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Patna : बैंक प्रबंधन, वित्त मंत्रालय और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच पिछले दो दिनों से चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल होने के बाद बैंक यूनियनों ने 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल करने का ऐलान किया है। इसका असर बिहार समेत पूरे देश की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके बाद 12 सितंबर को शनिवार और 13 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को लगातार तीन दिनों तक बैंक से जुड़े कई जरूरी कामों के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
11 सितंबर को बैंक कर्मचारी रहेंगे हड़ताल पर
बैंक यूनियनों की ओर से 11 सितंबर को देशभर में हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस दौरान बैंक कर्मचारियों के काम पर नहीं आने से शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। बैंक में जाकर पैसे जमा करना, नकदी निकालना, चेक से जुड़े काम, बैंक खाते से संबंधित कई सेवाएं और अन्य शाखा आधारित काम प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों को बैंक की शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है, उन्हें इसके लिए पहले से तैयारी कर लेने की जरूरत है।
शनिवार और रविवार की छुट्टी से बढ़ेगी परेशानी
हड़ताल के अगले दिन 12 सितंबर को शनिवार है और इसके बाद 13 सितंबर को रविवार है। इस वजह से बैंक ग्राहकों को लगातार तीन दिनों तक शाखाओं में नियमित सेवा नहीं मिल पाएगी। खासकर ऐसे लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है, जिन्हें नकदी की जरूरत है या जिनका कोई जरूरी काम बैंक शाखा से ही पूरा होना है। इसलिए जरूरी कामों को टालने के बजाय लोग समय रहते निपटा लें तो बेहतर रहेगा।
UPI और मोबाइल बैंकिंग से मिल सकती है राहत
बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद होने की उम्मीद नहीं है। UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी सेवाएं उपलब्ध रहने की संभावना है। इससे ऑनलाइन पैसे भेजने, बिल का भुगतान करने और दूसरी डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, ATM में नकदी की उपलब्धता स्थानीय स्थिति पर निर्भर करेगी। जिन लोगों को ज्यादा नकदी की जरूरत पड़ने वाली है, उनके लिए पहले से तैयारी करना बेहतर होगा।
आम लोगों के लिए क्या बढ़ सकती है परेशानी
बैंक हड़ताल का सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। जिन लोगों को वेतन या किसी अन्य भुगतान से जुड़ा काम बैंक शाखा के माध्यम से करना है, उन्हें परेशानी हो सकती है। इसके अलावा चेक क्लियरेंस, नकदी से जुड़े काम और बैंक शाखा में जाकर किए जाने वाले दूसरे जरूरी काम भी प्रभावित हो सकते हैं। अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी नकदी की व्यवस्था पहले ही कर लेना समझदारी होगी।
व्यापारियों और कारोबारियों को भी झेलनी पड़ सकती है दिक्कत
बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने का असर बाजार और कारोबार पर भी दिखाई दे सकता है। कारोबारियों के भुगतान, बैंक से जुड़े लेनदेन और अन्य वित्तीय काम प्रभावित होने की आशंका है। अर्थशास्त्री डॉ. विद्यार्थी विकास के अनुसार बैंक हड़ताल का असर केवल बैंक ग्राहकों तक सीमित नहीं रहता। बैंकिंग लेनदेन में रुकावट आने से व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। इससे बाजार में पैसों का लेनदेन धीमा हो सकता है और कारोबारियों को अपने कई काम आगे बढ़ाने में परेशानी हो सकती है।
सरकारी कामकाज पर भी पड़ सकता है असर
बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने का असर सरकारी विभागों के वित्तीय कामों पर भी पड़ सकता है। भुगतान, सरकारी लेनदेन और बैंक से जुड़े दूसरे कामों में देरी होने की संभावना है। हड़ताल की वजह से सरकारी स्तर पर भी वित्तीय गतिविधियां प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इससे सरकार और आम लोगों, दोनों के लिए कई कामों में देरी हो सकती है।
बिहार के बैंक ग्राहकों को भी रहना होगा तैयार
पटना समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में बैंक ग्राहकों को हड़ताल को देखते हुए पहले से तैयारी करनी होगी। खासकर जिन लोगों का कोई जरूरी बैंकिंग काम है, वे 11 सितंबर से पहले उसे पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी उपलब्ध सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, जरूरी कामों के लिए केवल डिजिटल सेवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा।
तीन दिन बैंक बंद रहने से बढ़ सकती है लोगों की परेशानी
कुल मिलाकर 11 सितंबर की हड़ताल और उसके बाद शनिवार व रविवार की छुट्टी के कारण बैंक ग्राहकों को लगातार तीन दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बैंक शाखा से जुड़े जरूरी काम करने वाले लोगों को इसका खास ध्यान रखना होगा। ऐसे में अगर आपको नकदी निकालनी है, चेक जमा करना है या बैंक शाखा से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो उसे समय रहते पूरा कर लेना बेहतर होगा। डिजिटल भुगतान के विकल्प मौजूद रहने से रोजमर्रा के कई लेनदेन जारी रखे जा सकते हैं।
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