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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : NGT यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त नियमों और जिला प्रशासन की लगातार हिदायतों के बावजूद गोला प्रखंड में बालू का खेल बेखौफ चल रहा है। इलाके की मुख्य सड़कों पर दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक बालू लदे वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही बदस्तूर जारी है। इन गाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन ने रोक लगा रखी है, तो फिर इतनी बड़ी तादाद में बालू कहां से आ रही है और किसकी शह पर ढोई जा रही है। इस खुलेआम आवाजाही ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासनिक निगरानी और पुलिस गश्त की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीसी की सख्त हिदायत के बाद भी जमीन पर असर नहीं
हाल ही में जिले के डीसी ऋतुराज ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ निर्देश दिया था कि जिले में अवैध खनन और ढुलाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। उन्होंने दो टूक कहा था कि जहां भी ऐसा मामला सामने आए, वहां फौरन कड़ी कार्रवाई की जाए। डीसी के इस कड़े रुख के बाद उम्मीद बंधी थी कि बालू माफिया पर लगाम लगेगी, लेकिन गोला की सड़कों का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा है। अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद मुख्य मार्गों पर बालू लदे वाहनों का दौड़ना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोग अब खुलकर पूछ रहे हैं कि जब शीर्ष स्तर से सख्त आदेश जारी हैं, तो फिर सड़कों पर निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी खामोश क्यों हैं।
पारसाडी नदी घाट से मुख्य सड़कों तक फैला नेटवर्क
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पारसाडी क्षेत्र में नदी किनारे से बालू का बड़े पैमाने पर उठाव किया जा रहा है। वहां से गाड़ियों में बालू लोड करके गोला-मुरी, गोला-रामगढ़ और आसपास के दूसरे प्रमुख मार्गों से अलग-अलग इलाकों में खपाया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि इस पूरे रास्ते में वाहनों से वसूली का खेल भी चल रहा है। हालांकि, इन दावों और आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। हकीकत यह भी है कि सड़कों पर दौड़ने वाले कई वाहनों पर तिरपाल इस तरह ढका रहता है कि उनका नंबर प्लेट तक ठीक से नजर नहीं आता। इससे यह शक और गहरा जाता है कि कहीं बिना वैध चालान और अनुमति के ही यह पूरा खेल तो नहीं चल रहा है।
कागजातों की जांच और ठोस कार्रवाई पर टिकी नजर
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की तस्वीरें सामने आने से ही किसी को सीधे तौर पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि प्रशासन मौके पर उतरकर हर गाड़ी के वैध चालान, परिवहन परमिट, गाड़ी का सही रजिस्ट्रेशन और बालू के खनन स्रोत की बारीकी से पड़ताल करे। अगर जांच में यह बात साबित होती है कि खनन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है, तो इससे सरकार को मिलने वाले भारी राजस्व का नुकसान भी तय है। फिलहाल पूरे इलाके की नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदार महकमा इन शिकायतों पर संज्ञान लेकर धरातल पर जांच शुरू करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।
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