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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ की आबोहवा में रविवार की सुबह कुछ अलग ही सुकून था। रांची रोड की तरफ बढ़ रहे लोगों के कदमों में जल्दीबाजी नहीं, बल्कि एक ठहराव और चेहरे पर आस्था की चमक दिख रही थी। मौका था स्वर्गीय रामचंद्र रूंगटा की स्मृति में सजे श्रीमद्भागवत कथा के महाआयोजन का। अक्सर लोग अपने पुरखों को याद करने के लिए रस्मी कार्यक्रम करते हैं, मगर रूंगटा परिवार ने अपने दिवंगत मुखिया की याद को पूरे शहर के लिए आस्था का एक बड़ा पर्व बना दिया। जिमखाना क्लब का कोना-कोना इस बात की गवाही दे रहा था कि जब किसी परिवार की नीयत में सेवा और संस्कार जुड़े हों, तो वह आयोजन सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे समाज का हो जाता है।
जब सड़कों पर उतरी आस्था, हर पीढ़ी एक साथ गुनगुनाती दिखी
प्रणीत टावर के पास मंदिर परिसर से जब मंगल कलश यात्रा शुरू हुई, तो वह दृश्य देखने लायक था। चटक लाल-पीली साड़ियों में सजी महिलाएं सिर पर कलश संभाले सधे कदमों से आगे बढ़ रही थीं। उनके होठों पर भजन थे और चेहरे पर एक अजीब सा आत्मिक संतोष। कई बुजुर्ग महिलाएं जो आम दिनों में घर की चौखट लांघने में भी थक जाती हैं, वे भी कलश उठाए पूरे रास्ते मुस्कुराते हुए चलीं। पुरुषों के हाथ में ध्वज और जुबान पर ‘राधे-राधे’ का नाम था। मारवाड़ी युवा मंच और महिला चेतना समिति के युवा कार्यकर्ता किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो, यह देखते हुए पानी पिलाने और रास्ता बनाने में जुटे रहे। यह सिर्फ एक शोभायात्रा नहीं थी, बल्कि शहर के लोगों का आपस में जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को टटोलने का जरिया बन गई।

वृंदावन की खुशबू लेकर आए मृदुल कृष्ण महाराज, राज्यपाल भी बने श्रोता
कथा पंडाल में दाखिल होते ही धूप और अगरबत्ती की महक ने लोगों को भीतर तक शांत कर दिया। व्यासपीठ से जब वृंदावन के कथाव्यास आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने अपनी मधुर आवाज में भागवत के श्लोक छेड़े, तो लोग पलकें झपकाना भूल गए। उन्होंने बड़े ही सहज शब्दों में समझाया कि पितृपक्ष में अपनों को याद करने का सबसे सुंदर तरीका यही है कि हम उनके दिए संस्कारों को अपने आचरण में उतारें। इसी बीच झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी कथा स्थल पहुंचे। वीआईपी प्रोटोकॉल से परे, वे बिल्कुल एक आम श्रद्धालु की तरह व्यासपीठ के सामने नतमस्तक हुए और भागवत ग्रंथ पर पुष्प अर्पित किए। राज्यपाल का यह सहज भाव और रूंगटा परिवार का विनम्र सत्कार वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।
भजनों पर झूमते रहे लोग, 10 अक्टूबर तक बहेगी भक्ति की रसधार
कथा के बीच जैसे ही राधा-कृष्ण की झांकी मंच पर आई और भक्ति संगीत की तान छेड़ी गई, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। क्या जवान, क्या बुजुर्ग, कई श्रद्धालु अपनी जगह खड़े होकर भाव-विभोर होकर झूमने लगे। पहले दिन की कथा जब आरती और प्रसाद के साथ संपन्न हुई, तो किसी का भी पंडाल से बाहर जाने का मन नहीं कर रहा था। आयोजन से जुड़े आलोक रूंगटा और माया रूंगटा हाथ जोड़कर आने वाले हर अतिथि और आम नागरिक का आभार जता रहे थे। उन्होंने शहर के लोगों से कहा कि 10 अक्टूबर तक चलने वाला यह अनुष्ठान सबका अपना है। रोज दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलने वाली इस कथा में हर कोई अपने परिवार के साथ पहुंचे, क्योंकि भागवत की यह रसधार जीवन की भागदौड़ के बीच मन को शांत करने की सबसे बड़ी दवा है।
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