलाज मरीजों को टरकाने पर बिफरे

September 10, 2026No Comments4 Mins Read
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Hajipur : हाजीपुर सदर अस्पताल में गुरुवार को उस वक्त खलबली मच गयी, जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक इमरजेंसी वार्ड में दाखिल हो गए। कागजों पर चाक-चौबंद दिखने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई, जब पेट दर्द तक के सामान्य मरीजों को बिना किसी बुनियादी जांच के सीधे रेफर करने और आईसीयू से डॉक्टरों के नदारद रहने का सनसनीखेज सच सामने आया। स्वास्थ्य मंत्री के अचानक अस्पताल परिसर में कदम रखते ही डॉक्टरों और कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। अपने इस औचक निरीक्षण में मंत्री ने इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, माइनर ओटी, डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर और दवा काउंटर की गहन पड़ताल की और व्यवस्था में मिली भारी खामियों पर अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।

पेट दर्द पर मरीज को कर दिया बाहर, मंत्री ने बैठाई जांच

निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा खुलासा माइनर ऑपरेशन थियेटर और रेफरल रजिस्टर की जांच में हुआ। रजिस्टर खंगालते ही यह हकीकत सामने आ गई कि डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सामान्य मरीजों को भी सीधे हायर सेंटर का रास्ता दिखा रहे थे। रिकॉर्ड के मुताबिक डॉ. सुमन आनंद ने मीना देवी नाम की महिला मरीज को बिना किसी प्राथमिक जांच और शुरुआती उपचार के ही रेफर कर दिया था। वहीं डॉ. रतन प्रकाश ने अमित कुमार के मरीज को केवल पेट दर्द की शिकायत पर बिना किसी जरूरी परीक्षण के आगे भेज दिया। इस गंभीर लापरवाही पर स्वास्थ्य मंत्री ने भारी रोष जताया। उन्होंने कहा कि बिना प्राथमिक उपचार के मरीजों को रेफर करना सीधे तौर पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ है। मंत्री ने इन दोनों मामलों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही आदेश दिया कि अस्पताल में रेफरल का पूरा ब्योरा ऑनलाइन और रियल टाइम अपडेट रहना चाहिए, ताकि बेवजह रेफर करने की इस परिपाटी पर हमेशा के लिए रोक लग सके।

ड्यूटी से डॉक्टर नदारद, कोर्ट के बहाने पर मांगा समन

अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू में व्यवस्था का हाल और भी चौंकाने वाला मिला। ड्यूटी रोस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर की जांच के दौरान आईसीयू में तैनात डॉ. सौरभ प्रकाश अपनी ड्यूटी से गायब मिले। जब अस्पताल प्रशासन से उनकी अनुपस्थिति पर जवाब मांगा गया, तो बताया गया कि डॉक्टर साहब किसी अदालती काम से कोर्ट गए हैं। इस दलील पर स्वास्थ्य मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि केवल मौखिक बातों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने संबंधित चिकित्सक को अदालत द्वारा जारी समन और विधिक कागजात प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से भी सीधा संवाद किया। इस दौरान एक बुजुर्ग मरीज ने अस्पताल में मिल रही सुविधाओं की तारीफ की, लेकिन मंत्री ने कर्मियों को स्पष्ट चेताया कि स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होगा।

दवाओं के ऑफलाइन स्टॉक में गड़बड़ी, फार्मासिस्ट को अल्टीमेटम

लापरवाही का यह सिलसिला दवा वितरण काउंटर और भंडार कक्ष तक फैला दिखा। जांच में सामने आया कि दवाओं की ऑनलाइन एंट्री तो की जा रही थी, लेकिन भौतिक यानी ऑफलाइन स्टॉक रजिस्टर लंबे समय से अद्यतन नहीं था। फार्मासिस्ट विवेक वर्धन के स्टॉक रजिस्टर में दवाओं का सही हिसाब न मिलने पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने फार्मासिस्ट को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में दवाओं का सटीक और ताजा रिकॉर्ड दर्ज होना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक हिदायत दी कि एंटी-रेबीज वैक्सीन सहित किसी भी जीवनरक्षक दवा की कमी अस्पताल में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को हर हाल में गुणवत्तापूर्ण और समय पर इलाज मिलना चाहिए, किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

इसे भी पढ़ें : लालटेन युग से निकला बिहार, अब हर गरीब की छत तक पहुंचेगा सोलर पावर : ऊर्जा मंत्री

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